टेक्नोलॉजी के दौर में बदल रहा है संप्रेषण का तरीका - डा.अजय कुमार चौबे
DDU University News Gorakhpur: दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय गोरखपुर के अंग्रेजी विभाग में वैल्यू एडेड कोर्स के दूसरे दिन के पहले सत्र में मुख्य वक्ता के रूप में डॉ अजय कुमार चौबे, अध्यक्ष , अंग्रेजी विभाग,जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय, बलिया ने कम्युनिकेशन स्किल इन द न्यू मिलेनियम विषय पर अपना अमूल्य व्याख्यान प्रतिभागियों को दिया।
उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दशकों में पत्र ईमेल बन गए हैं, टेलीफोन स्मार्टफोन बन गए हैं, तथा समाचार पत्र इंटरनेट बन गए हैं, टेक्नोलॉजी बहुत तेजी से विकसित हो रही है। स्मार्टफोन केवल कॉल करने के लिए ही इस्तेमाल नहीं हो रहा हैं,अपितु उसके माध्यम से ईमेल,टेक्स्ट तथा इमोजी के रूप में अपनी भावनाओ को भी प्रकट किया जा रहाहै.तथा यह संचार का एक प्रमुख साधन बन चुका है।

उन्होंने कहा कि कौन सी बात कब कही जाती है इस बात का सलीका होना चाहिए। उन्होंने व्यक्तिगत आत्मविश्वास पैदा करने की आवश्यकता पर जोर दिया और बताया कि एक अच्छी और प्रभावशाली प्रस्तुति के लिए तीन चीजें बहुत जरूरी हैं - विचार, इरादा और शैली। उनकी टिप्पणियों ने प्रतिभागियों के बीच बहुत रुचि पैदा की, जिसके बाद एक प्रश्न उत्तर सत्र का आयोजन हुआ।
विभागाध्यक्ष प्रोफेसर अजय कुमार शुक्ला ने अतिथियों का स्वागत करते हुए विषय की प्रासंगिकता पर ज़ोर दिया .उन्होंने बताया कि इस तरह के कोर्स को चलाने का उद्देश्य छात्रों के अंदर आत्मविश्वास, संचार शैली तथा उनके व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास करना है।
पहले सत्र का संचालन श्रेया मिश्रा तथा जाह्नवी सिंह द्वारा किया गया।
कार्यक्रम के दूसरे सत्र में मुख्य वक्ता के रूप में डॉक्टर शरद कुमार मिश्रा, पूर्व विभागाध्यक्ष, बायोटेक्नोलॉजी और डायरेक्टर एग्रीकल्चर इंस्टीट्यूट, दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय गोरखपुर ने मास्टरिंग कम्युनिकेशन स्किल्स: की टू पर्सनल एंड प्रोफेशनल सक्सेस विषय पर अपना व्याख्यान देते हुए कहा कि व्यक्तिगत तथा व्यावसायिक सफलता के लिए संचार में कौशल या संचार में महारथ हासिल करना बहुत जरूरी होता है।
संचार के लिए व्यक्ति की आवाज उच्चारण भाषा तेज गति और स्वर का सही उपयोग शामिल होता है। लेखन कौशल के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि यह सुसंगत और स्पष्ट होना चाहिए। संवाद में सही समय पर सही बात कहना और सुनना आवश्यक होता है संवाद में अभिवादन और शिष्टाचार का पालन करना संबंधों को मजबूत करता है।
दूसरे सत्र का संचालन श्रेया मिश्रा तथा जाह्नवी सिंह और धन्यवाद ज्ञापन श्वेता उपाध्याय ने किया। उक्त अवसर पर प्रो अवनीश राय, डॉ शायिका तंज़ील और विभागीय शिक्षक भी उपस्थित रहे .












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