हरियाणा में नेता विपक्ष का नाम क्यों नहीं तय कर पा रही कांग्रेस? भूपेंद्र हुड्डा के सामने खड़ी हुई ये चुनौती!
Haryana Politics: हरियाणा विधानसभा चुनाव के परिणाम आए दो महीने होने को हैं, लेकिन कांग्रेस पार्टी अपने विधायक दल (CLP) का नेता नहीं चुन पाई है। हरियाणा विधानसभा में कांग्रेस ही प्रमुख विपक्षी पार्टी है, इसलिए उसके विधायक दल का नेता ही विपक्ष का नेता (LoP) भी होगा। पिछली विधानसभा में पार्टी के दिग्गज और पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा इस पद पर थे, लेकिन आपसी गुटबाजी में उलझी कांग्रेस इस बार कोई नाम नहीं तय कर पा रही है।
इसका परिणाम ये हुआ है कि हुड्डा को हरियाणा सरकार से वह बंगला खाली करने का नोटिस मिल गया है, जो उन्हें विपक्ष की नेता की हैसियत से आवंटित है। इंडियन एक्सप्रेस से हुड्डा ने इस नोटिस के बारे में कहा है,'यह सामान्य प्रक्रिया है। इससे ज्यादा इसमें कुछ नहीं है। यह खाली करना है, नहीं तो दंडात्मक किराया शुरू हो जाएगा।'

कांग्रेस हाई कमान की वजह से बढ़ी हुड्डा की मुश्किल!
अटकलें हैं कि हुड्डा के सरकारी बंगले पर बीजेपी सरकार के कुछ दिग्गज मंत्रियों की नजरें लगी हुई हैं। एक तरफ हुड्डा को घर खाली करने का नोटिस मिल चुका है, दूसरी तरफ कांग्रेस आला कमान विधायक दल की बैठक होने देने के लिए भी मन नहीं बना पा रहा है। 2019 से इस बंगले में रह रहे हुड्डा ने फिलहाल राज्य सरकार से 15 दिन की मोहलत मांगी है।
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कई नेता खाली कर चुके हैं सरकार आवास
हरियाणा चुनाव का नतीजा 8 अक्तूबर को आया था और बीजेपी के नायब सिंह सैनी ने 17 अक्तूबर को नए कार्यकाल के लिए मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली थी। उनकी पिछली सरकार में जो मंत्री चुनाव हार गए थे, वह कब के सरकारी बंगले खाली भी कर चुके हैं और उन्हें नए मंत्रियों को आवंटित भी किया जा चुका है।
गुटबाजी में उलझी है हरियाणा कांग्रेस!
हरियाणा में पिछले चार चुनावों से देखें तो परिणाम आने के मुश्किल से 15 दिनों के अंदर ही विपक्ष के नेता या विपक्षी दल के विधायक दल के नेता का चुनाव हो जाता है। पहली बार कांग्रेस पार्टी इतनी असमंजस में पड़ी हुई है। कांग्रेस के अंदर के लोगों के मुताबिक इसके पीछे हुड्डा और सिरसा की कांग्रेस सांसद कुमारी शैलेजा खेमे के बीच जारी भयानक गुटबाजी है।
हरियाणा विधानसभा चुनावों में इस बार कांग्रेस को 37 सीटें मिली हैं, जबकि बीजेपी ने अबतक की सबसे ज्यादा 48 सीटें जीतकर अपने दम की सरकार बनाई है। तीन निर्दलीय विधायकों ने भी सरकार को समर्थन दे रखा है। आईएनएलडी के दो विधायक हैं।
हुड्डा के नाम पर मुहर लगने की संभावना कम?
कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस विधायक दल (CLP) के नेता पद के लिए दोनों खेमे की ओर से जबरदस्त लॉबिंग चल रही है।
एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता के मुताबिक, 'हालांकि, ज्यादातर एमएलए भूपेंद्र सिंह हुड्डा की तरफ हैं और उन्हें अपना नेता देखना चाहते हैं, लेकिन अंतिम फैसला पार्टी हाई कमान को करना है। अगर हाई कमान नहीं चाहता कि हुड्डा विधायक दल के नेता बने रहें तो उनकी कैंप से किसी को मौका मिल सकता है...'
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कांग्रेस हाई कमान के मन से उतर चुके हैं हुड्डा?
उन्होंने आगे कहा, 'हुड्डा गुट से बेरी के एमएलए रघुवीर कादियान,थानेसर विधायक अशोक अरोड़ा और झज्जर एमएलए गीता भुक्कल सबसे आगे हैं। शैलजा गुट से,पंचकुला एमलए चंद्र मोहन का नाम पार्टी के लोगों के बीच चर्चा में है।'
पार्टी सूत्रों का यह भी कहना है कि जिस तरह का संकेत हाई कमान की ओर से दिया जा रहा है और संगठनात्मक बदलावों की बातें चल रही हैं, उससे हो सकता है कि हुड्डा को इस बार मौका न मिल पाए।












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