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अब आलू से प्लास्टिक बनेगा? यहां ऐसी फैक्ट्री लगवाएगी गुजरात सरकार, शुरू हो गया काम

आलू किसानों के लिए खुशखबरी

पाटण। कांग्रेस सुप्रीमो सोनिया गांधी के बेटे राहुल गांधी की एक यह स्पीच आपने भी सुनी होगी- "ऐसी मशीन लगाउंगा, इस साइड से आलू घुसेगा उस साइड से सोना निकलेगा। इतना पैसा बनेगा कि आपको पता नहीं होगा क्या करना है पैसे का!" राहुल गांधी ने गुजरात में यह बात नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कही थी। दरअसल, ऐसा बोलकर राहुल गांधी ने भाजपा सरकार द्वारा आलू किसानों से किए गए वादे पर तंज कसा था। राहुल ने कहा कि, "ये मेरे शब्द नहीं हैं, मोदीजी ने ऐसा कहा था।"

गुजरात में अनोखा प्रोजेक्ट

गुजरात में अनोखा प्रोजेक्ट

यहां आलू से सोना निकलने वाली बात तो सच नहीं हो सकती। मगर, अब गुजरात की भाजपा सरकार आलू से प्लास्टिक निकलवाने की तैयारी जरूर कर रही है। इसके लिए हेमचंद्राचार्य उत्तर गुजरात विश्वविद्यालय-पाटण के लाइफ साइंस डिपार्टमेंट ने 3 साल का यह प्रोजेक्ट बनाया है। शोधकर्ताओं ने इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू भी कर दिया है। इस प्रोजेक्ट के लिए हेमचंद्राचार्य उत्तर गुजरात विश्वविद्यालय-पाटण के लाइफ साइंस डिपार्टमेंट को गुजरात स्टेट बायोटैक्नोलॉजी मिशन की ओर से 47 लाख रुपए का अनुदान दिया गया है, जो कि गवर्नमेंट बॉडी है।

आलू से 10 दिन में तैयार होगा प्लास्टिक!

आलू से 10 दिन में तैयार होगा प्लास्टिक!

शोधकर्ताओं का कहना है कि, आलू के स्टार्च से बायो प्लास्टिक बनती है। वे गुजरात के पाटण स्थित परिसर में इस प्रोजेक्ट में जुट गए हैं। अगले 10 दिन में बायो प्लास्टिक बन सकता है। उन्होंने कहा कि, बायो प्लास्टिक के कई फायदे होंगे, एक तो यह मौजूदा प्लास्टिक से ज्यादा शुद्ध होगा, दूसरे यह प्रकृति में बहुत जल्द नष्ट भी हो सकेगा।

मालूम हो कि, अब जो प्लास्टिक कहीं मिलता है, वो बरसों तक मिट्टी में दबे रहने पर भी नष्ट नहीं होता। उसका सेवन करने पर जीव-जंतुओं की जान भी चली जाती है। वहीं, प्लास्टिक के अपशिष्ट पदार्थों से हवा-पानी भी दूषित होता है। गंगा-यमुना जैसी नदियों में हर साल बड़ी मात्रा में प्लास्टिक अवशेष बहता है, जिससे पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है।

पेट्रो-प्लास्टिक से अच्छा रहेगा बायो-प्लास्टिक

पेट्रो-प्लास्टिक से अच्छा रहेगा बायो-प्लास्टिक

दिल्ली में प्रदूषण का बड़ा कारण प्लास्टिक-अपशिष्ट पदार्थ ही हैं। जहां कूड़े-कचरे के ढेरों से पहाड़ खड़े हो गए हैं। मगर, जैसा कि अब गुजरात स्टेट बायोटैक्नोलॉजी मिशन ने लाइफ साइंस विभाग को जिस प्रोजेक्ट की कमान सौंपी है, उसमें यह कहा जा रहा है कि, सब्जियों से बायो-प्लास्टिक बनाया जाएगा, जो कि पेट्रोलियम से तैयार होने वाले प्लास्टिक की तुलना में ज्यादा बेहतर रहेगा।

प्रकृति में बहुत जल्द नष्ट हो सकेगा

प्रकृति में बहुत जल्द नष्ट हो सकेगा

लाइफ साइंस डिपार्टमेंट के शोधकर्ताओं का कहना है कि- वे सबसे पहले शॉपिंग बैग बनाएंगे। उन्होंने कहा कि, उनका लक्ष्य- आलू के स्टार्च से बायो प्लास्टिक तैयार करना है, जो कि बहुत जल्द नष्ट भी हो जाता है।

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