Hardoi : ठेलिया पर शव लेकर चला परिवार तो जागे जिम्मेदार, इंसानियत को शर्मसार करने वाला वीडियो हुआ वायरल

एक मजबूर बेटा अपने मृत पिता के शव को अस्पताल से घर एक ठेले पर लेकर जा रहा है। जब कुछ लोगो ने उसका वीडियो बनाना शुरू कर दिया तब आनन्-फानन में जिला अस्पताल द्वारा उसको शव वाहन मुहैया कराया गया।

uttar pradesh hardoi news district hospital video viral dead body on cart government

उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को बेहतर बनाने में सरकार पानी की तरह पैसा बहा रही है लेकिन फिर भी आए दिन राज्य के सरकारी अस्पतालों में सुविधा की कमी, उपकरणों की कमी, डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ की अनुपस्थिति की खबरें पढ़ने सुनने को मिल ही जाती हैं। अभी भी स्थिति बद से बदतर है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से लेकर जिला अस्पतालों तक में सुविधा का अभाव है जिसके चलते मरीजों को भटकना पड़ता है और निजी अस्पतालों की शरण में जाना पड़ता है। उत्तर प्रदेश के हरदोई से सामने आए एक ताजा मामले में एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है जिसमे एक मजबूर बेटा अपने मृत पिता के शव को अस्पताल से घर एक ठेले पर लेकर जा रहा है। जब कुछ लोगो ने उसका वीडियो बनाना शुरू कर दिया तब आनन्-फानन में जिला अस्पताल द्वारा उसको शव वाहन मुहैया कराया गया।

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ठेले पर शव ले जाने को मजबूर बेटा
दरअसल, हरदोई के सांडी में ग्राम रौरा के विजय बाबू पांडे नवीन गल्ला मंडी में चौकीदार थे। वह अपने परिवार के साथ मंडी के निकट किराए पर रहते थे। बुधवार को उनकी अचानक से तबीयत बिगड़ गई जिसके चलते उनके पुत्र रामनारायण पांडे ठेलिया से पिता को लेकर जिला अस्पताल पहुंचे। डॉक्टर ने उनकी जांच की जिसके बाद चिकित्सक ने उनको मृत घोषित कर दिया और स्वास्थ्य कर्मियों ने शव को ले जाने के लिए उनके पुत्र से कहा। इस दौरान शव वाहन का इंतेज़ाम करने के लिए जब जिम्मेदारों से कहा गया तो परिजनों की बात को अनसुना कर दिया गया। जिसके बाद मजबूर बेटा अपने पिता के शव ठेलिया पर ही लेकर चल पड़ा। वहां मौजूद लोगो ने इसका वीडियो बनानां शुरू कर दिया। जिसे देख स्वास्थ्य कर्मी शव को फ़ौरन वापस अस्पताल ले गए और फिर वाहन से शव को भिजवाया।

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बना देते हैं बहाने
बता दें कि यह वीडियो बाद में किसी ने सोशल मीडिया पर डाल दिया और देखते ही देखते यह वीडियो वायरल हो गया। वीडियो के वायरल होने के बाद पूरे स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मचा हुआ है और जिम्मेदार अभी इस बारे में कुछ भी कहने को त्यार नहीं हैं।
वही मरीज के परिजनों का कहना है कि दूर-दराज के गांव से मरीज जिला अस्पताल आते हैं तो उनसे कोई न तो ठीक से बात करता है और न ही उनका इलाज ही ढंग से हो पाता है और न उनकी कोई देखभाल होती है। डॉक्टर उनको ज्यादातर प्राइवेट दुकानों से दवाएं रिकमेंड कर देते है। जांच वगैरह के लिए भी प्राइवेट सेंटर पर मरीजों को भेजा जाता है। यहां जबर्दस्त तरीके की कमीशनखोरी होती है। पहली बात तो सरकारी अस्पतालों में एम्बुलेंस या जांच वगैरह की मशीनें है नहीं, अगर हैं भी तो वहां के लोग मशीन को खराब करके रखे रहते हैं और लोगों को निजी सेंटर में भेजते हैं। मरीजों को सीधे तौर पर बोल देते हैं कि मशीन काम नहीं कर रहा है।

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