गुजरात: मोदी के गढ़ में आम आदमी पार्टी ने झोंकी ताकत, दिग्गज हीरा कारोबारी ने थामा 'झाड़ू'

सूरत। दिल्‍ली में सत्‍तारूढ़ आम आदमी पार्टी (आप) अब गुजरात के विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुटी है। यहां अगले साल चुनाव होने हैं और इसके लिए "आप" व्‍यापक स्‍तर पर सदस्‍यता बढ़ाने के अभियान चला रही है। पिछले दिनों दिल्‍ली के मुख्‍यमंत्री ने ऐलान किया था कि उनके उम्‍मीदवार गुजरात में सभी सीटों पर चुनाव लड़ेंगे। जिसके बाद दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया भी गुजरात पहुंचे। मनीष सिसोदिया की उपस्थिति में कई भाजपाई नेताओं ने "आप" ज्‍वॉइन की। "आप" के गुजरात प्रदेशाध्‍यक्ष का दावा है कि, अकेले सूरत में ही अब तक 300 से ज्‍यादा भाजपाई "आप" ज्‍वॉइन कर चुके हैं। जिनमें कई बड़े स्‍थानीय नेता शामिल हैं।

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सिसौदिया ने हीरा कारोबारी को पार्टी में शामिल कराया

आप की आलाकमान चाहती है कि, उनकी पार्टी इस बार के विधानसभा चुनाव में भाजपा को उसके गढ़ गुजरात में ही चुनौती दे। पिछले महीनों हुए चुनावों में आप ने नगर निगम व पंचायत चुनावों में अच्‍छा प्रदर्शन किया था। अकेले सूरत में आप ने 20 से ज्‍यादा सीटें जीत ली थीं। सूरत में आप में शामिल होने वाले स्‍थानीय नेताओं की संख्‍या तेजी से बढ़ रही है। भाजपा को चुनाव में टक्कर देने की तैयारी कर रही आम आदमी पार्टी (आप) के लिए बीते रविवार का दिन बहुत ही खास रहा। आप ने सूरत के एक प्रमुख हीरा कारोबारी को पार्टी में शामिल करा लिया। यह पार्टी यहां मीडिया, सामुदायिक सेवा, परोपकार और युवा सक्रियता जैसे विविध पृष्ठभूमि के लोकप्रिय चेहरों को शामिल करने पर काम कर रही है।

बीते 27 जून को नामचीन व्यवसायी महेश सवानी भी सूरत में दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया की उपस्थिति में आप में शामिल हुए। उनके अलावा कई और स्‍थानीय नेताओं ने भी आम आदमी पार्टी (आप) का दामन थाम लिया। आप के नेताओं का कहना है कि, दो सप्ताह से भी कम समय में, गुजरात में ऐसा हुआ जब दूसरे हाई-प्रोफाइल शख्‍स को पार्टी में शामिल किया गया है। आप के एक नेता ने कहा कि, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के गढ़ गुजरात में जनसेवा करना चाहते हैं.. चूंकि अब लोग भाजपा के शासन से तंग आ चुके हैं।

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इस महीने की शुरुआत में, केजरीवाल खुद एक जाने-माने पत्रकार और बेहद लोकप्रिय न्यूज एंकर, इसुदान गढ़वी को पार्टी में शामिल कराने एवं चुनावों के संदर्भ में घोषणा करने के लिए अहमदाबाद आए थे। वहीं, बीते रोज सिसोदिया ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में सवानी को पार्टी में शामिल करने के बाद, एक युवा कार्यकर्ता प्रवीण राम के साथ भी बैठक की, जो जन आंदोलन मंच का नेतृत्व कर रहे हैं और राज्य में बेरोजगार युवाओं के लिए लड़ रहे हैं। बैठक के बाद, खबरें सामने आईं कि प्रवीण राम, जिनके संगठन को युवाओं का समर्थन प्राप्त है, के आप में शामिल होने की संभावना है।

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यह तो सब जानते ही हैं कि आप पार्टी अभी खासकर राष्ट्रीय राजधानी तक ही सीमित रही है, लेकिन अब वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के गृह राज्य में भी पैठ बना रही है। इसके लिए आप यहां भाजपा से नाराज लोगों को अपने साथ जोड़ रही है। साथ ही स्‍थानीय नेताओं, पत्‍राकारों के साथ बैठकें हो रही हैं। प्रवीण राम के अलावा, आप नेता कई अन्य नेताओं के साथ बातचीत कर रहे हैं, जिन्हें गुजरात में किसानों और ग्रामीण समुदायों का समर्थन प्राप्त है।

