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150 पेड़ करते हैं लीची के इन विशेष 15 पेड़ों का संरक्षण, दुबई से लंदन तक मिलती है मुँह मांगी कीमत

दुबई से लंदन तक फैली है गोरखपुर की लीची की मिठास: सीजन से पहले ही बुक हो जाती हैं इन 15 पेड़ों के लीची। जानिए क्या खास है लीची की इस अनोखी किस्म में और कैसे देखरेख की जाती है इन 15 पेड़ों की।

unique litchi of Gorakhpur exported to Dubai and London know about very special litchi in Ramnagar

लीची एक ऐसा फल है जो सबसे कम समय में अपनी मिठास घोल कर गायब हो जाता है। इसलिए लीची के शौकीनों को कम समय में ही इसका जायका मिलता है। आज हम आपको एक ऐसी लीची के बारे में बताने जा रहे हैं, जो फलता तो गोरखपुर में है, लेकिन यहां के लोग ही उसका स्वाद नहीं चख पाते। हर साल यहां होने वाली लीची लंदन-दुबई भेज दी जाती है। विदेशों में इसकी जबरदस्त डिमांड होने के साथ ही मुंह मांगी कीमत भी मिलती है। गोरखपुर की फुटकर मार्केट में जिसका रेट 70 से 80 रुपए प्रति किलो है, वहीं रामनगर के बाग की लीची 500 से 600 रुपए प्रति किलो बिकती है। दुबई और लंदन में पहुंचकर यही लीची 1500 से 2000 हजार रुपए प्रति किलो बिकती है।

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बेहद खास है यहां की लीची
गोरखनाथ इलाके के रामनगर में बहुत पुरानी लीची का बाग है। ये बाग डेढ़ एकड़ से अधिक क्षेत्रफल में फैला है। यहां लीची के सैकड़ों पेड़ हैं। यहां 15 सालों से लीची की अच्छी पैदावर हो रही है। इस लीची की मिठास अन्य से बिल्कुल अलग होती है। यही वजह है कि सीजन शुरू होने से पहले ही लंदन और दुबई से बुकिंग आ जाती है। हर साल सीजन में जैसे ही लीची तैयार होती है, उसे विदेशों में भेज दिया जाता है। जबकि, थोड़ा सा हिस्सा कुछ बड़े व्यापारियों को मिलता है, जिसके लिए उन्हें पहले से ही बुकिंग करानी होती है।
सभी को नसीब नहीं होती रामनगर की लीची
आपको जानकर हैरानी होगी कि शहर में रहने वाले लोगों को ही रामनगर की लीची नसीब नहीं होती थी। यहां की लीची लंदन-दुबई भेज दी जाती थी। हालांकि, कोरोना काल के दौर में जब लॉकडाउन लगा तो पहली बार लीची का निर्यात नहीं हो पाया। इसलिए इसको गोरखपुर सहित अन्य शहरों में बेचना पड़ा था।

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24 घंटे पानी में डूबे होने चाहिए पेड़
फहीम बताते हैं, यह एक विशेष प्रजाति की लीची है। जो, काफी कम देखने को मिलती है। गोरखपुर के रामनगर बाग में भी इसके सिर्फ 15 पेड़ ही बचे हैं। इसकी पैदावार भी कम होती है। क्योंकि, इसके पेड़ के लिए अलग तरह का जलवायु होना जरूरी है। यह सिर्फ ठंडी जगहों पर ही होती है। यही वजह है कि यहां सीजन शुरू होने से पहले पेड़ों के चारो ओर गड्ढे कर दिए जाते हैं और उसमें पूरा पानी भरा होता है। लीची के पेड़ 24 घंटे पानी में डूबे होने चाहिए और ठंडा वातावरण होना बेहद जरूरी है।
15 पेड़ बचाने के लिए लगाए हैं 150 पेड़
आपको जानकर हैरानी होगी कि इन 15 पेड़ों को बचाने के लिए इसके चारो ओर करीब 150 से अधिक आम और अन्य फलों के पेड़ हैं। ताकि, यहां का वातावरण सुरक्षित रह सके। इसकी देखभाल करने के लिए चार लोग लगे होते हैं। जो लगातार इन पेड़ों की देखभाल और गड्डों में पानी भरने का काम करते हैं।

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ऐसी ताजगी और मिठास कहीं नहीं
लीची के बाग में काम करने वाले फहीम बताते हैं कि यहां की लीची की मिठास और ताजगी का जवाब नहीं है। ऐसी लीची कहीं नहीं और नहीं मिलेगी। इसलिए इसे बेचने में भी कहीं कोई दिक्कत नहीं होती है। मंहगी होने की वजह से ज्यादातर एलिड क्लास लोग इस लीची को पंसद करते हैं।
विदेश में मिलती मुंह मांगी कीमत
वे बताते हैं कि मैं 10 साल से अधिक समय से इस बाग की देखरेख कर रहा हूं। हर साल यहां की लीची सीजन के शुरू में ही लंदन और दुबई भेज दी जाती है। क्योंकि, वहां इसका अच्छा रेट मिलता है। हालांकि, कुछ लीची यहां स्पेशल आर्डर पर गोरखपुर के व्यापारियों को भी दी जाती है। लेकिन, गोरखपुर में इसका रेट महज 500 से 600 रुपए किलो ही मिलता है। जबकि, विदेश में 1500 से 2000 रुपए तक रेट मिल जाता है।

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