Haryana News: एकीकृत सहकारी विकास परियोजना की 14 परियोजनाओं का ऑडिट कार्य पूरा, 2 का ऑडिट कार्य प्रगति पर
Haryana News: हरियाणा के सहकारिता मंत्री डॉ. बनवारी लाल ने कहा कि राज्य में एकीकृत सहकारी विकास परियोजना के प्रथम चरण की 17 परियोजनाओं में से 14 आईसीडीपी परियोजनाओं का ऑडिट का कार्य पूर्ण हो चुका है। इसके अलावा दूसरे चरण की प्रथम भाग की दो परियोजनाओं का ऑडिट कार्य भी पूर्ण हो चुका है। शेष पांच परियोजनाओं की अंतिम ऑडिट रिपोर्ट जारी कर दी गई है। भाग 2 की परियोजनाओं का ऑडिट कार्य प्रगति पर है।
हरियाणा के सहकारिता मंत्री बुधवार को विधानसभा में बजट सत्र के अंतिम दिन ध्यानाकर्षण सूचना प्रस्ताव का जवाब दे रहे थे। सहकारिता मंत्री ने कहा कि सरकार ने वर्ष 2000 के बाद स्वीकृति सभी आईसीडीपी परियोजनाओं का फॉरेंसिक और तीसरे पक्ष से वित्तीय ऑडिट करवाने का भी निर्णय लिया है। इस संबंध में सरकार द्वारा प्रमुख समाचार पत्रों में स्वतंत्र ऑडिटिंग फर्मों के पैनल के लिए 6 फरवरी 2024 को विज्ञापन जारी कर दिया गया है।

सहकारिता मंत्री ने कहा कि सरकार के निर्देशानुसार 17 नवंबर 2022 को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो हरियाणा द्वारा इन आईसीडीपी परियोजनाओं की जांच शुरू की गई। मई व जुलाई 2023 में 4 प्राथमिक रिपोर्ट दर्ज की गई। इसके अलावा सरकार ने 11 जुलाई 2023 को कैथल, कुरुक्षेत्र, करनाल, पानीपत, सोनीपत और गुरुग्राम सहित 6 जिलों में चल रही परियोजनाओं के बैंक खातों को फ्रीज करने हेतु हिदायत जारी कर निर्देश दिए गए कि केवल वेतन और कार्यालय खर्च के अलावा आईसीडीपी के किसी भी फंड का उपयोग न किया जाए और वर्ष 2023-24 के दौरान कोई भी धनराशि जारी नहीं की गई।
सहकारिता मंत्री ने कहा कि भ्रष्टाचार निरोधक विरोध द्वारा जांच को आगे बढ़ते हुए जनवरी-फरवरी 2024 में भी 9 प्राथमिक रिपोर्ट दर्ज करवाई। इन 13 प्राथमिक रिपोर्ट के अनुसार कुल 8.80 करोड़ रुपए है। सरकार ने अनुछेद 311(2बी) का प्रयोग करते हुए 23 अक्टूबर 2023 को वरिष्ठ लेखाकार सुमित अग्रवाल तथा 21 फरवरी 2024 को सहायक रजिस्ट्रार अनु कोशिश, उप लेखा परीक्षक योगेंद्र अग्रवाल, सहायक रजिस्ट्रार सहकारी रामकुमार को बर्खास्त कर दिया गया।
उन्होंने कहा कि प्राथमिक रिपोर्ट दर्ज में वर्णित एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो द्वारा गिरफ्तार अन्य सभी 9 अधिकारियो में सहायक रजिस्ट्रार कृष्ण चंद्र बेनीवाल, जितेंद्र कौशिक को 4 फरवरी 2024 महाप्रबंधक केंद्रीय सहकारी बैंक संजय हुड्डा को 5 फरवरी 2024 लेखा परीक्षा अधिकारी बलविंदर सिंह को 6 फरवरी 2024 उप रजिस्ट्रार सहकारी समितियां रोहित गुप्ता, प्रबंधक हरको बैंक विजय सिंह को 7 फरवरी 2024 सहायक रजिस्ट्रार संदीप खटकड़, नरेंद्र कुमार को 15 फरवरी 2024 एवम 26 फरवरी 2024 को निलंबित कर दिया गया है।
डॉ. बनवारी लाल ने कहा कि भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की तफ्तीश में पाया गया है कि आईसीडीपी के अधिकतर कार्य दोषी स्टालिन जीत सिंह कंपनियां व फॉर्म को अलॉट किए गए। यह लगातार 20 वर्षों से सहकारी का विभाग में कार्य कर रही थी। ऑडिट विंग के लेखा परीक्षक विनोद कुमार, ईश्वर सिंह, वरिष्ठ लेखा परीक्षक ईश्वर सिंह, नीलम ढींगरा को ऑडिट करने में लापरवाही के कारण 17 फरवरी 2024 को निलंबित कर दिया गया और उनके खिलाफ आरोप पत्र जारी किया गया।
प्रबंध निदेशक हरियाणा राज्य सहकारी एवं कृषि ग्रामीण विकास बैंक नरेश गोयल को जुलाई 2017 में नोडल अधिकारी आईसीडीपी का अतिरिक्त कार्य भर दिया गया था। आईसीडीपी का नोडल अधिकारी 5 फरवरी 2024 को किसी अन्य को चार्ज दिया गया है।
