एमपी: 'पालने में लाचार हूँ' पत्र में लिखकर 3 साल के मासूम बच्चे को ट्रेन में छोड़ कर चली गई मां
ट्रेन में मिला 3 साल का लावारिस बच्चा, बेबस मां ने पत्र के साथ बच्चे तो ट्रेन में छोड़ा, आरपीएफ ने किया चाइल्ड लाइन के हवाले, शारीरिक और मानसिक रुप से दिव्यांग है बच्चा
ग्वालियर, 12 अक्टूबर। तंगहाली का सामना कर रही एक बेबस मां अपने 3 साल के मासूम बच्चे को ट्रेन में लावारिस छोड़ कर चली गई। बच्चे की मां ने अपनी दर्द भरी दास्तां एक पत्र में लिखी और बच्चे के साथ उस पत्र को भी ट्रेन में ही छोड़ दिया। आरपीएफ ने जब लावारिस बच्चे को देखा तो ग्वालियर रेलवे स्टेशन पर चाइल्ड लाइन की मदद से बच्चे को उतार लिया गया और इसके बाद 3 साल के मासूम बच्चे को शिशु गृह भेज दिया गया।

चलती ट्रेन में 3 साल के बच्चे को छोड़ दिया
3 साल के एक मासूम बच्चे को उसकी मां ने चलती ट्रेन में ही लावारिस हालत में छोड़ दिया। मानसिक और शारीरिक रूप से विकलांग इस मासूम का कसूर सिर्फ इतना था कि वह दूध पीता था। बच्चे की मां इतनी लाचार और बेबस थी कि वह अपने कलेजे के टुकड़े के लिए दूध भी नहीं जुटा पा रही थी इसलिए अपने मासूम बच्चे को ट्रेन में लावारिस हालत में छोड़ कर चली गई।

आरपीएफ को ट्रेन में मिला बच्चा
आरपीएफ को लावारिस हालत में 3 साल का बच्चा ट्रेन में मिला। आरपीएफ ने जब बच्चे के पास मिले हुए पत्र को खोलकर पढ़ा तो उसमें लाचार मां ने अपनी बेबसी बयान कर दी थी। बच्चे की मां ने पत्र में लिखा था कि वह विधवा है और उसके पास पहले से ही 3 बच्चे है्ं। चौथे बच्चे को पालने के लिए उसके पास कोई व्यवस्था नहीं। पत्र में यह भी लिखा गया कि उसने अनाथालय में बच्चों को छोड़ने की कोशिश की लेकिन वह सफल नहीं हो सकी।

बच्चे को अनाथालय भेजने की लिखी बात
मां के दर्द भरे पत्र में उसकी बेबसी की तकलीफ साफ झलक रही थी, जिसने अपने मासूम बच्चे को इस तरह ट्रेन में लावारिस छोड़ दिया। बच्चे की मां ने पत्र में लिखा है कि उसके बच्चे को सही सलामत सही स्थान अनाथालय में भेज दिया जाए क्योंकि उसका कोई और इस दुनिया में सहारा नहीं है। पत्र को पढ़कर आरपीएफ नें बच्चे को ग्वालियर रेलवे स्टेशन पर उतार लिया।

चाइल्ड लाइन के हवाले किया गया बच्चा
आरपीएफ द्वारा बच्चे को ग्वालियर रेलवे स्टेशन पर उतारने के बाद चाइल्ड लाइन के हवाले कर दिया गया। चाइल्ड लाइन द्वारा बच्चे को बाल कल्याण समिति के सामने ले जाया गया। जिसके बाद बाल कल्याण समिति ने दिव्यांग बच्चे को शिशु गृह में भिजवा दिया।












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