Haryana News: हरियाणा में जमीन घोटाले को लेकर सख्ती के मूड में सीएम नायब सिंह, एसआईटी करेगी मामले की जांच
Haryana News: हरियाणा के गुरुग्राम में मंत्रिमंडल के फर्जी पत्र के आधार पर तकरीबन 500 करोड़ की जमीन हड़पने के मामले पर सरकार सख्त हो गई है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के निर्देश पर पुलिस ने विशेष जांच दल गठित किया है। सरकार द्वारा गठित इस टीम में स्थानीय पुलिस को शामिल नहीं किया गया है। इसमें पंचकूला क्राइम ब्रांच की पुलिस को रखा गया है। डीएसपी स्तर के अधिकारी एसआईटी का नेतृत्व करेंगे।
पुलिस ने इस मामले में पूछताछ के लिए 6 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया है। मंत्रिमंडल का फर्जी नोट बनाने से लेकर जमीन रिलीज करने की प्रक्रिया में लाइजनरों और प्रॉपर्टी डीलरों का बड़ा रोल है। मुख्य सचिव कार्यालय की कैबिनेट ब्रांच राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग और गुरुग्राम के अधिकारियों व कर्मचारियों की संलिप्त बताई जा रही है। फर्जी पत्र के आधार पर गुरुग्राम के राजीव चौक, बादशाहपुर और घसौला की जमीन रिलीज करा कर पंजीकृत कराई जाने वाली थी।

मंत्रिमंडल के फर्जी नोट के क्रम संख्या 6 और 7 पर गुरुग्राम के घसौला की 8 एकड़ जमीन का रिकॉर्ड सही पाया जा चुका है। यह जमीन गुरुग्राम के सेक्टर 49 में पड़ती है। जहां 10 से 15 करोड़ रुपए प्रति एकड़ की रेट है। पुलिस और सीआईडी द्वारा जुटाई गई प्राथमिक सूचना के मुताबिक अभी तक इस पूरे खेल का मास्टरमाइंड गुरुग्राम के गांव झाड़सा का रहने वाला महेंद्र है। जो दलाली करता है। वह जमीनों के कागज अटेस्ट करने का काम भी देखता है।
आपको बता दे कि घोटालेबाजों ने पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के नेतृत्व वाले मंत्रिमंडल का फर्जी पत्र तैयार किया था। मुख्य सचिव टीवीएस प्रसाद ने अपने कार्यालय की शाखा के कर्मचारियों को तलब किया तो पता चला कि मनोहर मंत्रिमंडल का यह पत्र फर्जी है। मुख्य सचिव ने जमीन रिकॉर्ड में डायरेक्टर को पंचकूला में केस दर्ज करने के आदेश दिए।
पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है। पत्र में कैबिनेट ब्रांच के अधीक्षक का हस्ताक्षर भी फर्जी किया गया था। इस पत्र में 15 और 21 सितंबर 2023 की तारीख लिखी हुई है। जबकि इस दौरान कोई कैबिनेट की बैठक नहीं हुई थी। तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की अध्यक्षता में नवंबर में कैबिनेट की बैठक हुई थी।
इस फर्जीवाड़े का खुलासा कैबिनेट नोट पढ़ने के बाद हुआ। जिसमें दर्ज भाषा ही नोट में मुख्यमंत्री और एफसीआर दोनों के पद लिखे गए थे। जबकि कैबिनेट मीटिंग के सिस्टम में कैबिनेट मीटिंग का नोट वरिष्ठता के हिसाब से लिखा जाता है। लेकिन उसमें उसके विपरीत लिखा गया था।












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