आप के एक नेता ने कहा, "आने वाले दिनों में हमारे पैनल में कई नए और प्रभावशाली लोग होंगे।" वहीं, कुछ दिनों पहले केजरीवाल ने भी कहा था, "गुजरात अब परिवर्तन चाहता है, क्योंकि राज्य में भाजपा और कांग्रेस एक निश्चित मैच खेल रहे हैं।" उस समय गढ़वी को केजरीवाल ने अपनी प्रेस वार्ता में अहमदाबाद में पार्टी में शामिल किया गया था। तब उन्होंने जोर देकर कहा कि आप 2022 में अगले विधानसभा चुनाव में गुजरात में भाजपा के लिए एक वास्तविक विकल्प के रूप में उभरेगी, जिसमें उनकी पार्टी सभी 182 सीटों पर चुनाव लड़ेगी।

अब सिसोदिया ने भी रविवार को उसी रणनीति पर काम किया। उन्होंने कहा कि "राज्य में अगला 2022 विधानसभा चुनाव भाजपा और आप के बीच होगा", और यह कि आप ही भाजपा के लिए मुख्य चुनौती होगी। इससे पहले मई में, सौराष्ट्र के एक पाटीदार समुदाय के नेता नरेश पटेल, जिन्होंने कहा था कि राज्य का अगला मुख्यमंत्री पाटीदार समुदाय से होना चाहिए, ने दिल्ली में आप के शासन की बहुत प्रशंसा की थी और कहा था कि, गुजरात में भी इस पार्टी की लोकप्रियता बढ़ रही है।

हालाँकि, राज्य में स्थानीय भाजपा नेताओं ने यह सुनिश्चित करने के लिए कई दिनों तक इस तरह की बयानबाजी की कि अन्य पाटीदार चेहरे नरेश पटेल का अनुसरण न करें और आप या केजरीवाल की प्रशंसा करते हुए मीडिया में न जाएँ। वहीं, एक प्रमुख पाटीदार नेता ने कहा, 'पाटीदार भाजपा का विकल्प चाहते हैं और कांग्रेस किसी भी तरह से वो विकल्प नहीं है। यह वह संदर्भ है जहां केजरीवाल और आप तस्वीर में आते हैं। " जाहिर तौर पर यही कारण भी हो सकता है कि एक प्रमुख व्यवसायी और पाटीदार समुदाय के नेता जैसे सवानी, जिनके पीपी सवानी समूह का शहर में ₹2 हजार करोड़ का हीरा-कारोबार है और जिन्होंने सामूहिक विवाह का आयोजन करके सामुदायिक सेवा में नाम कमाया है। वो अब आप से जुड़े हैं।

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सूरत के एक समाचार पत्र के संपादक मनोज मिस्त्री ने कहा, 'सवानी के आप में आने से निश्चित तौर पर फर्क पड़ेगा, क्योंकि वह सभी समुदायों में बेहद लोकप्रिय हैं। हर साल, वह 200-250 ऐसी लड़कियों के लिए सामूहिक विवाह का आयोजन करते हैं, जिनके माता-पिता या पति नहीं हैं। वह प्रत्येक लड़की को ₹1.5 लाख के आभूषण और रसोई, फर्नीचर और अन्य आवश्यक सामान भी मुहैया कराते हैं।"
मिस्त्री ने कहा, सवानी ने अब तक बिना किसी भेदभाव के सभी समुदायों की करीब 4,000 लड़कियों की शादियां कराई हैं। और यह सब उन्‍होंने सूरत और सौराष्ट्र क्षेत्र में कराया।"

मनोज मिस्त्री के मुताबिक, विभिन्न समुदाय के नेताओं और व्यापारियों सहित ऐसे कई अन्य लोग अगले कुछ महीनों में सूरत में आप में शामिल होंगे। इस साल फरवरी में हुए नगर निगम चुनाव में आप ने अपने पहले मुकाबले में सूरत निगम में 27 सीटें जीती थीं और स्थानीय निकाय में मुख्य विपक्षी दल के रूप में उभरी थी। अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, आप की रणनीति से, ऐसा प्रतीत होता है कि वह ऐसे सामाजिक मंच का निर्माण कर रही है, जहां किसान, ग्रामीण समुदाय, व्यापारी, व्यवसायी, युवा कार्यकर्ता और समुदाय के नेताओं को शामिल किया जा सकता है, ऐसे समय में जब सत्तारूढ़ सरकार सत्ता-विरोधी लहर का सामना कर रही है और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस बुरी हालत में है...तो आप बड़ी पार्टी बनकर उभरेगी।

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