Gujarat: मां की मौत पर 15 लाख का बीमा क्लेम! कोर्ट पहुंचा मामला तो कहानी में आया नया मोड़
Gujarat Valsad Consumer Court rejected insurance claim of Rs 15 lakh of the deceased son
गुजरात के वलसाड में अजीबो-गरीब मर्डर केस का खुलासा हुआ है। दरअसल, वलसाड कंज्यूमर कोर्ट ने एक मृत महिला के बेटे के 15 लाख रुपये के बीमा दावे को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि मृत महिला के प्रतिरोध की कमी ने दुर्घटना बीमा प्राप्त करने की साजिश में उसकी मिलीभगत का संकेत दिया।
टाइम्स आफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, कोर्ट ने निष्कर्ष निकाला कि उसकी मृत्यु आकस्मिक नहीं थी, बल्कि आत्महत्या या स्वयं के द्वारा की गई मौत थी। बीमा कंपनी ने तर्क दिया कि परिवार ने कर्ज चुकाने से बचने के लिए इस घटना की पूर्व-योजना बनाई थी। कोर्ट ने बीमा कंपनी की दलीलें मानते हुए दावा खारिज कर दिया है। क्या है पूरा मामला?

दरअसल, वलसाड निवासी अरुणा देसाई ने दिसंबर 2007 में 15 लाख रुपए का पर्सनल लोन लिया था। लोन लेने के बाद महिला ने 21 दिसंबर 2007 से 20 दिसंबर 2008 तक की अवधि के लिए 15 लाख रुपए की पर्सनल एक्सीडेंट पॉलिसी भी ली थी। इसी बीच 12 दिसंबर 2008 को अरुणा अपने पति रंजीत देसाई के साथ वलसाड के धरमपुर स्थित भाव भावेश्वर मंदिर गईं। यहां दंपति मंदिर के गेस्ट हाउस में कमरा नंबर 21 में रुका था।
पुलिस के मुताबिक, रंजीत कैंसर से पीड़ित थे, इसलिए उन्होंने कमरे में पंखे से लटककर आत्महत्या कर ली। हालांकि, आत्महत्या से पहले रंजीत ने मफलर से अपनी पत्नी का गला घोंटकर हत्या कर दी थी। उसकी हत्या करने के बाद, रंजीत ने एक सुसाइड नोट लिखा, जिसमें कहा गया कि उसने उसे मार डाला।
दामाद को फोन कर दी जानकारी
रंजीत ने सुसाइड करने पहले अपने दामाद गालूभाई को भी फोन कर घटना की जानकारी दी और यह भी बताया कि वह आत्महत्या करने जा रहे हैं। घटना के बाद मृतक अरुणा के बेटे जिमित ने 15 दिसंबर 2008 को बीमा कंपनी को सूचित किया और 15 लाख रुपये का दावा दायर किया।
बीमा कंपनी ने दावा किया खारिज
उधर, 20 मई 2009 को बीमा कंपनी ने बेटे को सूचित किया कि उसका दावा खारिज कर दिया गया है। कंपनी ने उन्हें सूचित किया कि रंजीत देसाई ने जानबूझकर अरुणा देसाई की हत्या की है और इसे दुर्घटना की परिभाषा में शामिल नहीं किया जा सकता है। इसके बाद दावेदार 2010 में बीमा कंपनी के खिलाफ सूरत उपभोक्ता कोर्ट में गया।
वलसाड कंज्यूमर कोर्ट पहुंचा मामला
इसके बाद मामला वलसाड उपभोक्ता फोरम में स्थानांतरित कर दिया गया। शिकायतकर्ता ने कोर्ट में दलील दी कि मृतक और बीमाधारक अरुणा देसाई को नहीं पता था कि उस दिन उसकी हत्या होने वाली है। यह बात उनके पति रंजीत देसाई द्वारा लिखे गए सुसाइड नोट से साबित होती है और इसलिए, यह स्पष्ट है कि यह अरुणा देसाई की एक दुर्घटना थी। इसलिए दावा मंजूर किया जाना चाहिए।
दावेदार का तर्क खारिज
बीमा कंपनी ने तर्क देते हुए कोर्ट को बताया कि पूरा मामला परिवार द्वारा पहले से प्लान किया गया था। उनकी योजना था कि कर्ज न लौटाना पड़े। इसलिए बीमाधारक को मारने की योजना बनाई गया। मृतका अरुणा देसाई के शरीर पर कोई चोट के निशान नहीं थे, इससे यह साबित होता है कि घटना के दौरान उन्होंने अपने पति रंजीत देसाई का विरोध नहीं किया था, जो हत्या के लिए उनकी सहमति को साबित करता है।












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