एमपी: राजमाता विजयराजे सिंधिया की ग्वालियर में मनाई गई 103वीं जयंती
ग्वालियर में मनाई गई राजमाता विजया राजे सिंधिया की 103वीं जयंती, राष्ट्रीय महिला मैराथन का किया गया आयोजन, भजन मंडली द्वारा दी गई प्रस्तुतियां, ज्योतिरादित्य सिंधिया समेत यशोधरा राजे सिंधिया भी हुईं कार्यक्रम में शामिल
ग्वालियर, 13 अक्टूबर। ज्योतिरादित्य सिंधिया की दादी और ग्वालियर में राजमाता के नाम से प्रसिद्ध विजया राजे सिंधिया की ग्वालियर में गुरुवार को 103वीं जयंती मनाई गई। इस मौके पर अलग-अलग कार्यक्रम भी आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों में शिरकत करने के लिए बुआ यशोधरा राजे सिंधिया और भतीजा ज्योतिरादित्य सिंधिया भी पहुंचे। इसके साथ ही मध्य प्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री और सिंधिया घराने के खिलाफ हमेशा बगावती तीर चलाने वाले जय भान सिंह पवैया भी कार्यक्रम में शिरकत करने के लिए पहुंचे।
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थीम रोड पर आयोजित की गई राष्ट्रीय महिला मैराथन
राजमाता विजयराजे सिंधिया की जयंती के मौके पर गुरुवार को थीम रोड पर राष्ट्रीय महिला मैराथन 2022 का आयोजन किया गया। खेल मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया के द्वारा यह आयोजन किया गया। इस आयोजन में शामिल होने के लिए ज्योतिरादित्य सिंधिया भी पहुंचे। सिंधिया ने बच्चों का उत्साह वर्धन किया।

राजमाता की छत्री पर आयोजित किया गया भजन कार्यक्रम
कटोरा ताल रोड स्थित छतरी में राजमाता विजय राजे सिंधिया की जयंती के मौके पर भजन मंडली बुलाई गई और यहां भजनों की प्रस्तुति दी गई। कार्यक्रम में शिरकत करने के लिए बजरंग दल के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं मध्य प्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री जयभान सिंह पवैया भी छत्री पहुंचे थे। यहां ज्योतिरादित्य सिंधिया और यशोधरा राजे सिंधिया के साथ जयभान सिंह पवैया ने भी कार्यक्रम में शिरकत की।

सिंधिया परिवार की जन सेवा करने की रही है लंबी परंपरा
केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपनी आजी अम्मा की जयंती के मौके पर कहा कि सिंधिया परिवार की पिछले 15 पीढ़ी से जनसेवा की लंबी परंपरा रही है और यही संकल्प हम सभी लोग राजमाता की 103वीं जयंती पर ले रहे हैं, यही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

यशोधरा राजे सिंधिया ने अपनी मां को किया याद
राजमाता विजया राजे सिंधिया की बेटी और मध्य प्रदेश सरकार की खेल मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया ने कहा कि उनकी संस्था हर साल राजमाता की जयंती के अवसर पर रैली का आयोजन करती है। उन्होंने कहा कि यह हमारा संकल्प हैं, आज हम उनके व्यक्तित्व को याद करते हैं, इस मैराथन में हरियाणा और यूपी से भी बच्चे आए हैं, हम सब इकट्ठा होकर कोशिश करते हैं कि हम राजमाता के पद चिन्हों पर चलें।

565 रजवाडों में से सिर्फ उन्हीं को जाना जाता है
जयभान सिंह पवैया ने अपनी भावना व्यक्त करते हुए कहा कि राजमाता के साथ में अपने जीवन से डेढ़ दशक आंदोलन के दौरान उनका सह पथिक रहा, वह केवल राजनेत्री नहीं थी वह मूल रूप से आध्यात्मिक व्यक्तित्व की धनी थीं, उन्होंने राजनीति में खुद को केंद्र बनाकर कभी राजनीति नहीं की, उन्होंने विचारधारा को केंद्र बनाकर राजनीति की, यही वजह है कि भारत के 565 रजवाड़ों में से केवल उनको ही सारे देश में उनकी विचारधारा की वजह से जाना जाता है।












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