कोबा तीर्थ में भावुक हुए पीएम मोदी, तक्षशिला की तबाही से लेकर ज्ञान भारत मिशन तक, संबोधन की खास बातें
PM Modi Inaugurates Samrat Samprati Museum: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के गांधीनगर स्थित कोबा तीर्थ में आयोजित एक गरिमामय कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भारत की प्राचीन विरासत और आध्यात्मिक शक्ति पर जोर दिया। पीएम मोदी ने कहा कि कोबा तीर्थ दशकों से अध्ययन, साधना और अनुशासन की उस महान परंपरा को जीवंत रखे हुए है, जो हमारी संस्कृति की पहचान है।
पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि जब ज्ञान, तप और अनुशासन का संगम होता है, तभी एक मजबूत और प्रगतिशील समाज का निर्माण संभव है। प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर जैन संतों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि अपनी संस्कृति और इतिहास को सहेजना हम सभी का सामूहिक दायित्व है। उन्होंने विश्वास जताया कि ऐसे केंद्र भावी पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने और राष्ट्र निर्माण में भूमिका निभाने के लिए प्रेरित करते रहेंगे।

सम्राट संप्रति म्यूजियम, जैन दर्शन और विरासत का संगम
प्रधानमंत्री ने सम्राट संप्रति म्यूजियम की विशेष पहचान का उल्लेख करते हुए इसे जैन दर्शन और भारतीय संस्कृति का एक महत्वपूर्ण केंद्र बताया। उन्होंने कहा कि यह म्यूजियम केवल पुरातात्विक वस्तुओं का संग्रह नहीं है, बल्कि यह हमारी प्राचीन विरासत को आधुनिक पीढ़ी तक पहुंचाने का एक जीवंत सेतु है।
इस संग्रहालय में जैन परंपरा और भारतीय गौरव को अत्यंत वैज्ञानिक और कलात्मक तरीके से प्रदर्शित किया गया है। पीएम मोदी ने जैन मुनियों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि उनके मार्गदर्शन में समाज को सही दिशा मिल रही है और यह स्थान आने वाली पीढ़ियों को अपने इतिहास से जोड़ने का काम करेगा।
अहिंसा और सत्य, भारत की वैश्विक पहचान
संबोधन के दौरान पीएम मोदी ने सम्राट संप्रति जैसे महान शासकों के आदर्शों को याद करते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा अहिंसा और सत्य के मार्ग को प्राथमिकता दी। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि भारत की असली पहचान शांति, करुणा और अहिंसा में निहित है।
इतिहास का जिक्र करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि भले ही विभिन्न कालखंडों में हिंसा और सैन्य शक्ति के आधार पर शासन करने की कोशिशें हुईं, लेकिन अंततः सत्य और अहिंसा के मार्ग ने ही विश्व को दिशा दिखाई। यह म्यूजियम पूरी दुनिया को भारत के इसी शाश्वत और शांतिपूर्ण संदेश से रूबरू कराने का एक सशक्त माध्यम है।
तक्षशिला और नालंदा का गौरव और ऐतिहासिक क्षति
पीएम मोदी ने प्राचीन भारतीय शिक्षा व्यवस्था पर चर्चा करते हुए तक्षशिला और नालंदा जैसे विश्वविख्यात विश्वविद्यालयों का उदाहरण दिया। उन्होंने गहरी चिंता व्यक्त की कि विदेशी आक्रमणों और लंबे समय तक रही उपेक्षा के कारण भारत का विशाल ज्ञान भंडार और लाखों दुर्लभ पांडुलिपियां नष्ट हो गईं। प्रधानमंत्री ने कहा कि इन महान संस्थानों के ग्रंथालयों का जलाया जाना केवल भारत के लिए नहीं, बल्कि पूरी मानवता के लिए एक ऐसी अपूर्णनीय क्षति थी जिसने ज्ञान की सदियों पुरानी परंपरा को बाधित कर दिया।
'ज्ञान भारत मिशन' से सुरक्षित होगा भविष्य
पिछली सरकारों की कार्यप्रणाली पर टिप्पणी करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि आजादी के बाद लंबे समय तक इन बहुमूल्य पांडुलिपियों के संरक्षण पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया। हालांकि, वर्तमान सरकार अब इस दिशा में ऐतिहासिक कार्य कर रही है। सरकार ने पुराने ग्रंथों और दस्तावेजों को सुरक्षित करने के लिए 'ज्ञान भारत मिशन' की शुरुआत की है। इस मिशन के तहत प्राचीन पांडुलिपियों को आधुनिक तकनीक की मदद से डिजिटल रूप में सुरक्षित किया जा रहा है, ताकि हजारों साल पुराना यह अतुलनीय ज्ञान आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा उपलब्ध और समझने योग्य बना रहे।
इतिहास के प्रति बदला दृष्टिकोण
इतिहास लेखन और स्वतंत्रता संग्राम के संदर्भ में पीएम मोदी ने कहा कि लंबे समय तक देश के गौरवशाली इतिहास को राजनीतिक नजरिए और एक सीमित दृष्टिकोण से दिखाने की कोशिश की गई। उन्होंने कहा कि अब इस सोच को बदलने का समय आ गया है। सरकार का निरंतर प्रयास है कि भारत के इतिहास को उसके वास्तविक और व्यापक स्वरूप में जनता के सामने लाया जाए।
इसमें किसी एक परिवार या विशिष्ट राजनीतिक विचारधारा के बजाय पूरे देश और अनगिनत नायकों के योगदान को प्रमुखता दी जा रही है। प्रधानमंत्री ने अंत में कहा कि आज देश 'सबका साथ, सबका विकास' के मंत्र के साथ आगे बढ़ रहा है और इसी कड़ी में हमारी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहरों को उनका उचित सम्मान दिया जा रहा है।
With AI Inputs
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