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Gorakhpur News: गोरखपुर विश्वविद्यालय में आयोजित कार्यशाला में इन महत्वपूर्ण बिन्दुओं पर हुई चर्चा

Gorakhpur News: दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय स्थित महायोगी गुरु गोरखनाथ शोधपीठ द्वारा कुलपति प्रो0 पूनम टण्डन के संरक्षण में चल रहे सप्तदिवसीय शीतकालीन कार्यशाला 'योग का विज्ञान' में चौथे दिन भी विद्यार्थियों की काफी संख्या रही। योग प्रशिक्षण डा. विनय कुमार मल्ल के द्वारा दिया गया। योग प्रशिक्षण में लगभग 80 लोगों ने भाग लिया। जिसमे एन. एस. एस., योग एवं स्नातक, परास्नातक, शोध छात्र आदि विद्यार्थी एवं अन्य लोग सम्मिलित हुए।

सायं 3 बजे आनलाइन माध्यम से योग एवं चिकित्सा विज्ञान विषय पर कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यक्रम का शुभारम्भ मुख्य अतिथि के स्वागत के साथ शोधपीठ के उप निदेशक डॉ. कुशलनाथ मिश्र जी के द्वारा हुआ। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉ. प्रदीप कुमार चौधरी, शतभिषा आयुर्वेद, लखनऊ से रहे।

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डॉ. प्रदीप कुमार चौधरी ने योग के आयुर्वेदिक सम्बन्धों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने वात, पित्त और कफ के प्रकृति और गुणों को विस्तार से समझाया। प्रकृति पर चर्चा करते हुए शारीरिक प्रकृति, बीमारी की प्रकृति, औषधि की प्रकृति, वस्तु की प्रकृति को व्याख्यायित किया। उन्होंने आयुर्वेद से योग को जोड़ते हुए कहा कि अलग अलग प्रकृति के व्यक्तियों को अलग अलग प्रकार के आसन करना चाहिए। शरीर के प्रकृति के अनुसार योगासनों का चयन करना चाहिए। वात प्रधान लोगों को स्ट्रेचिंग वाले आसन करना चाहिए।

उन्होंने प्रकृति के अनुसार डाइट लेने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि कुंजल क्रिया कफ का नाश करता है। इसलिए फरवरी मे कुंजल क्रिया करना चाहिए। उन्होंने योग का शोध आधुनिक विज्ञान के संदर्भ मे व्याख्या करते हुए कहा कि योग पर माडर्न साइंस के बजाय आयुर्वेद के पैरामीटर पर रिसर्च करना चाहिए। सुबह योग प्रशिक्षण ले विद्यार्थियों सहित श्रोताओं ने उनसे नाड़ी तथा शारीरिक संरचना से संबंधित अनेक प्रश्न पूछे जिनका उन्होंने समाधान किया।

इस आनलाइन व्याख्यान में कार्यक्रम का संचालन शोधपीठ के रिसर्च एसोसिएट डॉ. सुनील कुमार द्वारा किया गया। शोधपीठ के सहायक निदेशक डॉ. सोनल सिंह द्वारा मुख्य वक्ता एवं समस्त श्रोताओं का धन्यवाद ज्ञापित किया गया। विभिन्न विश्वविद्यालय के शिक्षक सहित शोधपीठ के सहायक ग्रन्थालयी डॉ. मनोज कुमार द्विवेदी, शोध अध्येता हर्षवर्धन सिंह, कुंवर रणंजय सिंह, प्रिया सिंह, चिन्मयानन्द मल्ल उपस्थित रहे।

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