Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

Mother's Day: गोरखपुर की एक ' बेगम ' की कहानी खुद उसकी जुबानी, जिसने बच्चों के लिए उठाया यह बड़ा कदम

Mother's Day Special Story Apsari Begam Gorakhpur: आज मदर्स डे है। मां की ममता शब्दों में नहीं बयां की जा सकती है। मां बच्चों के जीवन को सही अर्थ देती है। बच्चे के पूरे भविष्य को एक नई दिशा देती है। अपने मदर्स डे पर बहुत कहानी सुनी होगी लेकिन आज एक ऐसी मां की कहानी आपको खुद उसकी जुबानी सुनाएंगे । गोरखपुर के गुलहरिया की रहने वाली अप्सरी बेगम ने वन इंडिया हिंदी रिपोर्टर पुनीत कुमार श्रीवास्तव से खास बातचीत की और आने संघर्ष के बारे में बताया।

शादी के बाद अचानक बढ़ गईं मुश्किलें

अप्सरी बताती हैं कि वह मूलरूप से बिहार की रहने वाली हैं। वहां बचपन अच्छा बीता। बहुत मुश्किलों का सामना नहीं करना पड़ा। सब कुछ अच्छा चल रहा था। शादी के बाद कुछ दिनों तक सब कुछ अच्छा चला। बच्चे हुए। धीरे धीरे आर्थिक संकट बढ़ने लगा। बेगम के पति की आय पर्याप्त नहीं थी। बेगम की चिंता परिवार और बच्चों को लेकर बढ़ती गई। मन में कुछ काम करने की इच्छा बढ़ती गई।

mothers day apsari

शुरू किया सिलाई का काम

अप्सरी ने बहुत जद्दोजहद के बाद सिलाई का काम करना शुरू किया। लेकिन इससे भी कुछ खास कमाई नहीं हुई। अप्सरी का संकट कम नहीं हुआ। चिंताएं और बढ़ हैं।

नहीं हारी हिम्मत

संघर्ष के दौरान ही कोरोना काल आ गया। एक बार तो अप्सरी ने हिम्मत छोड़ दी। निराश हुई। लेकिन उसने खुद को समझाया। बच्चों को देखा और फिर हौसलों को उड़ान दी। उसने आपदा को अवसर में बदला।


शुरू किया नया काम

सिलाई के बाद अप्सरी ने कोरोना काल में मूंगफली बेचने का काम शुरू किया। वह बताती हैं कि काम अच्छा चल गया। मूंगफली की अच्छी बिक्री के बाद कुछ पैसे इकट्ठे हो गए।

मिठाई डिब्बे बनाने का शुरू किया काम

इसी बीच अप्सरी की निगाह मिठाई के डिब्बों पर गई। उसने सोचा अगर इसका काम शुरू किया जाए तो अच्छी आय होगी। संसाधन का अभाव था। कोई आइडिया नहीं था। काम कैसे होगा इसकी भी कोई जानकारी नहीं थी। मिठाई के डिब्बे पर महिला उद्यमी संगीता पांडेय का नंबर मिला। उनसे बात की और काम मिल
गया।


मेरे लिए हैं मां समान

अप्सरी बेगम कहती हैं संगीता पांडेय मेरे लिए ' मां ' हैं। उन्होंने मेरे लिए जो किया एक मां बाप ही बेटों के लिए करते हैं। उन्होंने मुझे एक बेटी की तरह अपनाया और रोजगार दिया।

चार साल में ही शुरू कर दिया खुद का काम

अप्सरी कहती हैं संगीता जी के यहां चार साल काम करने के बाद खुद अपना काम शुरू कर दिया। मिठाई के डिब्बे घर ही
बनाने लगी।


दिया कई को रोजगार

अप्सरी आज खुद तो आत्मनिर्भर हैं ही कई महिलाओं को रोजगार दे चुकी हैं। यह महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का काम कर रहीं है।


पति और देवर को ऐसे दिया रोजगार

अप्सरी खुद तो आत्मनिर्भर बनी ही अपने पति और देवर को भी आत्मनिर्भर बनाया। उन्होंने दोनों को ई रिक्शा खरीद कर दिया है जिससे दोनों अच्छी कमाई कर आत्मनिर्भर बन चुके हैं।

ऐसे संवार रही बच्चों का भविष्य

अप्सरी जिसने बच्चों के लिए ही अपने संघर्ष की शुरुआत की आज बुलंदियों पर है। बच्चों को शहर के टॉप स्कूल में शिक्षा दे रहीं है। उनका उद्देश्य बच्चों को अधिकारी बनाने का है।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+