Tansen Samaroh 2023: तानसेन की नगरी ग्वालियर में मना “सुरों का उत्सव”,एक साथ 15 स्थानों पर सजी संगीत महफिलें
संवाद सूत्र- पंकज श्रीमाली
Gwalior Tansen Samaroh 2023 News: संगीतधानी ग्वालियर की फिजाएं शुक्रवार की शाम सुर-साज की मीठी संगत से महक गईं। मौका था विश्व संगीत समागम तानसेन समारोह के अंतर्गत पूर्व रंग कार्यक्रमों की श्रृंखला में संगीत की नगरी ग्वालियर में एक साथ सजीं "तानसेन संगीत महफिलों" का। जब शहर के पन्द्रह स्थानों पर विशिष्ट संगीत सभाएं सजी तो मानो सुरों का उत्सव साकार हो उठा।
इन सभाओं में ग्वालियर के वरिष्ठ और नए कलाकारों ने ऐसे सुर छेड़े कि दिसम्बर की सर्द सांझ सुरों का संपर्क पाकर गर्माहट का अहसास करा गई। तानसेन समारोह के इतिहास में यह पहला अवसर था, जब सुरों की नगरी ग्वालियर में इतनी बड़ी संख्या में वह भी एक साथ संगीत सभाएं हुई हो।

सुमधुर गायन से गुंजायमान हुआ महाराज बाड़ा
"तानसेन संगीत महफिल" के तहत शहर के हृदय स्थल महाराज बाड़ा पर स्थित टाउनहॉल में खूब सुर सजे। यहा सभा की शुरूआत हेमांग कोल्हरकर के गायन से हुई। हेमांग ने राग "पूरिया धनाश्री" में गायन की प्रस्तुति दी। एक ताल में निबद्ध विलंबित बंदिश के बोल थे-'लागी मोरी लगन'। उनके द्वारा प्रस्तुत तीन ताल में मध्यलय की बंदिश के बोल थे-'काहे अब तुम आए हो।' उनके साथ तबले पर मनीष करवड़े एवं हारमोनियम पर डॉ. अनूप मोघे ने संगत की। इसी सभा के दूसरे कलाकार थे देश के अग्रणी हवाईन गिटार वादक पं. सुनील पावगी। पं. पावगी ने राग 'धानी' में अपना वादन पेश किया। आलाप, जोड़, झाला से शुरू करके इस राग में उन्होंने दो गतें पेश की। विलंबित गत झपताल और द्रुत गत तीन ताल में निबद्ध थी। उन्होंने वादन का समापन अपने भैरवी की धुन से किया। उनके साथ तबले पर डॉ. विनय विन्दे ने संगत की।

गायन-वादन से बैजाताल में उठीं जल तरंगें
बैजाताल पर सजी "तानसेन संगीत महफिल" में उदयीमान गायक सुदीप भदौरिया का ध्रुपद गायन एवं राजेन्द्र विश्वरुप का सुरबहार वादन हुआ। सुदीप ने अपना गायन राग यमन में पेश किया। उनके गायन से रसिक मंत्रमुग्ध हो गए और एक बारगी ऐसा लगा कि बैजाताल के पानी में जल तरंगें उठ रही हैं। उन्होंने आलाप, मध्यलय, आलाप, द्रुतलय आलाप के बाद उन्होंने धमार में निबद्ध बंदिश पेश की, जिसके बोल थे-'केसर रंग घोर के बनो है। दूसरी बंदिश-गणपति गणेश- जलद सूलताल में निबद्ध थी। उनके साथ पखावज पर पं. संजय पंत आगले ने साथ दिया। तानपुरे पर साकेत कुमार एवं युक्ता सिंह तोमर ने साथ दिया। दूसरी प्रस्तुति में वरिष्ठ कलाकार राजेन्द्र विश्वरुप ने सुमधुर सुरबहार वादन पेश किया। उन्होंने राज कल्याणी में आलाप जोड़, झाला से शुरू करके चौताल में एक गत पेश की। उनका वादन गांमीर्य और माघुर्य से परिपूर्ण था। वादन में पं. संजय पंत आगले ने संगत की।

किले पर भी गूंजी स्वर लहरियां
"तानसेन संगीत महफिल" के तहत ग्वालियर किले पर सजी संगीत सभा की शुरुआत मीरा वैष्णव के गायन से हुई। उन्होंने राग पुरिया कल्याण में दो बंदिशें पेश की। एक ताल में विलंबित बंदिश के बोल थे होवन लागी सांझ जबकि मध्यलय तीनतालकी बंदिश के बोल देह बहुत दिन बीते। आपने एक तराना भी पेश किया। इसके बाद इसी सभा में जनाब सलमान खान का सुमधुर सारंगी वादन भी हुआ।इन प्रस्तुतियों में हारमोनियम पर नवनीत कौशल एवं तबले पर शाहरुख खान ने साथ दिया।

