स्टैच्यू ऑफ यूनिटी: दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा फिर खुली, पर्यटकों के लिए टिकट बुकिंग शुरू
अहमदाबाद। गुजरात में केवडिया स्थित दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा "स्टैच्यू ऑफ यूनिटी" पर्यटकों के लिए एक बार फिर खुल गई है। कोरोना महामारी के चलते फरवरी 2020 से ही यहां कई बार पर्यटकों की एंट्री बंद की जा चुकी थी। मगर, अब क्योंकि कोरोना के संक्रमण के मामलों में कमी आई है तो सरकार ने फिर से दर्शकों के लिए इसे तैयार कर दिया। यह प्रतिमा लौहपुरुष की उपाधि पाने वाले भारत के पहले गृहमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल की स्मृति में बनवाई गई थी, जो कि 597 फीट ऊंची है। इस विशाल प्रतिमा का निर्माण कार्य पूरा होने में तकरीबन 3 हजार करोड़ खर्च हुए थे। मौजूदा समय में यह देश के सर्वाधिक कमाई करने वाले पर्यटक स्थलों में से एक है।

कई बार शुरू होकर बंद हो चुकी है यह प्रतिमा
"स्टैच्यू ऑफ यूनिटी" के लिए गठित सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय एकता ट्रस्ट की ओर से बताया गया कि, स्टैच्यू ऑफ यूनिटी 8 जून को फिर से दर्शकों के लिए तैयार की गई है। इसके लिए ऑनलाइन टिकट बुकिंग भी शुरू हो गई है। होटल और टेंट सिटी के लिए भी बुकिंग इंक्वायरी शुरू हो गई है। हालांकि, अभी सभी संस्थाओं, व्यापारियों फर्मों, उद्योगों को कोरोना गाइडलाइन का कड़ाई से पालन करना होगा। संभावना है कि सभी बड़े मंदिर भी जल्द खुलेंगे। देश में "स्टैच्यू ऑफ यूनिटी" की होड़ ताजमहल से होती है, दरअसल यही दो जगहें हैं..जहां से पर्यटन विभाग को करोड़ों की आय होती है।
Oneindia.com से जानिए यहां कैसे जाएं 'स्टैच्यू ऑफ यूनिटी' तक, क्या रहेगी ओपनिंग की टाइमिंग.. इत्यादि बातें..।

ऐसे कर सकते हैं टिकट की बुकिंग
स्टैच्यू ऑफ यूनिटी की देखरेख से लेकर पर्यटकों के लिए व्यवस्थाएं करने की जिम्मेवारी सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय एकता ट्रस्ट की है। इसकी वेबसाइट https://statueofunity.in/ से टिकट बुक किए जा रहे हैं। ट्रस्ट की ओर से कहा गया है कि, लोग http://sardarpatelstatue.in/book-now-2/ पर जाकर टिकट प्राप्त कर सकते हैं। https://www.soutickets.in/ से भी टिकट ले सकते हैं। नवंबर 2020 में ट्रस्ट द्वारा बताया गया कि, स्टैच्यू ऑफ यूनिटी सोमवार के दिन बंद रहा करेगी। प्रतिमा खुलने का समय सुबह 9 बजे और बंद होने का शाम 5 बजे तय किया गया। हालांकि, अब कुछ बदलाव किए गए हैं।

इस तरह पहुंच सकते हैं आप यहां
यह विशाल मूर्ति वडोदरा से लगभग 90 किलोमीटर जबकि, गुजरात के सबसे बड़े शहर अहमदाबाद से करीब 200 किमी दूरी पर स्थित है। अगर मुंबई से आना चाहते हैं तो आपको राष्ट्रीय राजमार्ग 48 और राज्य राजमार्ग-64 के जरिए 420 किमी लंबी सड़क यात्रा कर यहां पहुंच सकते हैं। इसके अलावा आप राज्य राजमार्ग 11 और 63 के जरिए भी इस स्थान पर पहुंच सकते हैं। यानी यदि आप किसी बाहरी प्रदेश से स्टैच्यू ऑफ यूनिटी देखने जा रहे हैं तो पहले आपको अहमदाबाद या वडोदरा जाना होगा। इन दोनों शहरों तक ट्रेनें चलती हैं। अब तो सी-प्लेन भी शुरु हो गया है। इससे पर्यटकों के लिये स्टैच्यू ऑफ यूनिटी देखने जाने का एक और बहाना मिल गया है। आप सी-प्लेन की सवारी कर सकते हैं और केवड़िया के नए पर्यटन उपक्रमों को भी देख सकते हैं।

ये हैं 'स्टैच्यू ऑफ यूनिटी' की खासियतें
- यह प्रतिमा दुनिया में सबसे उूंची है, जिसकी उूंचाई 597 फीट है। यह प्रतिमा 6.5 तीव्रता के भूकंप के झटके और 220 किमी की स्पीड के तूफान का भी सामना कर सकती है।
- सरदार पटेल की इस प्रतिमा के निर्माण में 85% तांबे का उपयोग किया गया था। जिसकी वजह से सैकड़ों साल तक इमसें जंग नहीं लग सकती। 2000 टन कांसे का भी उपयोग हुआ है।

12KM इलाके में बनाए गए तालाब से घिरी
- इसे बनवाने में 2.10 लाख क्यूबिक मीटर कन्क्रीट लगा था। 6 हजार 500 टन स्ट्रक्चरल स्टील और 18 हजार 500 टन सरियों का इस्तेमाल किया गया। इतना ही नहीं, यह 12 किमी इलाके में बनाए गए तालाब से घिरी है।

गैलरी में एक साथ 200 लोग खड़े रह सकते हैं
- इस प्रतिमा की गैलरी में खड़े होकर एक बार में 40 लोग सरदार सरोवर डैम, विंध्य पर्वत के दर्शन कर सकते हैं। इसके भीतर जो दो हाई-स्पीड लिफ्ट लगाई गई हैं, वे पर्यटकों को सरदार पटेल की मूर्ति के सीने के हिस्से में बनी व्यूइंग गैलरी तक ले जाती हैं। इस गैलरी में एक साथ 200 लोग खड़े रह सकते हैं।

33 महीनों में तैयार की गई
- स्टैच्यू ऑफ यूनिटी 33 महीनों में तैयार की गई, जो एक रिकॉर्ड है। जबकि, चीन के स्प्रिंग टेंपल में बुद्ध की प्रतिमा के निर्माण में 11 साल लगे थे। इस प्रतिमा ने बुद्ध की प्रतिमा का रिकॉर्ड भी ब्रेक कर दिया। स्टैच्यू ऑफ यूनिटी की डिजाइन में इस बात का भी खास ध्यान रखा गया कि सरदार पटेल के हावभाव उसमें हू-ब-हू नजर आएं। इसके लिए पटेल की 2000 से ज्यादा फोटो पर रिसर्च की गई।
2.10 लाख क्यूबिक मीटर सीमेंट-कन्क्रीट लगा
- सरदार पटेल ट्रस्ट की वेबसाइट पर दी गई जानकारी के अनुसार, इस प्रतिमा की लागत 2989 करोड़ रुपए आई थी। इस मूर्ति में 2.10 लाख क्यूबिक मीटर सीमेंट-कन्क्रीट इस्तेमाल किया गया। इसके अलावा इसके लिए देशभर से लोहा मंगवाया गया था। किसानों ने भी धातु दी थीं।












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