VIDEO: भारत आए 3 और राफेल लड़ाकू विमान गुजरात के एयरबेस पर उतरे, कैसा है पहला स्क्वाड्रन जानिए

जामनगर। फ्रांस में बने अत्याधुनिक लड़ाकू विमान राफेल का चौथा बैच भारत पहुंच गया है। इस बैच के 3 राफेल की बीती रात गुजरात के जामनगर एयरबेस पर लैंडिंग हुई। इससे पहले तीन बैच में 11 राफेल भारत को मिल चुके थे। अब इंडियन एयरफोर्स के पास राफेल की संख्या बढ़कर 14 हो गई है। जबकि, कुल 36 विमान भारत को मिलने हैं। इंडियन एयरफोर्स के अधिकारियों ने बताया कि, फ्रांस से उड़ान भरने के बाद बिना कहीं रुके तीनों राफेल भारत पहुंचे। रास्ते में यूएई की मदद से इनमें एयर-टु-एयर री-फ्यूलिंग कराई गई। अभी इसी महीने के दूसरे हफ्ते में 7 और राफेल आ सकते हैं। उसके बाद राफेल का ट्रेनर वर्जन भी भारत आएगा।

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    अप्रैल में ही आएंगे 7 और राफेल विमान

    अप्रैल में ही आएंगे 7 और राफेल विमान

    इंडियन एयरफोर्स के ट्विटर हैंडिल पर बताया गया कि, चौथे बैच में जो राफेल लड़ाकू विमान भारत पहुंचे हैं, वो M88-3 Safran के डबल इंजन से युक्त हैं। उनमें स्मार्ट वेपन सिस्टम भी लगा है। अब इन तीनों नए राफेल की तैनाती भी हरियाणा के अंबाला में होगी। भारत को मिला पहला राफेल विमान अंबाला में ही तैनात किया गया था। जहां 17वीं स्क्वाड्रन गोल्डन एरोज राफेल की पहली स्क्वाड्रन होगी। भारत में सामान्यत: एक स्क्वाड्रन में 18 लड़ाकू विमान होते हैं। यानी राफेल का पहला स्क्वाड्रन आकार ले रहा है। अंबाला एयरबेस यूं भी पाकिस्तान और चीन दोनों को काउंटर करने के लिए सबसे उपयुक्त ठिकानों में से एक है। यहां पर लड़ाकू विमानों की तैनाती से पश्चिमी सीमा पर पाकिस्तान के खिलाफ तेजी से एक्शन लिया जा सकेगा। वहीं, चीन की सीमा से भी यह करीब 200 किमी की दूरी पर है।

    78 साल पुराना है राफेल की स्क्वाड्रन वाला एयरबेस

    78 साल पुराना है राफेल की स्क्वाड्रन वाला एयरबेस

    राफेल के लिए अपग्रेड किया गया हरियाणा का अंबाला एयरबेस 78 साल पुराना है। एयरफोर्स द्वारा मई 2017 में फ्रंटलाइन एयरबेस के रूप में इसका चयन किया गया था। एक रिपोर्ट के मुताबिक, राफेल के लिए अम्बाला का चुनाव इसलिए भी किया गया, क्योंकि यह ब्रिटिश काल का है और यह सुरक्षा के लिहाज से अच्छी लोकेशन पर भी है। यह एयरबेस जगुआर विमानों का गढ़ माना जाता था। जगुआर की यहां पर दो स्क्वाड्रन तैनात की गई थीं। साथ ही एक मिग-21 की स्क्वाड्रन है, जिसे एयरफोर्स चरणबद्ध तरीके से अपने बेड़े से हटा रही है। जगुआर विमान मिराज-2000 विमानों से पहले खरीदे गए थे। इन्हें ब्रिटेन से मंगवाया गया था। इस बारे में एक एक्सपर्ट्स कहते हैं कि, सन् 1971 की भारत-पाक जंग के बाद वायुसेना को ऐसे आधुनिक विमानों की जरूरत थी, जो दुश्मन के क्षेत्र में गहराई तक वार कर सकें। उस समय हमारी जरूरतों पर ब्रिटेन निर्मित जगुआर विमान खरा उतरा था। इसके पाक सीमा के पास होने के कारण पहले अम्बाला के पायलटों को जगुआर विमान उड़ाने के लिए ब्रिटेन में ही प्रशिक्षण दिया गया।

    क्या हैं राफेल फाइटर जेट की खासियतें?

    क्या हैं राफेल फाइटर जेट की खासियतें?

    फ्रांस की डेसाल्ट कंपनी द्वारा बनाया गया राफेल फाइटर जेट 2 इंजन वाला लड़ाकू विमान है। भारत ने सिंगल सीट वाले जेट भी खरीदे हैं। यह जेट एक मिनट में 60,000 फीट की ऊंचाई तक पहुंच सकता है। इसकी रेंज 3700 किलोमीटर है। साथ ही यह 2200 से 2500 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ सकता है। खास बात यह भी है कि इसमें मॉडर्न 'मिटिअर' मिसाइल और इजराइली सिस्टम भी है।

    सुखोई-30 के मुकाबले इसलिए बेहतर राफेल

    सुखोई-30 के मुकाबले इसलिए बेहतर राफेल

    रूस निर्मित सुखोई-30 एमकेआई फाइटर जेट की तुलना में ज्यादा एडवांस है। अभी तक सुखोई-30 को भारतीय वायुसेना की रीढ़ माना जाता है। मगर, जो राफेल आने वाला है, वो सुखोई के मुकाबले 1.5 गुना अधिक कार्यक्षमता से लैस है। राफेल की रेंज 780 से 1055 किमी प्रति घंटा है, जबकि सुखोई की 400 से 550 किमी प्रति घंटे। राफेल प्रति घंटे 5 सोर्टीज लगा सकता है, जबकि सुखोई की क्षमता 3 की है।

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