गंगादास की शाला में भी सुर महके
तानसेन संगीत महफिल के तहत गंगादासजी की बड़ी शाला-सिद्धपीठ गंगादास जी की बड़ी शाला में भी सुर महके। सभा की शुरूआत जान-माने सितार वादक पं. भरत नायक के वादन से हुई। उन्होंने राग पूरिया कल्याण में वादन पेश किया। आलाप, जोड़ झाला से शुरू करके उन्होंने तीन ताल में विलंबित व द्रुत गतें पेश की। अंत में एक धुन से वादन का समापन किया। सभा के दूसरे कलाकार थे वरिष्ठ गायक पंडित महेश दत्त पांडे। उन्होंने राग मारु विहाग में अपना गायन पेश किया। एक ताल में विलंबित बंदिश के बोल थे-'भनक परी है कानने मेरे' जबकि तीन ताल में मध्यलय की बंदिश के बोल थे -'काहू के मन को..'। राग रसरंजनी से गायन को आगे बढ़ाते हुए आपने इस राग में मध्यलय, तीन ताल में एक बंदिश पेश की, जिसके बोल थे-'कैसे कटे ये रैन'। उन्होंने गायन का समापन एक भजन से किया। तबले पर पं. अनंत मसूरकर व हारमोनियम पर संजय देवले ने सधी हुई संगत का प्रदर्शन किया।

जयविलास पैलेस में बिखरे राग मधुवंती के सुर
जयविलास पैलेस में सजी तानसेन संगीत महफिल में पंडित श्रीराम उमड़ेकर का सितार वादन एवं पं. उमेश कंपूवाले का खयाल गायन हुआ। सभा की शुरूआत पंडित उमेश कंपूवाले के गायन से हुई। उन्होंने राग मधुवंती में अपना गायन पेश किया। इस राग में उन्होंने दो बंदिशें पेश की। एक ताल में निबद्ध विलंबित बंदिश के बोल थे-'पिया घर नाहीं' जबकि तीन ताल में द्रुत बंदिश के बोल थे-'तुम्हारे दरस बिन बलमा'। इसी राग में आपने तराना भी पेश किया। इसके पश्चात् आपने महादजी सिंधिया द्वारा रचित भजन-'अरि गिरधर सौ कौन लरी' और माधवराव प्रथम पर लिखी गई स्तुति भी पेश की। गायन का समापन उन्होंने मराठी अभंग से किया। आपके साथ तबले पर पांडुरग तैलंग एवं हारमोनियम पर अक्षत मिश्रा ने साथ दिया।

हस्सू-हद्दू खां सभागार में गूंजी ध्रुपद की बंदिशें
हस्सू खां हद्दू सभागार में आयोजित तानसेन संगीत महफिल में तेजस भाटे ने ध्रुपद गायन की प्रस्तुति दी। आलाप, मध्यलय आलाप एवं द्रुत लय आलाप से शुरू की। उन्होंने राग गायन में धमार पेश किया। बंदिश के बोल थे- 'केसर घोर के बनो है' उन्होंने जलद सूलताल में भी एक बंदिश पेश की, बोल थे-'गणपति गणेश। यहीं पर दूसरी प्रस्तुति सुश्री पद्मजा विश्वरुप के विचित्र वीणा वादन की हुई। उन्होंन राग चलनाट में आलाप, जोड़, झाला से शुरू करके तीव्रा ताल में एक गत बजाई। इन प्रस्तुतियों में संजय आफले ने पखावज पर साथ दिया।
खयाल गायन से गुंजायमान हुआ द्वारिकाधीश मंदिर
द्वारिकाधीश मंदिर मुरार में आयोजित सभा का आगाज मनोज नाइक के सितार वादन से हुआ। उन्होंने राग पूरिया धनाश्री में वादन की प्रस्तुति दी। विलंबित एवं द्रुत रचनाएं उन्होंने खयाल अंग में तीन ताल में पेश की। वादन का समापन उन्होंने झाले से किया। आपके साथ तबले पर प्रणव पराड़कर ने संगत की। इसी सभा के दूसरे कलाकार थे अनंत महाजनी जी। उन्होंने राग मारु विहाग में दो बंदिश गाईं।












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