Haryana Elections: हरियाणा में विधानसभा चुनाव से पहले सोशल मीडिया पर निगरानी कड़ी कर दी गई
Haryana Elections:हरियाणा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी पंकज अग्रवाल ने बताया कि 1 अक्टूबर को होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले कई टीमें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर नजर रख रही हैं।
ये टीमें यूट्यूब, इंस्टाग्राम, फेसबुक, वॉट्सऐप ग्रुप और एक्स पर चुनाव से जुड़ी गतिविधियों की जांच करेंगी।अग्रवाल ने कहा कि सोशल मीडिया पर विज्ञापनों का खर्च उम्मीदवारों या पार्टियों के खातों में जोड़ा जाएगा।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आदर्श आचार संहिता (एमसीसी) सभी मीडिया रूपों पर लागू होती है, जिसमें समाचार पत्र, टेलीविजन, रेडियो और सोशल मीडिया शामिल हैं।
अग्रवाल ने एक बयान में कहा, "प्रकाशित या प्रसारित कोई भी समाचार निष्पक्ष रहना चाहिए। मीडिया को किसी भी धर्म, जाति या समुदाय के पक्ष या विरोध में सामग्री प्रकाशित या प्रसारित करने से बचना चाहिए।"
मीडिया प्रमाणन और निगरानी
सीईओ ने बताया कि अखबारों या टीवी चैनलों में विज्ञापन प्रकाशित करने से पहले 'मीडिया प्रमाणन एवं निगरानी समिति' से पूर्वानुमति लेना आवश्यक है। इसी तरह, सोशल मीडिया पर विज्ञापन पोस्ट करने के लिए प्रशासनिक स्वीकृति की आवश्यकता होती है।
उन्होंने कहा, "मीडिया लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है और यह सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है कि चुनाव निष्पक्ष और शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हों।" "मीडिया का कर्तव्य केवल समाचार देना ही नहीं है, बल्कि समाज में सद्भाव बनाए रखने में योगदान देना भी है।"
निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करना
अग्रवाल ने समाचार पत्रों, समाचार चैनलों और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से जुड़े सभी लोगों से आग्रह किया कि वे किसी भी भ्रामक सामग्री को बढ़ावा न दें जो एमसीसी का उल्लंघन कर सकती है। उन्होंने चुनावों के दौरान पारदर्शी आचरण के महत्व पर प्रकाश डाला।
उन्होंने यह भी कहा कि रैलियां या रोड शो करने वाले राजनीतिक दलों को जिला प्रशासन से अनुमति लेनी होगी। उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि इन आयोजनों से यातायात जाम न हो और रात 10 बजे से सुबह 6 बजे के बीच लाउडस्पीकर का उपयोग न करके ध्वनि नियंत्रण का पालन करना होगा।
एमसीसी के दौरान प्रतिबंध
जब तक आदर्श आचार संहिता लागू रहेगी, राजनीतिक दलों को राजनीतिक बैठकों या कार्यक्रमों के लिए किसी भी सरकारी विश्राम गृह का उपयोग करने से प्रतिबंधित किया गया है। इस उपाय का उद्देश्य चुनाव अवधि के दौरान निष्पक्षता बनाए रखना है।












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