Haryana Municipal Elections: हरियाणा में कांग्रेस के सफाए का जिम्मेदार कौन, प्रदेश नेतृत्व या हाईकमान?
Haryana Municipal Election Results 2025: हरियाणा के मेयर चुनावों में कांग्रेस का सफाया हो गया है। बीजेपी ने 10 में से 9 मेयर पदों पर जीत दर्ज कर ली, जबकि एक सीट निर्दलीय के खाते में गई। कांग्रेस के लिए यह हार बेहद शर्मनाक मानी जा रही है, क्योंकि इस बार पार्टी ने अपने चुनाव चिह्न पर उम्मीदवार उतारे थे।
कुल मिलाकर आज की तारीख में हरियाणा में बीजेपी की ट्रिपल इंजन की सरकार स्थापित हो चुकी है। यह नतीजे कांग्रेस के लिए बड़ी खतरे की घंटी हैं, जो विधानसभा चुनावों में लगातार तीन बार बीजेपी से पहले ही हार चुकी है। विधानसभा चुनाव पिछले साल के आखिर में हुए थे।

Haryana mayor polls: कांग्रेस का कसूरवार कौन, प्रदेश नेतृत्व या हाईकमान?
2024 के ही लोकसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी के गठबंधन में कांग्रेस पार्टी बीजेपी को आधी सीटों पर रोकने में सफल भी हुई थी। तब, कांग्रेस को लगा था कि अब अपना खोया हुआ जनाधार वापस पा सकती है।
कहीं न कहीं, इसी उत्साह में 'आप' के साथ गठबंधन भी नहीं हो पाया। परिणाम यह हुआ कि असेंबली चुनाव में भाजपा की शानदार जीत से कांग्रेसियों का हौसला इतना पस्त हो गया कि मेयर चुनाव में पार्टी एक तरह से सीन से ही गायब हो गई। अब सवाल उठता है कि हरियाणा में इस करारी हार का असली जिम्मेदार कौन है-प्रदेश नेतृत्व या हाईकमान?
Haryana Mayor Election: कमजोर पड़ा प्रदेश नेतृत्व बिखर गया संगठन!
हरियाणा कांग्रेस में गुटबाजी कोई नई बात नहीं है। प्रदेश नेतृत्व के कमजोर प्रदर्शन के चलते पार्टी में एकजुटता की भारी कमी देखी गई। विधानसभा चुनावों के बाद भी कांग्रेस नेतृत्व पार्टी को एकजुट करने में विफल रहा। आलम तो ये है कि हार के पांच महीने बाद भी कांग्रेस अपना विधायक दल नेता तक नहीं चुन पाई।
पार्टी के कई नेता भी दबी जुबान में इस बात को स्वीकार करते हैं कि कांग्रेस का संगठनात्मक ढांचा कमजोर हो चुका है। इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार वरिष्ठ कांग्रेसी नेता संपत सिंह का कहना है, 'एक मजबूत संगठनात्मक ढांचा तैयार करने की जरूरत है। पूरे प्रदेश में कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने के लिए एकजुटता के साथ प्रयास होने चाहिए।'
पार्टी में आंतरिक कलह का ही प्रमाण है कि प्रदेश अध्यक्ष उदय भान की ओर से घोषित 22 जिलों के प्रभारियों की सूची को कांग्रेस महासचिव दीपक बावरिया ने खारिज कर दिया था। बाद में बावरिया ने अपनी सूची जारी की, जिसका पार्टी के ही कई नेताओं ने विरोध किया।
Haryana Municipal Elections: हरियाणा कांग्रेस की स्थिति पर आंख मूंदे रहा हाईकमान!
कांग्रेस की हार का दूसरा बड़ा कारण पार्टी हाईकमान की उदासीनता बताई जा सकती है। विधानसभा चुनावों के बाद कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व ने हरियाणा में पार्टी को संगठित करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए। कई बार पार्टी नेताओं ने शिकायत की कि हाईकमान ने संगठन को मजबूत करने के लिए कोई गंभीर प्रयास नहीं किए।
पूर्व केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह ने कांग्रेस की हार के पीछे गुटबाजी को सबसे बड़ा कारण बताया था। पार्टी लगातार प्रदेश अध्यक्ष बदलती रही, लेकिन गुटबाजी समाप्त नहीं हुई। अशोक तंवर को हटाकर कुमारी शैलजा को अध्यक्ष बनाया गया, लेकिन इससे भी गुटबाजी खत्म नहीं हुई। बाद में हुड्डा गुट के उदय भान को अध्यक्ष बनाया गया, लेकिन विवाद खत्म होने के बजाय और बढ़ता ही गया।
Haryana municipal elections: हरियाणा में कांग्रेस के सफाए की अन्य वजहें?
1. बीजेपी की रणनीतिक जीत: बीजेपी ने अपनी 'ट्रिपल इंजन सरकार' के नारे के तहत चुनाव लड़ा। मुख्यमंत्री नायब सैनी ने चुनावी नतीजों के बाद कहा कि यह बीजेपी सरकार की नीतियों पर जनता की मुहर है।
2.स्थानीय स्तर पर कांग्रेस की नाकामी: कांग्रेस का स्थानीय स्तर पर संगठन बेहद कमजोर पड़ा। कई वार्डों में तो कांग्रेस के अधिकृत उम्मीदवार तक नहीं थे।
Haryana mayor polls: क्या कांग्रेस की वापसी की उम्मीद अभी भी बची है?
अगर कांग्रेस को हरियाणा में वापसी करनी है तो उसे अपने संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करना होगा। प्रदेश नेतृत्व को मिलकर काम करना होगा। गुटबाजी जारी रही तो पार्टी को आगे भी नुकसान हो सकता है।
कांग्रेस हाईकमान को भी असमंजस की स्थिति दूर करके जल्द ठोस निर्णय लेने होंगे और नेतृत्व की जिम्मेदारी को स्पष्ट करना होगा। अगर ऐसा नहीं किया गया, तो प्रदेश में कांग्रेस की स्थिति और भी खराब हो सकती है।












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