हरियाणा- बाजरा न बोने पर किसानों को प्रति एकड़ मिलेंगे 4000 रुपये, जानिए कैसे होगा पंजीकरण
हरियाणा सरकार ने दलहन व तिलहन फसल को क्षेत्रों में बढ़ावा देने के लिए ये योजना शुरु की है। जिस में सरकार ने कहा है कि अगर किसान अपने खेतो में बाजरा नहीं बोते हैं तो उन्हे 4000 रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से रकम मिलेगी
हरियाणा, 26 जून: हरियाणा सरकार ने दलहन व तिलहन फसल को क्षेत्रों में बढ़ावा देने के लिए ये योजना शुरु की है। जिस में सरकार ने कहा है कि अगर किसान अपने खेतो में बाजरा नहीं बोते हैं तो उन्हे 4000 रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से रकम मिलेगी। फसल विविधीकरण योजना के दक्षिण हरियाणा के 7 जिलों- भिवानी, चरखी, दादरी, महेंप्ररढ़ व नूंह में बाजरा बाहुल्य है। इन जिलों में तिलहन व दलहन फसलों को बढ़ाने के लिए सरकार ने ये फैसला किया है। सरकार का लक्ष्य कम ले कम एक लाख एकड़ क्षेत्र में दलहन व तिलहन फसलो की बुआई करने का है। इसके लिए कहां और कैसे पंजीकरण करना होगा आइए जानतें हैं ।

कैसे होगा पंजीकरण ?
हरियाणा के किसानो को इसके लिए पहले मेरी फसल-मेरा पोर्टल पर पंजीकरण कराना होगा।
पंजीकरण के बाद सत्यापन होगा, सत्यापन के बाद सहायता राशि किसानो के खाते में आ जाएगी।
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग का क्या कहना है
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि केंद्र सरकार ने दलहन व तिलहन फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी की है। योजना के अंतर्गत दलहन फसलों में मूंग, अरहर व उड़द, तिलहन फसलों में अरंड, मूंगफली व तिल शामिल हैं। किसानों को फसलों की नई किस्मों व आधुनिक तकनीक की जानकारी दी जा रही है। दाल वाली फसलें मृदा के स्वास्थ्य को अच्छा बनाती हैं और हवा की नाइट्रोजन को सोखकर जमीन में उसकी मात्रा बढ़ाती हैं, जिससे भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ती है। इस तरह किसानों को खेत में नाइट्रोजन फर्टिलाइजर की कम मात्रा की जरूरत पड़ेगी। तिलहन वाली फसलों को बढ़ावा देने से देश में खाद्य तेल की कमी को भी पूरा करने में सहयोग मिलेगा।












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