नागपंचमी पर नाग नाम के शेर की मौत, देश में यहां आखिर क्यों हुआ ऐसा?

अमरेली। आज नागपंचमी का पर्व मनाया जा रहा है। इसी बीच गुजरात के अमरेली जिले से खबर आई है कि, नाग नाम के शेर की मौत हो गई है। इस एशियाई शेर की लाश जाफराबाद से बरामद हुई है। वन्य-जीव प्रेमियों के लिए यह दुखद घटना है।

नागपंचमी पर नाग नाम के शेर की मौत

नागपंचमी पर नाग नाम के शेर की मौत

वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, शेर की लाश पर किसी तरह के निशान नहीं मिले। ऐसे में बीमारी के कारण शेर की मौत की आशंका जताई जा रही है। वहीं, कुछ वाइल्डलाइफ एक्सपर्ट्स का मानना है कि, यह शेर सीडीवी के रोग से तो नहीं मर गया। क्योंकि, गुजरात में बहुत से शेरों की मौत इसी वायरस की वजह से हो चुकी है।

तीन दिन पहले भी एक लाश मिली

तीन दिन पहले भी एक लाश मिली

अमरेली में तीन दिन पहले भी एक शेर की लाश मिली थी।यहां साकरिया इलाका राजुला व जाफराबाद दोनों रेंज का सीमाई इलाका माना जाता है। बहरहाल, शेर की ताजा मौत को लेकर वन विभाग के कर्मियों में यह चर्चा भी हो रही हैं कि उक्त शेर के पास कॉलर आईडी भी थी। राजस्व इलाके में इस शेर को स्थानीय लोग नाग के नाम से ही जानते थे। यह क्या संयोग है कि, नागपंचमी के मौके पर ही उसकी लाश मिली है।

अब तक 87 एशियाई शेर मर गए?

अब तक 87 एशियाई शेर मर गए?

पिछले दिनों ही एक रिपोर्ट में बताया गया था कि, गुजरात में इस वर्ष के शुरुआती पांच महीनों में ही 85 एशियाई शेरों की मौत हो गई। जिनमें से 59 की मौत गिर ईस्ट डिवीजन में हुई। इसी इलाके में वर्ष 2018 के दौरान करीब 27 शेरों की मौत हुई थी। अब इस साल यानी 2020 में काफी शेरों की मौत हो जाने के बाद केंद्र सरकार ने दिल्ली से एक जांच दल गुजरात भेजा। यह दल शेरों की मौत की वजहें जानने के लिए आया था।

सरकार ने दिल्ली से भेजा था जांच दल

सरकार ने दिल्ली से भेजा था जांच दल

वन विभाग के अनुसार, इस वर्ष मारे गए कई शेरों के सैंपल गुजरात बायोटेक्नोलोजी रिसर्च सेंटर (जीबीआरसी) में भेजे गए हैं। जहां जांच हो रही है। वहीं, इसी साल लॉकडाउन के दिनों में भारतीय वन्य जीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई), भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान और वन व पर्यावरण मंत्रालय के विशेषज्ञों ने गुजरात पहुंचकर जांच-पड़ताल की थी।

पिछले साल मरे थे 134 शेर, 2018 में 112

पिछले साल मरे थे 134 शेर, 2018 में 112

पिछले वर्ष गुजरात में 134 शेरों की लाशें मिली थीं। उससे पहले वर्ष 2018 में 112 मौतें दर्ज की गई थीं। इन मौतों को लेकर संभावना जताई गई कि कुछ शेरों की मौत सीडीवी की वजह से ही हुई। अब फिर शेरों की मौत से चिंतित हुई राज्य सरकार एहतियातन एक हजार वैक्सीन आयात कर रही है। ये वैक्सीन अमेरिका से मंगवाई जाएंगी।

8 सालों में गई 500 से ज्यादा शेरों की जान

8 सालों में गई 500 से ज्यादा शेरों की जान

इससे पहले फरवरी 2019 में वनइंडिया ने भी एक खबर में बताया था कि, गुजरात में 8 सालों के अंदर 529 शेरों की मौत हो चुकी है। अकेले वर्ष 2016 में ही 114 शेरों की जान गई। यह भी तब, जबकि यहां सासन गिर के जंगल एशियाई शेरों के लिए दुनिया में सबसे सेफ प्रश्रय स्थल माने जाते हैं, फिर भी बड़ी संख्या में शेर यहां भी बेमौत मरते हैं। ये मौंतें होने के कारण तो बहुत से रहे, लेकिन शेरों को संरक्षित करने के लिए सरकार एवं वन विभाग के प्रयास नाकाफी ही रहे।

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