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राम रहीम ने जेल के भीतर से लिखी चिट्ठी- निंदा या बुराई करने वाला हमारा चेला नहीं हो सकता

रोहतक। बलात्कार के जुर्म में पिछले कई साल से सुनारियां जेल में सजा भुगत रहे डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत सिंह राम रहीम ने अब नया पैंतरा चला है। उसने जेल के भीतर से चिट्ठी लिखी है। जिसे मां-बच्चे एवं अपने ट्रस्ट प्रबंधक के नाम भेजा। जिसमें राम रहीम कोरोना से बचने के तरीके बता रहा है। साथ ही चिट्ठी में उसने प्रमुखता से लिखा- ''हमने सिखाया है​ कि सबका भला करो। किसी की भी निंदा-बुराई न गाओ। अगर कोई दिन-रात जबरदस्त तरीके से किसी की भी निंदा-बुराई गाता है, वो अपने आपको हमारा शिष्य कहे तो ये गलत है। निंदा-बुराई करने वाला हमारा शिष्य (चेला) नहीं हो सकता।'

जेल से राम रहीम का नया पैंतरा

जेल से राम रहीम का नया पैंतरा

साध संगत के लिए भेजी गई इस चिट्ठी को डेरा सच्चा सौदा ( सिरसा, हरियाणा) की ओर से सोशल साइट्स पर पोस्ट किया गया है। इससे पहले राम रहीम ने कोरोना रिलीफ फंड में धनराशि मुहैया कराने की इच्छाई भी जताई। उसने कहा कि डेरे के फ्रीज बैंक खातों को चालू कर दिया जाए तो 4 करोड़ का फंड दे सकता हूं।'

चिट्ठी में लिखीं ऐसी-ऐसी बातें

चिट्ठी में लिखीं ऐसी-ऐसी बातें

जो चिट्ठी सामने आई है, उसमें लिखा है कि कोरोना से बचने के लिए सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पूरी तरह पालन करें। राम रहीम ने लिखा- 'मुझे खुशी है कि हमारे बच्चे जसमीत, चरणप्रीत, हनी प्रीत सेवादार आज भी एक हैं। मैं कहूंगा कि, दूसरों की निंदा से बचना चाहिए। निंदा करने वाला हमारा शिष्य नहीं हो सकता है। डेरा सच्चा सौदा में किसी भी तरह की गुटबाजी नहीं होगी।'

4 करोड का फंड देना चाहता था

4 करोड का फंड देना चाहता था

इससे पहले डेरा प्रमुख ने हाइकोर्ट में याचिका दाखिल की थी, परंतु कोर्ट ने तत्काल सुनवाई करने से इंकार कर दिया। याचिका में राम रहीम की ओर से कहा गया था कि, हम 2 करोड़ रुपए प्रधानमंत्री कोष में और एक-एक करोड़ पंजाब सीएम कोविड रिलीफ फंड और हरियाणा कोविड रिलीफ फंड में देना चाहते हैं। मगर, उसके इस इरादे पर भी कोर्ट ने फिलहाल रेस्पॉन्स नहीं दिया है। ज्ञातव्य है कि, कुछ दिनों पहले ही राम रहीम ने कोरोना विपदा के बीच पैरोल अर्जी लगवाई थी, लेकिन उसे जेल प्रशासन ने खारिज कर दिया। सुनारिया जेल प्रशासन ने उसे पैरोल पर छोड़ने से मना कर दिया था।

कभी मां तो कभी पत्नी के जरिए लगाई गुहार

कभी मां तो कभी पत्नी के जरिए लगाई गुहार

राम रहीम ने जेल से बाहर आने के लिए बीते दिनों अपनी मां नसीब कौर को आगे करके यह अर्जी डाली थी, जिसमें 3 सप्ताह की पैरोल मांगी थी। मां नसीब कौर ने जेल प्रशासन को अपनी बीमारी की हवाला दिया था। मगर, जेल प्रशासन ने सख्ती बरतते हुए वो अर्जी खारिज कर दी। इससे पहले राम रहीम की पत्नी हरजीत कौर ने भी उसकी मां की तबीयत का हवाला देकर पैरोल मांगी थी। इस पर हाईकोर्ट ने कहा था कि आप लोगों का इतना बड़ा अस्पताल है, वहां पर मम्मी का इलाज करवाओ, बाकी परिवार भी साथ ही है।

बलात्कार के जुर्म में 2017 में हुई थी 20 साल जेल

बलात्कार के जुर्म में 2017 में हुई थी 20 साल जेल

राम रहीम इन दिनों सुनारिया जेल-रोहतक में उम्रकैद भुगत रहा है। वर्ष 2017 में 29 अगस्त को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की विशेष अदालत ने राम रहीम को दोषी मानते हुए 20 साल की सजा सुनाई थी। राम रहीम का पूरा नाम गुरमीत राम रहीम सिंह है। वह 'डेरा सच्चा सौदा' का प्रमुख है। उसे अपनी दो शिष्याओं के साथ दुष्कर्म करने और आपराधिक धमकी देने के अपराध में यह सजा हुई।

1999 में शिष्याओं को बनाया था हवस का शिकार

1999 में शिष्याओं को बनाया था हवस का शिकार

राम रहीम के खिलाफ वैसे तो बहुत केस चल रहे हैं। मगर, जिस जुर्म में वह सजा भुगत रहा है, वह मामला 1999 का है। राम रहीम पर 1999 में अपनी दो शिष्याओं के साथ दुष्कर्म करने के आरोप थे। इस मामले में उसके द्वारा आपराधिक धमकी भी दी गई थीं। कई साल बाद दुष्कर्म के मामले में 2002 में शिकायत दर्ज हो पाई। राम रहीम ने गवाहों पर भी हमले करवाए थे।

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