पेड़ के नीचे हताश बैठी वृद्धा बोली 'भूखी हूं', तो खाना देकर कोरोना वॉरियर ने पहुंचाया 1 माह का राशन
आणंद. कोरोना-लॉकडाउन की अवधि में गरीबों-भिखारियों पर दोहरी मुसीबत बरस पड़ी हैं। उन्हें न तो रहने-खाने की सुविधा मिल रही है, न ही ऐसे में उनसे नियमों का पालन हो पा रहा है। हताश होकर यह तबका सड़कों के किनारे या किसी बिल्डिंग के पास बैठे नजर आता है। ऐसे में जब आणंद में एक हेड कांस्टेबल ने वृद्धा को टाउन हॉल के निकट एक पेड़ के नीचे बैठे पाया तो वजह पूछी। वृद्धा रुंधे गले से बोली कि, भूखी हूं बेटा।'

भोजन कराया, एक माह का राशन भी दिया
यह सुनकर हेड कांस्टेबल ने उस वृद्धा के लिए खाने के लिए व्यवस्था की। इसके बाद उसे घर पहुंचाया। जहां उसने बताया कि, वह अपने भाई के साथ रहती है। लेकिन घर में भोजन की व्यवस्था नहीं होने से पिछले तीन दिन से कुछ खा नहीं पाए। बड़ी तंगी झेल रहे हैं। तब हेड कांस्टेबल का दिल और पसीज गया। उन्होंने फिर उस वृद्धा के परिवार को एक माह का राशन भी दिया। नेकी करने वाले यह हेड कांस्टेबल थे, आणंद टाउन पुलिस थाने में कार्यरत घनश्यामसिंह।

आणंद टाउन पुलिस थाने के निकट की घटना
घनश्यामसिंह ने बताया कि, जब दोपहर को मैं अपने घर की ओर जा रहा था तो टाउन हॉल के निकट एक पेड के नीचे एक बुजुर्ग महिला अकेली बैठी थी। वह आसमां ताक रही थी। उसे वहां बैठने की वजह पूछी ताकि वो चली जाए, तो उसने खुद को भूखी बताया। उस वृद्धा ने कहा कि, परिवार के पास राशन नहीं है। वह पिछले तीन दिन से भूखी है। तब मैंने उनके लिए व्यवस्था करने की सोची।

राज्य सरकार ने भी की है मुफ्त अनाज की व्यवस्था
राज्य में कोरोना-लॉकडाउन के बीच आमजन के परेशानियां दूर करने की दिशा में सरकार द्वारा भी कई प्रयास किए जा रहे हैं। केंद्र सरकार की घोषणा पर अमल करते हुए गुजरात सरकार ने गरीबी रेखा और उससे ऊपर की श्रेणी के लोगों के लिए अहम शुरूआत की है। सोमवार, यानी 13 अप्रैल से प्रदेशभर में एपीएल-1 कार्ड धारकों को राशन की दुकानों से अनाज मुफ्त बंटना शुरू हो गया है। सरकार ने ऐलान किया था कि, अनाज का वितरण 17 हजार उचित मूल्य की सरकारी मान्यता प्राप्त दुकानों से किया जाएगा। जिसके बाद से ही 60 लाख एपीएल कार्ड धारकों को भी मुफ्त राशन बंटता है।












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