Kavya Kathiriya Love Story: जब AAP नेता का BJP की काव्या पर आया था दिल, Surat में पत्नी को पहनाया जीत का ताज
Alpesh Kathiriya Kavya Patel Love Story: गुजरात के हीरे और टेक्सटाइल शहर में लोकल बॉडी चुनाव 2026 के नतीजे आए तो एक बार फिर भगवा लहर छा गई। BJP ने सूरत नगर निगम की 120 सीटों में से 115 सीटें झटक लीं। लेकिन सबसे रोचक कहानी वार्ड नंबर 3 की है, जहां BJP की काव्या कथिरिया ने भारी जनसमर्थन के साथ एकतरफा जीत दर्ज की। AAP के दिग्गज नेता जहां हारे, वहीं BJP की पूरी पैनल ने कमाल दिखाया।
खास बात ये है कि यह वही काव्या कथिरिया हैं, जिनके इश्क में AAP नेता अल्पेश कथिरिया ने राजनीति के सारे बंधन तोड़ दिए। पाटीदार आंदोलन से शुरू हुई दोस्ती, राजनीति की उथल-पुथल, AAP छोड़ना और आखिरकार शादी... यह लव स्टोरी सिर्फ रोमांस नहीं, बल्कि आंदोलन, जेल, चुनाव और सियासी बदलाव की अनोखी मिसाल है। आइए इस जोडी की चटाकेदार सफर से रूबरू कराते हैं...

आंदोलन में पहली मुलाकात: 2015 का पाटीदार आंदोलन (Patidar Movement)
साल 2015। गुजरात में पाटीदार आरक्षण आंदोलन जोरों पर था। हार्दिक पटेल सरदार पटेल ग्रुप (SPG) के बैनर तले नेतृत्व कर रहे थे। उनके सबसे करीबी साथियों में एक थे अल्पेश कथिरिया। आंदोलनकारियों ने अल्पेश के आक्रामक अंदाज को देखकर उन्हें 'गब्बर' का नाम दे दिया गया।
इसी आंदोलन के दौरान अल्पेश की मुलाकात काव्या पटेल से हुई। काव्या राजकोट की रहने वाली हैं और पहले से ही राजनीति में सक्रिय थीं। दोनों की दोस्ती धीरे-धीरे गहरी होती गई। आंदोलन की आग में इश्क का तड़का लग गया। अल्पेश अमरेली जिले के भोरा बोखरवाला गांव के साधारण परिवार से हैं। उनके दो भाई, कोई बड़ा रसूख नहीं। लेकिन जुनून था। काव्या सूरत में रहती थीं और पहले से पार्षद (कॉर्पोरेटर) रह चुकी थीं।

जेल, बेल और सगाई: संघर्ष की राह पर प्यार
पाटीदार आंदोलन के दौरान अल्पेश को जेल जाना पड़ा। कानूनी कार्रवाई के बाद लंबे इंतजार के बाद बेल मिली। जेल से बाहर आने के बाद अल्पेश ने राजनीति से थोड़ी दूरी बनाई। लेकिन काव्या के साथ रिश्ता मजबूत होता रहा। दोनों ने सगाई कर ली। काव्या पटेल, जो पहले BJP से जुड़ी रही थीं, अब अल्पेश के साथ जीवन बिताने को तैयार थीं। शादी का फैसला भी अनोखा था, दोनों ने सामूहिक विवाह का रास्ता चुना।

AAP में एंट्री, चुनाव लड़े, लेकिन हार गए
2 जून 2022 को हार्दिक पटेल कांग्रेस छोड़कर BJP में चले गए। अल्पेश और उनके साथी धार्मिक मालविया ने नया विकल्प तलाशा, आम आदमी पार्टी (AAP)। दोनों गुजरात में AAP के प्रमुख पाटीदार चेहरे बने।
- अल्पेश कथिरिया ने सूरत की वराछा विधानसभा सीट से AAP टिकट पर चुनाव लड़ा।
- धार्मिक मालविया ने ओलपाड सीट संभाली।
दोनों BJP के भारी-भरकम उम्मीदवारों (किशोर कुमार कनानी और मुकेश पटेल) के सामने हारे, लेकिन अच्छे वोट मिले। 2022 विधानसभा चुनाव के बाद दोनों AAP में सक्रिय रहे।

2023 में शादी, 2024 में AAP से इस्तीफा, वजह चौंकाने वाली
2023 में सूरत के मोटा वराछा के गोपीन गांव में सौराष्ट्र पटेल सेवा समिति के सामूहिक विवाह समारोह में अल्पेश कथिरिया और काव्या पटेल ने शादी के सात फेरे लिए। दोनों जोड़े 87 जोड़ों में शामिल थे। शादी के बाद काव्या पटेल ने अल्पेश का सरनेम अपनाया और काव्या कथिरिया बन गईं।
फिर वक्त आया 18 अप्रैल 2024 का। अल्पेश ने AAP के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया। कारण था कि उन्होंने साफ कहा कि सामाजिक जवाबदारी और व्यक्तिगत कारणों से पार्टी को समय नहीं दे पा रहे थे। हालांकि, BJP में शामिल होने की बात से इनकार किया, लेकिन भविष्य खुला रखा।
चुनाव 2026: पति ने पत्नी को जिताया कैसे?
शादी के बाद अल्पेश ने पूरी ताकत काव्या के चुनाव प्रचार में लगा दी। वार्ड नंबर 3 में BJP पैनल के लिए उन्होंने:
- पाटीदार नेटवर्क और आंदोलन से जुड़े समर्थकों को मैदान में उतारा
- घर-घर डोर-टू-डोर कैंपेन चलाया
- युवा वोटरों को जोड़ा
- खुद प्रचार की कमान संभाली
नतीजा ये हुआ कि काव्या कथिरिया ने भारी बहुमत से एकतरफा जीत हासिल की। BJP की पूरी समिति विजयी हुई और कार्यकर्ताओं में जश्न छा गया। AAP के प्रदेश महासचिव मनोज सोरथिया और विपक्ष की नेता पायल सकारिया जहां हारे, वहीं काव्या-कथिरिया जोड़ी ने कमाल कर दिया।
आंदोलन से इश्क तक... एक अनोखी लव स्टोरी
काव्या कथिरिया लव स्टोरी सिर्फ दो लोगों का रिश्ता नहीं। यह पाटीदार आंदोलन, गुजरात की सियासी उथल-पुथल, AAP की हार और BJP की जीत की गवाही है। जब अल्पेश का दिल काव्या पर आया, तो उन्होंने सारे बंधन तोड़ दिए - आंदोलन, पार्टी, जेल... सब।
आज काव्या कथिरिया वार्ड नंबर 3 की विजेता हैं और अल्पेश उनके सबसे बड़े समर्थक। यह कहानी साबित करती है कि प्यार और राजनीति दोनों में साहस चाहिए।













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