Gujarat Election 2022: मोरबी में चुनाव प्रचार से क्यों भाग रहे हैं उम्मीदवार ? BJP प्रत्याशी का जानिए हाल
गुजरात विधानसभा चुनाव 2022: गुजरात में मोरबी विधानसभा सीट पर पहले ही चरण में चुनाव होना है। नामांकन का काम सोमवार को ही खत्म हो चुका है। लेकिन, कोई भी दल हो, उसका उम्मीदवार फिलहाल वहां चुनाव प्रचार करने से कन्नी काटता नजर आ रहा है। यहां से भाजपा ने अपने सीटिंग विधायक का टिकट काटकर अपने पांच बार के पूर्व विधायक को टिकट दिया है। बीजेपी उम्मीदवार कांतिलाल अमृतिया का मोरबी हादसे के बाद मच्छु नदी में कूदकर लोगों की जान बचाने की कोशिशों का वीडियो खुब वायरल हुआ था। आइए जानते हैं कि वहां किसी भी दल का प्रत्याशी अभी प्रचार क्यों नहीं शुरू कर पाया है और नदी में कूदने वाले भाजपा प्रत्याशी का चुनाव मैदान में क्या हाल है?

मोरबी में प्रचार से कन्नी काट रहे हैं उम्मीदवार-रिपोर्ट
द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक गुजरात की मोरबी विधानसभा सीट के लिए ज्यादातर राजनीतिक दलों ने अपने उम्मीदवार उतारे हैं, लेकिन अभी तक किसी ने अपना चुनाव प्रचार नहीं शुरू किया है। 30 अक्टूबर को यहां की मच्छु नदी पर 19वीं सदी में अंग्रेजों के जमाने में बना रस्सी वाला पुल टूट गया था, जिसमें 136 लोगों की जान चली गई थी। 1 दिसंबर को होने वाले पहले चरण के चुनाव के लिए सोमवार को नामांकन दाखिल करने का अंतिम दिन था। इस भयानक पुल हादसे को लेकर गुजरात की ही नहीं, पूरे देश की राजनीति गर्म रही है और विपक्षी दलों के निशाने पर बीजेपी सरकार है, जो कि केंद्र और प्रदेश दोनों जगहों पर सत्ता में है।

लोगों के गुस्से के डर से नहीं हो रहा प्रचार- स्थानीय
मोरबी पुल हादसे के बाद कांग्रेस ने बीजेपी के खिलाफ एक चार्जशीट जारी की है तो आम आदमी पार्टी ने इसकी मरम्मत में कथित भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है। मोरबी के एक निवासी विपुल प्रजापति ने उस न्यूज पोर्टल से कहा है, 'वो प्रचार कैसे करेंगे? शहर में हर जगह चाहे नेहरू गेट चॉक हो, ग्रीन चौक बापासीताराम चौक, पानी और चाय की दुकान हो, सब जगह इसी हादसे की ज्यादा चर्चा होती है। जो भी वोट मांगने जाएगा, उसे वोटरों का गुस्सा ही झेलना होगा.... 'दिलचस्प बात ये है कि उम्मीदवारों ने पहले ही कह दिया था कि नामांकन के दौरान वह ज्यादा समर्थकों की भीड़ नहीं जुटाएंगे। विपुल के मुताबिक 'यह त्रासदी का असर है।'

हादसे पहले भाजपा के पक्ष में माहौल था- स्थानीय
मोरबी के ही एक और निवासी दिलीप बरास्रा ने कहा कि 'त्रासदी से पहले बीजेपी के पक्ष में माहौल था। लेकिन, ऐसा लगता है कि बीजेपी और बाकी पार्टियां लोगों के गुस्से को लेकर डरी हुई हैं।' उन्होंने कहा कि शहर में ज्यादातर लोग यही मान रहे हैं कि हादसे की वजह से ही बीजेपी अपने सीटिंग एमएलए ब्रिजेश मेरजा को बदलकर कांतिलाल अमृतिया को टिकट देने को मजबूर हुई है। अमृतिया भाजपा के वही पूर्व विधायक हैं, जो हादसे के बाद पीड़ितों को बचाने के लिए खुद मच्छु नदी में कूद गए थे। उनका कहना है कि उनके काम की वजह से ही शहर के लोग उनका समर्थन करते हैं।

2017 में मोरबी से जीती थी कांग्रेस
एक और स्थानीय निवासी के मुताबिक, 'मोरबी विधानसभा सीट वर्षों से भगवा की गढ़ थी। 2017 में बीजेपी उम्मीदवार पाटीदार आरक्षण आंदोलन और एंटी-इंकंबेंसी की वजह से 5,000 से भी कम वोटों के अंतर से हार गए थे।' दरअसल, चुनाव में ब्रिजेश मेरजा कांग्रेस के टिकट पर ही जीते थे और उन्होंने भाजपा के मौजूदा प्रत्याशी अमृतिया को सिर्फ 3,419 वोटों से हराया था। क्योंकि, तब मोरबी पाटीदार कोटा आंदोलन का एक प्रमुख केंद्र था और यहां भाजपा के खिलाफ लहर पैदा की गई थी। बाद में मेरजा कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गए और 2020 में हुए उपचुनाव में भाजपा के टिकट पर जीत दर्ज की थी।

मच्छु नदी में कूदे थे भाजपा प्रत्याशी
मोरबी नगरपालिका, जिला पंचायत और तालुका पंचायत पर भाजपा का कब्जा है। मोरबी कच्छ लोकसभा क्षेत्र में है, जहां से बीजेपी के विनोद चावड़ा सांसद हैं। कांतिलाल अमृतिया 2017 में बीजेपी के टिकट पर हारने से पहले 1995, 1998, 2002, 2007 और 2012 में यहां पांच बार बीजेपी के उम्मीदवार के तौर पर जीत चुके हैं। इस बार मोरबी में राहत और बचाव के लिए नदी में कूदने की उनकी तस्वीर खूब वायरल हो चुकी है। ऐसे में यह देखने वाली बात है कि पुल हादसे से लगे झटके को भाजपा कैसे संभाल पाती है।

मोरबी का मतदाता समीकरण
मोरबी विधानसभा सीट पर करीब 2.90 लाख मतदाता हैं। इसमें 80,000 पाटीदार, 35,000, 30,000 दलित, 30,000 सथवारा समाज के लोग (ओबीसी), 12,000 अहीर और 20,000 ठाकोर-कोली समाज के वोटर बताए जाते हैं। गुजरात की 182 सीटों पर 1 दिसंबर और 5 दिसंबर को चुनाव करवाए जा रहे हैं और मतगणना 8 दिसंबर को होने वाली है।












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