'कॉलर पकड़ा तो घर जाकर गोली मारूंगा...', धमकी वाले बागी नेता मधुभाई खुद भी हारे, BJP को भी हरवाया
गुजरात विधानसभा चुनाव में भाजपा ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। पार्टी को इस बार कुल 156 सीटें मिली हैं। वहीं कई बीजेपी से नाराज होकर चुनाव लड़े बागी नेता अपना चुनाव हार गए हैं। इनमें मुधभाई भी शामिल हैं।

गुजरात विधानसभा चुनावों में बीजेपी ने अब तक का अपना सबसे शानदार प्रदर्शन किया है। गुजरात में भारतीय जनता पार्टी 156 सीटें जीतकर प्रचंड बहुमत में आई है। वहीं कई बीजेपी से नाराज होकर चुनाव लड़े बागी नेता अपना चुनाव हार गए हैं। इनमें एक नाम बाहुबली नेता मधुभाई बाबुभाई श्रीवास्तव का है। वाघोड़िया सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़े मधु श्रीवास्तव ने विरोधियों को सरेआम धमकी दी थी।
2022 में भाजपा ने सीटिंग विधायक मधु श्रीवास्तव का पत्ता काट कर अश्विनभाई पटेल (काका) को मैदान में उतारा था। वाघोडिया से छह बार के विधायक और पूर्व-भाजपा प्रत्याशी मधु श्रीवास्तव इस बार निर्दलीय लड़ रहे थे। लेकिन चुनाव वह अपना ये चुनाव हार गए हैं। उनके निकट प्रतिद्वंदी रहे निर्दलीय उम्मीदवार वागेला धर्मेंद्रसिंह रानुभ (बापू) चुनाव जीत गए हैं।
मधु श्रीवास्तव हारे तो हारे लेकिन बीजेपी की भी नैया ले डूबे। मधु श्रीवास्तव को इस सीट पर मात्र 14586 वोट मिले।वहीं दूसरे नंबर रहे बीजेपी उम्मीदवार अश्विनभाई पटेल (काका) को 63781 वोट मिले। वे निर्दलीय उम्मीदवार धर्मेंद्रसिंह रानुभ (बापू) से 13,886 मतों के अंतर से हार गए। मधु श्रीवास्तव के खड़े होने के चलते बीजेपी के वोट काटकर मधुभाई पार्टी के उम्मीदवार को हराने में सफल रहे।
मधु भाई चुनाव के वक्त अपने विवादित बयान के चलते सुर्खियों में आ गए थे। बाहुबली विधायक मधु श्रीवास्तव ने अपने कार्यकर्ताओं से कहा था कि अगर कोई तुम्हारा कॉलर पकड़े तो उसके घर जाकर मैं गोली ना मारूं तो मेरा नाम मधु भाई नहीं। 2017 गुजरात विधानसभा चुनाव में मधु श्रीवास्तव ने भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा था और जीत हासिल की थी। पिछली बार के चुनाव में उनका मुकाबला एक और दबंग उम्मीदवार धर्मेंद्र सिंह वाघेला से हुआ था।
जानिए कौन हैं मधु श्रीवास्तव 'बाहुबली'?
मधु श्रीवास्तव वाघोडिया सीट से लगातार 6 बार विधायक रहे हैं। वैसे तो लोग उन्हें गुजरात में 'बाबूभाई' बुलाते हैं। मगर, उनका पूरा नाम श्रीवास्तव मधुभाई बाहुबली है। वह मूलत: यूपी के हमीरपुर के (राठ) धमना गांव के रहने वाले हैं। तगड़ी पहुंच के चलते गुजरात में उन्हें राजनीति का 'बाहुबली' कहा जाता है। 1994 में उन्होंने पहला चुनाव बतौर निर्दलीय जीता था। जिसके बाद भाजपा में शामिल होने पर भी लगातार जीते। अलग-अलग मामलों में उन पर 9 केस भी दर्ज हुए, फिर भी माना जाता है कि उनकी मदद से भाजपा तीन बार सत्ता में आई। खुद के बारे में बताते हैं कि कभी रेलवे-ड्राइवर भी रहे।
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