असम सरकार ने बदला 'डिटेंशन सेंटर्स' का नाम, अब 'ट्रांजिट कैंप' होगा
दीसपुर, 19 अगस्त: असम में बीजेपी के नए मुख्यमंत्री के रूप में हिमंत बिस्वा सरमा ने जब से सत्ता की कमान संभाली है, वो लगातार एक्शन में नजर आ रहे हैं। गुरुवार को बिस्वा सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए राज्य में बनाए गए डिटेंशन सेंटर्स को नया बदल दिया है। असम सरकार ने कहा है कि राज्य में 'विदेशियों' को रखने वाले डिटेंशन सेंटर को अब 'ट्रांजिट कैंप' कहा जाएगा। इसके साथ ही सरकार ने इस संबंध में नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया गया है।

असम के गृह और राजनीतिक विभाग के प्रमुख सचिव नीरज वर्मा की ओर से हस्ताक्षरित एक अधिसूचना में कहा गया है कि डिटेंशन सेंटर्स का नाम बदलकर 'ट्रांजिट कैंप' कर दिया गया है। साथ ही बताया कि यह 17 जून 2009 को जारी नोटिफिकेशन का आंशिक संशोधन है। दरअसल असम में अवैध घुसपैठ का यह मामला काफी पुराना हैं।
असम में दशकों से बांग्लादेश से प्रवास आते रहते हैं। ऐसे में गोलपारा, कोकराझार, तेजपुर, जोरहाट, डिब्रूगढ़ और सिलचर में जिला जेलों के अंदर 'दोषी विदेशियों' और 'घोषित विदेशियों' को रखने के लिए 6 डिटेंशन सेंटर्स बनाए गए हैं, जिनको साल 2009 में अस्थायी रूप से सरकार की ओर से अधिसूचित किया गया था। इसके अलावा एक नया डिटेंशन सेंटर पूरी तरह से 'अवैध विदेशियों' को हिरासत में लेने के मकसद से गुवाहाटी से लगभग 150 किलोमीटर दूर गोलपारा जिले के मटिया में बनाया जा रहा है।
जुलाई में मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने राज्य विधानसभा को बताया था कि छह केंद्रों में 181 बंदी हैं। 181 में से 61 घोषित विदेशी हैं और 120 दोषी विदेशी हैं। सरमा ने बताया कि एक विदेशी नागरिक जो अवैध रूप से भारत में प्रवेश करता है और न्यायिक अदालत द्वारा दोषी ठहराया जाता है, जबकि एक घोषित विदेशी वह होता है जिसे एक बार एक भारतीय नागरिक माना जाता था, लेकिन फिर एक विदेशी ट्रिब्यूनल द्वारा विदेशी घोषित किया जाता है।












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