कैसे 'ब्रांड' बन चुके हैं हरियाणा के मुर्रा भैंसे, इन करोड़पति भैंसों के बारे में जानिए
जींद, 26 दिसंबर: हरियाणा के मुर्रा भैंसे अब दुनियाभर में लोकप्रिय हो चुके हैं। इनकी नस्ल के दीवानों की भरमार बढ़ती जा रही है। इसकी वजह है इनकी सुंदरता और इनके वीर्य की गुणवत्ता। अभी हरियाणा के जींद के एक ऐसे ही एक भैंसे ने हिमाचल प्रदेश में एक राष्ट्रीय खिताब अर्जित किया है। इस भैंसे का नाम है रुश्तम, जिसने फिलहाल लोकप्रियता में बाकी सभी फेमस भैसों को पीछे छोड़ दिया है। जानकारी के मुताबिक रुश्तम की कीमत 11 करोड़ रुपए लगाई गई है। भैंसे की इतनी ऊंची कीमत का यह कोई पहला मामला नहीं है, एक बार सुल्तान नाम के भैंसे की भी 21 करोड़ रुपये कीमत दी जा रही थी, हालांकि उसके मालिक ने उसे बेचने से साफ मना कर दिया था।

ब्रांड बन गए हैं हरियाण के मुर्रा भैंसे
हरियाणा पशुपालकों के लिए मुर्रा भैंसे सोने से कम कीमती नहीं हैं। मुर्रा भैंसे का वीर्य इतनी उच्च गुणवत्ता वाला है, जिसकी डिमांड कभी कम नहीं होती। आज की तारीख में हरियाणा मुर्रा भैंस और भैसों के लिए दुनिया भर में मशहूर हो चुका है। कुछ भैंसे अपने आप में एक ब्रांड बन चुके हैं। सूत्रों का दावा है कि हाल ही में एक मुर्रा भैंसा हरियाणा में 11 करोड़ रुपये में बिका है, हालांकि इस दावे की स्वतंत्र तौर पर पुष्टि नहीं की जा सकी है। हाल ही में इसी तरह से रुश्तम नाम का एक भैंसा खूब लोकप्रिय हुआ है, जिसकी शोहरत दूर तक पहुंच रही है। रुश्तम के बारे में दावा किया जाता है कि यह अपनी खूबसूरती और उच्च गुणवत्ता वाले वीर्य की वजह से चर्चित तो है ही, यह अपने मालिक के लिए सालाना 20 लाख रुपये तक की कमाई का भी जरिया है।

रुश्तम ने 5 लाख रुपए का पुरस्कार जीता
रुश्तम के मालिक हरियाणा के जींद जिले में गतौली गांव के दलेल सिंह हैं। पिछले 18 दिसंबर को रुश्तम ने हिमाचल प्रदेश के सोलन में आयोजित पशु मेले में विभिन्न मापदंडों पर कई भैंसों को हराकर चैंपियनशिप हासिल की है। 9 साल का खूबसूरत रुश्तम 15 फीट लंबा और करीब 6 फीट ऊंचा है। इसे विजेता घोषित होने पर 'कृषक रत्न' सम्मान के साथ 5 लाख रुपये के पुरस्कार से नवाजा गया है। अपनी खूबसूरती के लिए अब यह हिमाचल से हरियाणा तक लोकप्रिय हो चुका है। रुश्तम के मालिक दलेल सिंह के मुताबिक यह करीब 5 मिली लीटर शुक्राणु पैदा करता है, जिसे तीन बार निकाला जा सकता है। यह प्रक्रिया हर तीन महीने में 15 दिनों तक के लिए चलती है। इसके शुक्राणु के एक शॉट से 400 स्ट्रॉ तैयार होते हैं, जो 400 रुपये प्रति स्ट्रॉ के हिसाब से बिकते हैं। यानी इस तरह से यह हर तीन महीने में 10 हजार शॉट उत्पादित करताहै।

50 हजार बछड़ों का पिता बन चुका है रुश्तम
रुश्तम के मालिक के अनुसार इसकी खुराक में रोजाना 8 लीटर दूध, 300 ग्राम देसी घी, 3 किलो चना, आधा किलो मेथी,100 ग्राम बादाम, 3.5 किलो गाजर के अलावा उसका बाका का चारा शामिल होता है। इस भैंसे को हर दिन सुबह-शाम 2 से 3 किलो मीटर टहलाया जाता है। इसके मालिक के मुताबिक रुश्तम 26 राष्ट्रीय चैंपियनशिप के अलावा, 6 अंतरराष्ट्रीय खिताब भी जीत चुका है। उनका सबसे बड़ा दावा है कि रुस्तम अब तक 50 हजार बछड़ों का पिता बन चुका है।

रुश्तम से पहले युवराज भी रहा है नेशनल चैंपियन
Flashback 2021: इस साल वायरल हुए ये टॉप वाइल्डलाइफ Videos, लोगों ने खूब किया पसंदहरियाणा में रुश्तम ने अभी जो शोहरत हासिल की है, यह प्रदेश में भैंसों की ब्रांडिंग में एक नई कड़ी है। इससे पहले राज्य के कई और भैंसों ने अपनी ख्याति बनाई है। मसलन, कुरुक्षेत्र का युवराज, कुरुक्षेत्र के ही चंदोली गांव का बजरंगी भी रुश्तम की तरह ब्रांड नाम बन चुके हैं। कुरुक्षेत्र जिले के सुनरिया गांव के कर्मबीर सिंह युवराज के मालिक हैं। उनका कहना है कि वह 18 साल के युवराज से भावनात्मक तौर पर जुड़ चुके हैं, इसलिए ऊंची कीमतें मिलने के बावजूद उन्होंने इसे बेचने का इरादा खारिज कर दिया है। युवराज भी नेशनल चैंपियन रह चुका है और देश में हजारों बछड़ों को जन्म दे चुका है। (युवराज की तस्वीर- 2017 की सूरजकुंड मेले की है)

सुल्तान का बेटा चांद भी हुआ मशहूर
इसी तरह से एक और भैंसा जो मशहूर हो चुका है, उसका नाम है- चांद। इसके मालिक पानीपत जिले के सोधापुरगांव प्रदीप तरुण हैं, जो बी टेक की पढ़ाई छोड़कर किसानी करने लगे थे। चांद का पिता सुल्तान अपने आप में एक मशहूर भैंसा था, जिसके नाम कई राष्ट्रीय अवार्ड हैं, वह झज्जर का नेशनल एनीमल ब्यूटी कम्पटीशन भी जीत चुका था। गौरतलब है कि राजस्थान के पुष्कर मेले में एक पशु प्रेमी ने सुल्तान की 21 करोड़ रुपये की बोली लगाई थी, लेकिन उसके मालिक नरेश बेनीवाल ने इस ऑफर को ठुकरा दिया था। (कुछ तस्वीरें ट्विटर के वीडियो से )












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