2 अप्रैल को हुई जातिगत हिंसा को लेकर एक बार फिर शुरू हुई सियासत

कांग्रेस नेता फूल सिंह बरैया ने सीएम शिवराज सिंह चौहान से पूछा मीडिया के माध्यम से सवाल, जातिगत हिंसा के किन मामलों को वापस लेगें आप।

ग्वालियर, 25 मई। ग्वालियर चंबल संभाग में हुई जातिगत हिंसा को लेकर एक बार फिर से बीजेपी और कांग्रेस आमने-सामने आ गए हैं। 2 अप्रैल 2018 को हुई जातिगत हिंसा के मामले में सीएम शिवराज सिंह चौहान ने दोनों वर्ग के लोगों पर दर्ज हुए मामलों को वापस लेने की बात कही है जिसपर कांग्रेस नेता फूल सिंह बरैया ने सीएम शिवराज सिंह चौहान से सवाल पूछा है कि आखिर वे कौन से मामलों को वापस लेंगे।

fool singh baraiya
2 अप्रैल 2018 को ग्वालियर चंबल संभाग में बड़े पैमाने पर जातिगत हिंसा हुई थी। इस जातिगत हिंसा में दोनों ही वर्ग के लोगों की जान भी चली गई थी। इस जातिगत हिंसा के बाद दोनों ही वर्ग के लोगों पर एफआईआर भी दर्ज की गई थीं। इन्हीं दर्ज की गई एफआईआर को सीएम शिवराज सिंह चौहान ने वापस लेने की बात कही है। इसी बात को लेकर कांग्रेस नेता फूल सिंह बरैया सीएम शिवराज सिंह चौहान पर हमलावर हो गए है।
ग्वालियर में गई थी दर्ज मामले वापस लेने की बात
सीएम शिवराज सिंह चौहान पिछले दिनों ग्वालियर आए थे। यहां पर उन्होंने अनुसूचित जाति वर्ग और सामान्य वर्ग के प्रतिनिधिमंडल के साथ अलग-अलग मुलाकात की थी। मुलाकात के बाद सीएम शिवराज सिंह चौहान ने दोनों ही वर्ग के बीच की वैमनस्यता को खत्म करने की अपील करते हुए दोनों ही वर्ग के लोगों पर दर्ज किए गए मामलों को वापस लेने की बात भी कही थी।
कांग्रेस नेता फूल सिंह बरैया ने साधा सीएम पर निशाना
सीएम शिवराज सिंह चौहान पर कांग्रेस नेता फूल सिंह बरैया ने निशाना साधते हुए मीडिया के माध्यम से सवाल किए हैं। कांग्रेस नेता फूल सिंह बरैया ने सीएम से पूछा है कि जातिगत हिंसा के बाद दर्ज किए गए किन मामलों को वापस लेने की वह बात कर रहे हैं क्योंकि जातिगत हिंसा में दलित मारे गए थे और इसको लेकर बीजेपी के नेताओं और पुलिस वालों पर एफआईआर दर्ज हुई थीं। अगर इन एफआईआर को वापस लेंगे तो दलितों के साथ अन्याय होगा और अगर दलित वर्ग पर दर्ज की गई एफआईआर वापस लेंगे तो क्या इसका मतलब है कि दलित वर्ग पर झूठी एफआईआर दर्ज की गई थी। इसका जवाब सीएम शिवराज सिंह चौहान से कांग्रेस नेता फूल सिंह बरैया ने मांगा है।
2 अप्रैल 2018 को हुई थी ग्वालियर चंबल संभाग में जातिगत हिंसा।
2 अप्रैल 2018 को ग्वालियर चंबल संभाग में जातिगत हिंसा हुई थी। इस जातिगत हिंसा में 6 लोगों की जान चली गई थी। अकेले भिंड जिले में ही 4 लोगों की जान गई थी। इस दौरान ग्वालियर की सड़कों पर खुलेआम फायरिंग करने की घटनाएं भी सामने आई थी। पूरा ग्वालियर चंबल संभाग जातिगत हिंसा की आग में बुरी तरह जला था। इस जातिगत हिंसा के बाद दलित और सवर्ण वर्ग के लोगों पर ग्वालियर चंबल संभाग के अलग-अलग जिलों के अलग-अलग थानों में कई मामले भी दर्ज किए गए थे।
चुनाव नजदीक आते ही दलित और सवर्ण वर्ग को साधने की कोशिश
मध्यप्रदेश में नगरीय निकाय और पंचायत चुनाव होने वाले हैं इसके साथ ही अगले साल विधानसभा चुनाव भी होने वाले हैं ऐसे में दलित वर्ग और श्रवण वर्ग को साधने के लिए एक बार फिर से बीजेपी ने प्रयास शुरू कर दिए हैं। ओबीसी वर्ग 27% आरक्षण की मांग को लेकर अभी बीजेपी से नाराज है। ऐसे में दलित वर्ग और सवर्ण वर्ग पर ही बीजेपी की निगाह टिकी हुई है और यही वजह है कि 2 अप्रैल 2018 की हिंसा के बाद से नाराज चल रहे दलित और सवर्ण वर्ग को साधने की कोशिश सीएम शिवराज सिंह चौहान ने की है। अब देखने वाली बात यह होगी कि आखिर सीएम शिवराज सिंह चौहान अपने इस मकसद में कितना कामयाब हो पाते हैं।
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