Haryana Chunav: हरियाणा में कांग्रेस से मिलने वाली एक भी सीट AAP के लिए लॉटरी क्यों है?
Haryana Vidhansabha Chunav: कांग्रेस का केंद्रीय नेतृत्व आखिरी समय में हरियाणा में आम आदमी पार्टी (AAP) के साथ गठबंधन का मन बनाया है। हालांकि, हरियाणा कांग्रेस का एक बड़ा तबका अभी भी अपने दम पर ही चुनाव लड़ने में फायदा देख रहा है। लेकिन, कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के मूड से लगता है कि सीटों पर तालमेल होनी तय है और यह अरविंद केजरीवाल की पार्टी के लिए बहुत ही फायदेमंद साबित हो सकता है।
हरियाणा में केजरीवाल की पार्टी पूरे एक दशक से चुनावों में भाग्य आजमा रही है। 2012 के आखिर में 'आप' बनी और 2014 में ही पार्टी ने सभी 10 लोकसभा सीटों पर उम्मीदवार उतार दिए। लेकिन, पार्टी एक भी सीट पर जमानत भी नहीं बचा सकी। तब से लेकर 2019 के चुनावों तक 'आप' हरियाणा के किसी चुनाव में कभी भी अपनी जगह नहीं बना सकी।

कांग्रेस से गठबंधन का फायदा देख चुकी है आप
पहली बार इंडिया अलायंस के तहत 2024 के लोकसभा चुनावों में आप और कांग्रेस के बीच गठबंधन हुआ। 10 में से 9 सीटों पर कांग्रेस लड़ी और कुरुक्षेत्र में आप के प्रदेश अध्यक्ष सुशील गुप्ता गठबंधन उम्मीदवार बने। पार्टी यहां बीजेपी के नवीन जिंदल से चुनाव तो हार गई, लेकिन पहली बार उसे यहां जितने वोट मिले, पार्टी को पहले सभी सीटों पर लड़कर भी कभी नहीं मिला था। यह लोकसभा चुनाव हरियाणा में पार्टी का अबतक का सबसे बेहतर प्रदर्शन रहा है।
कुरुक्षेत्र में जिंदल करीब 29,000 वोटों से जीते, लेकिन आम आदमी पार्टी के सुशील गुप्ता को मिले 5.13 लाख से ज्यादा वोटों में पार्टी को कांग्रेस के साथ जुड़ने का फायदा दिखा रहा है। पार्टी यहां की चार विधानसभा सीटों पर आगे रही और अगर लोकसभा चुनावों वाला प्रदर्शन भी दोहरा जाए, तो अरविंद केजरीवाल की पार्टी की किस्मत की इस बार लौटरी जरूर निकल सकती है।
हरियाणा में एक भी सीट जीतना आप के लिए बोनस की तरह
आप संयोजक अरविंद केजरीवाल के लिए हरियाणा के खास मायने हैं। इसलिए, पार्टी बनने के बाद पहला चुनाव वह यहां से भी लड़ी और 2014 के विधानसभा चुनावों को छोड़कर लगातार लड़ती आ रही है।
दिल्ली के सीएम केजरीवाल हरियाणा के ही भिवानी जिले के सिवानी गांव के रहने वाले हैं। पड़ोस में दिल्ली और पंजाब में आप की बंपर बहुमत वाली सरकारें हैं, ऐसे में हरियाणा में एक भी सीट पर कांग्रेस के हाथ झाड़ू चल जाना पार्टी के लिए चुनावी बोनस से कम नहीं होगा।
हरियाणा में 2014 के लोकसभा चुनाव में आप का प्रदर्शन
इसकी वजह ये है कि 2014 के लोकसभा चुनावों में आप ने हरियाणा की सभी 10 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे। राज्य में तब कुल 1.6 करोड़ वोट पड़े थे और पार्टी को सभी सीटों को मिलाकर भी 4.89 लाख (4.2%) वोट आए थे।
कांग्रेस के बिना हरियाणा में आप की जमानतें जब्त होती रही हैं
पार्टी के तब के जिन दिगज्जों ने हरियाणा से भाग्य आजमाया था, उनमें योगेंद्र यादव भी शामिल थे। उन्होंने गुड़गांव से काफी तामझाम के साथ चुनाव लड़ा, लेकिन चौथे नंबर (79,452 वोट) चले गए। बाद में उन्हें पार्टी से चलता कर दिया गया। कुल मिलाकर राज्य में आम आदमी पार्टी के एक भी उम्मीदवार चौथे या पांचवें नंबर से ऊपर नहीं पहुंच सका।
2019 के लोकसभा और विधानसभा चुनावों भी बहुत ही बेकार प्रदर्शन
2019 के लोकसभा चुनावों में केजरीवाल ने दुष्यंत चौटाला की जननायक जनता पार्टी (JJP) के साथ गठबंधन में 10 में से 3 सीटों पर चुनाव लड़ा। पार्टी के सभी प्रत्याशियों की जमानतें जब्त हो गईं और यह मुश्किल से करीब 45,000 वोट जुटा सकी। इसी साल विधानसभा चुनाव में पार्टी ने अकेले लड़ने का फैसला किया और सिर्फ 46 सीटों पर प्रत्याशी खड़े गए। केजरीवाल के लिए कुल 1% वोट जुटाने के भी लाले पड़ गए।
कांग्रेस के साथ गठबंधन में 10% से ज्यादा बढ़े आप के वोट
लेकिन, 2024 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस का हाथ पकड़ना आप के लिए डूबते को तिनके का सहारा साबित हुआ। पार्टी एक ही सीट लड़ी और हार गई, लेकिन फिर भी उसका वोट शेयर 0.36% से बढ़कर 3.94% पहुंच गया। कांग्रेस के साथ गठबंधन में पार्टी को यह फायदा हुआ कि 90 सीटों में उसे 4 विधानसभा सीटों में बढ़त मिली, वहीं कांग्रेस 42 सीटों पर आगे रही। बीजेपी ने अकेले चुनाव लड़कर भी 44 सीटों पर बढ़त बना ली, लेकिन जादुई आंकड़े से दो सीट पीछे रह गई।
हरियाणा कांग्रेस नहीं चाहती आप के साथ गठबंधन
कांग्रेस की ओर से गठबंधन का प्रस्ताव हरियाणा में आम आदमी पार्टी के लिए बिल्ली के भाग्य से छींटा टूटने के समान नजर आ रहा है। इसलिए पार्टी के नेता इसे 'गेम चेंजर' मानकर बैठे हैं। कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व का भी यही नजरिया दिख रहा है, लेकिन प्रदेश कांग्रेस के नेताओं को लगता है कि राज्य में पार्टी की स्थिति अपने दम पर ही मजबूत है और बीजेपी को सत्ता से बेदखल कर सकती है।
पूर्व सीएम और हरियाणा में कांग्रेस के सबसे बड़े नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा लगातार कह रहे हैं कि 'कांग्रेस अपने दम पर हरियाणा में चुनाव लड़ने , जीतने और सरकार बनाने में सक्षम है।'
एक और वरिष्ठ कांग्रेस नेता का कहना है, 'कांग्रेस-आप गठबंधन से बीजेपी को कांग्रेस पर हमला करने का एक और हथियार मिल जाएगा। आप के कई नेता दिल्ली शराब नीति घोटाले के आरोपों में घिरे हैं और कई कांग्रेस विधायक भी भ्रष्टाचार के आरोप झेल रहे हैं, हमारे लिए बीजेपी के हमलों का जवाब देना कठिन हो जाएगा।'
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