सहकारिता मंत्री ने बताया कि विभाग द्वारा लगातार दोषी अधिकारियों कर्मचारियों के विरुद्ध कार्यवाही की जा रही है। लेखा अधिकारी अनमोल रतन को 4 अक्टूबर 2021 उप मुख्य लेखा परीक्षक योगेंद्र अग्रवाल को 8 नवंबर 2021, लेखा परीक्षा अधिकारी प्रवीण गुप्ता को 19 अप्रैल 2022, उप अधीक्षक इंदर सिंह, लिपिक जिले सिंह लिपिक, नवल सिंह को 15 दिसंबर 2022 को निलंबित किया गया और आरोप पत्र जारी किए गए। इसके अलावा सहायक रजिस्ट्रार अनु कोशिश, निरीक्षक भूपेंद्र यादव, नागेंद्र कुमार एवं अनिल कुमार को भी आरोप पत्र जारी किए गए। इस प्रकार 4 कर्मचारियों को बर्खास्त और 9 कर्मचारियों को निलंबित किया गया।
उन्होंने कहा कि एम डी नरेश गोयल का नाम प्राथमिक रिपोर्ट में दर्ज नहीं था। अगर एसीबी अनुमति मांगेगी तो 15 दिन में अनुमति दे दी जाएगी।
उन्होंने बताया कि आईसीडीपी के प्रथम चरण में राज्य के सभी जिलों को कवर करते हुए 17 परियोजनाएं वर्ष 1992 में शुरू की गई। वे 2013 में पूरी हो गई। इन परियोजनाओं के लिए 135.56 करोड़ रुपए की राशि जारी की गई। जिसमें से 132.19 करोड़ रुपए खर्च किए गए और 3.37 करोड़ रुपए सरकारी खजाने में जमा करवाए गए। इसी प्रकार आईसीडीपी के दूसरे चरण में सात जिलों में भिवानी में मार्च
2011, पंचकुला, अंबाला, सिरसा, हिसार में मार्च 2013 फतेहाबाद में जून 2013, रेवाड़ी में अप्रैल 2017 में स्वीकृत की गई। जो मार्च 2022 तक पूरी हो गई। इन सात परियोजनाओं के लिए कुल 131 करोड़ रुपए जारी किए गए। जिसमें से 107 करोड़ रुपए खर्च कर शेष 19.50 करोड़ रुपए की राशि सरकारी कोष में जमा करवाई गई।
डॉ. बनवारी लाल ने बताया कि राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम की एक पैनलबद्ध सलाहकार एजेंसी द्वारा कैथल, कुरुक्षेत्र, करनाल, पानीपत, सोनीपत और गुरुग्राम सहित 6 जिलों की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार की गई जो जुलाई-अगस्त 2019 में प्रस्तुत की गई। इन परियोजनाओं के लिए 30 मार्च 2021 को स्वीकृति पत्र जारी किया गया। यह परियोजनाएं 31 मार्च, 2024 तक चालू है। इन छह परियोजनाओं के लिए 61.65 करोड़ रुपए की राशि जारी की गई। जिसमें से 19.46 करोड़ रुपए का उपयोग कर शेष 9 करोड़ रुपए सरकारी कोष में जमा करवाए गए। इनके लिए अनुमान तैयार करने की निविदाएं जारी करने और सिविल कार्यों के निष्पादन के लिए जमा कार्य के रूप में हैफेड और हरियाणा वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन को 29 करोड़ रुपए हस्तांतरित किए गए शेष राशि लगभग 4 करोड़ रुपए क्षेत्रीय कार्यालय के खातों में उपलब्ध है।
सहकारिता मंत्री ने बताया कि सैलरी ऑनर्स थ्रिपट एंड क्रेडिट सहकारी समितियां एवं गैर कृषि एंड थ्रिपट क्रेडिट सहकारी समितियां का मुख्य उद्देश्य जमा स्वीकार करके सदस्यों के बीच बचत और बचत की आदतों को प्रोत्साहित करना है। इसके अलावा सदस्यों को सुविधाजनक और आसान शर्तों पर ऋण सुविधा प्रदान करना है। इसके लिए वेतन भोगी कर्मचारी और सैलरी ऑनर्स समितियों तथा गैर कृषि समितियों के आम जन सदस्य बन सकते हैं। राज्य में 326 एसईटीसी तथा एन ए टी सी सहकारी समितियां कार्यरत हैं। जिनमें से हिसार जिले में 133 समितियां हैं। इनमें से अधिकांश समितियां ठीक तरह से कार्य कर रही हैं। लेकिन लगभग 20 की प्रबंध कमेटी ने जमा राशि का उपयोग बिना उचित सत्यापन के ऋण आबटन में किया है। इससे ऋण की वसूली खराब हुई और जमाकर्ताओं को उनकी राशि भी वापस नहीं मिल पाई। इसके बाद विभाग के संज्ञान में कुछ शिकायतें आई तो सरकार ने इन समितियां के पंजीकरण पर 2001 में प्रतिबंध लगा दिया। जहां समिति की प्रबंध कमेटी के सदस्य व कर्मचारियों ने जमा राशि का दुरुपयोग किया है। उनके विरुद्ध हरियाणा सहकारी समिति अधिनियम 1984 की धारा 101 के तहत अधिभार की कार्रवाई की जाती है। अधिनियम की धारा 110 और 111 के तहत दोषियों से समिति के धन की वसूली उनकी चल अचल संपत्ति की कुर्की और बिक्री के माध्यम से की जाती है। ताकि जमाकर्ताओं को जमा राशि की वापसी ऐसी कुर्क संपत्तियों की बिक्री के माध्यम से की जा सके।












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