Video कॉल कर Aisha Shaikh ने बयां किए Ukraine के जमीनी हालात, भटक रहे सैकड़ों गुजराती
भरूच। यूक्रेन में फंसे भारतीयों को वापस लाया जा रहा है। अब तक 1 हजार से ज्यादा छात्रों की सुरक्षित वापसी हो चुकी है। हालांकि, हजारों की तादाद में छात्र-छात्राएं अभी भी वहां हैं, जिन्हें निकालने के प्रयास किए जा रहे हैं। सरकार की एडवाइजरी के मुताबिक, बहुत से भारतीय पोलैंड सीमा से लौटने की कोशिश कर रहे हैं। जहां वे सैकड़ों की संख्या में जमा हैं।

'जहां तहां भटक रहे हैं भारतीय'
कई छात्र छात्राओं ने यूक्रेन से जमीनी हालत बयां किए हैं। जिनमें गुजरात के भरूच की रहने वालीं आएशा शेख (Aisha Shaikh) भी हैं। उन्होंने बताया कि, स्टूडेंट्स को यूक्रेन से सटे देशों के बॉर्डर तक पहुंचने के लिए काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि, हमें पहले तो यूक्रेन की यूनिवर्सिटी यूक्रेन छोड़कर आने ही नहीं देना चाहती थी। वहीं, शुरूआत में एंबेंसी ने भी उतना रिस्पॉन्स नहीं किया। जब जंग छिड़ गई तो हमाारी सरकार ने वापसी का मिशन शुरू किया।'
रोज सैकड़ों स्टूडेंट्स की स्वदेश वापसी
गुजराती छात्र पूजन ठाकरे ने कहा, 'हम 35 किलोमीटर पैदल चलकर यूक्रेन की सीमा तक पहुंचे हैं। यहां हमें कहीं से भी कोई मदद नहीं मिली। उलटे यूक्रेन की पुलिस-फोर्स ने कई भारतीयों से बुरा बर्ताव किया। उन्हें पीटा और जहां-तहां भगाया।

काफी स्टूडेंट्स का संपर्क नहीं हो पा रहा
वहीं, यूक्रेन की सीमा पर पहुंचे पूजन के दोस्तों ने कहा कि, हमारे परिचित जो स्टूडेंट्स पोलैंड पहुंच चुके हैं, उनका भी भारतीय दूतावास से संपर्क नहीं हो पा रहा। हालांकि, रोज सैकड़ों स्टूडेंट्स की स्वदेश वापसी हो रही है।

खौफ के बीच कड़ाके की ठंड
एक अन्य छात्रा ने कहा कि, मेरे कुछ दोस्तों ने यूक्रेन की सीमा पार कर ली है, लेकिन पोलैंड सीमा पर कोई भारतीय दूतावास नहीं है। इसलिए वे भी बीच में ही फंस गए हैं। मैं यूक्रेन बॉर्डर पर हूं और यहां से भी चेकपोस्ट से आगे बढ़ने के लिए 3 किमी लंबी लाइन लगी है। खौफ के बीच कड़ाके की ठंड से भी हालत खराब होती जा रही है।
अपने कमरों पर ही हैं काफी छात्र
वहीं, काफी छात्र अभी अपने कमरों पर ही हैं। उनके पास कुछ दिन का राशन-पानी बाकी है। उनका कहना है कि, हमारा एम्बेसी से संपर्क नहीं हो पा रहा है। इसके अलावा कीव में कर्फ्यू भी लगा है।












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