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BJP नेता परशोत्तम रूपाला के किस बयान पर भड़का क्षत्रिय समाज? उग्र विरोध के बाद भी अब तक क्यों नहीं कटा टिकट?

क्षत्रियों पर टिप्पणी करने के मामले में केंद्रीय मंत्री और गुजरात के राजकोट से बीजेपी उम्मीदवार परशोत्तम रुपाला को समाज से भारी विरोध का सामना करना पड़ रहा है। उनके बयान के बाद गुजरात में क्षत्रिय समाज द्वारा जगह-जगह पर विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है और बीजेपी से उनका टिकट काटने की मांग की जा रही है।

इसी बीच आज यानी 9 अप्रैल को करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष राज शेखावत को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। राज शेखावत को अहमदाबाद एयरपोर्ट से हिरासत में लिया गया है। उन्होंने गांधीनगर में भाजपा के गुजरात मुख्यालय का घेराव करने का ऐलान किया था। उन्होंने कहा था कि यदि उन्हें वहां नहीं पहुंचने दिया गया तो वे आत्महत्या कर लेंगे।

BJP leader Parshottam Rupala

पुरुशोत्तम रूपाला ने क्या कहा था?

पुरुशोत्तम रूपाला ने 22 मार्च को राजकोट में दलित समुदाय में आने वाले रूखी समाज के कार्यक्रम में कहा था कि 'महाराजाओं' ने अंग्रेजों के सामने विनम्रतापूर्वक घुटने टेक दिए थे। उन्होंने रोटी और बेटी का व्यवहार किया, लेकिन दलित समाज नहीं झुका। राजपूत समुदाय के सदस्यों ने इस टिप्पणी को अपने अपमान के रूप में देखा।

अपनी मांग पर अड़ा क्षत्रिय समाज

इस बयान पर जब विवाद हुआ तो पुरुशोत्तम रूपाला ने दो बार माफी मांगी, लेकिन क्षत्रिय समुदाय अपनी मांग पर अड़ा हुआ है। वो रूपाला का टिकट रद्द करने की मांग पर अड़े हुए हैं। शुरुआती विरोध के बाद गुजरात में ये मामला क्षत्रिय बनाम पाटीदार हो गया है। राजपूत समुदाय ने एकजुट होकर विरोध प्रदर्शन करते हुए कहा कि टिकट वापस से कम पर वे राजी नहीं होंगे। वहीं अब रूपाला के समर्थन में पाटीदार समाज एकजुट हो गया है।

गुजरात सहित अन्य राज्यों ये में विवाद इतना बढ़ गया है कि बीजेपी के क्षत्रिय नेताओं को समाज के विरोध से भी दो चार होना पड़ रहा है। बीजेपी नेत्री और क्रिकेटर रवींद्र जडेजा की पत्नी रिवाबा को सोशल मीडिया पर ट्रोल किया गया। इतना ही नहीं, बीजेपी पर क्षत्रिय विरोधी होने का आरोप लगाया जा रहा है। गुजरात के पूर्व सीएम शंकर सिंह वाघेला ने भी बीजेपी पर क्षत्रिय विरोधी होने का आरोप लगाया है।

बीजेपी ने क्यों नहीं लिया एक्शन?

गुजरात में पाटीदार समाज काफी ताकतवर हो चुका है। 2017 के चुनावों में जब पाटीदार आंदोलन हुआ तो इसका असर भी दिखा। बीजेपी राज्य की सत्ता पर काबिल होने के बाद पहली बार दो डिजिट में 99 पर सिमट गई थी। बीजेपी को पाटीदारों की ताकत का अंदाजा है। यही वजह है कि क्षत्रियों के उग्र विरोध के बाद भी बीजेपी ने परशोत्तम रूपाला का टिकट नहीं काटा। अगर बीजेपी रूपाला का टिकट काटती है तो उस पर ओबीसी विरोधी होने का आरोप लग सकता है।

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