मनीष गुप्ता हत्याकांड: केस ट्रांसफर के 24 घंटों के अंदर गोरखपुर पहुंची SIT टीम, होटल कृष्णा पैलेस में सीन किया

लखनऊ, 03 अक्टूबर: कानपुर के कारोबारी मनीष कुमार गुप्ता की मौत की गुत्थी सुलझाने के लिए कानपुर से एसआईटी (SIT) की टीम शाम 4 बजे गोरखपुर के होटल कृष्णा पैलेस पहुंची। जहां पुलिसकर्मियों पर मनीष को पीट-पीटकर हत्या करने का आरोप लगा है। एसआईटी टीम ने होटल कृष्णा पैलेस में फॉरेंसिक टीम के साथ सीन री-क्रिएट किया और पूरे घटनाक्रम को समझने की कोशिश की। बता दें, इस दौरान एसआईटी की टीम करीब सात घंटे से अधिक होटल में मौजूद रही और बहुत ही बारीकी से साक्ष्यों का संकलन किया।

Manish Gupta: SIT team reached Gorakhpur, recreated the scene in Hotel Krishna Palace

प्राप्त समाचार के मुताबिक, स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) 2 अक्टूबर को होटल कृष्णा के पहले फ्लोर पर स्थित कमरा नंबर 512 में पहुंची। यहां पर एसआईटी और फॉरेंसिक टीम ने केमिकल और अन्य इंस्ट्रूमेंट के साथ एक-एक साक्ष्यों का संकलन किया। टीम ने जहां खून के धब्बों को उभार कर उसकी फोटो और वीडियोग्राफी कराई तो वही फिंगरप्रिंट की तस्वीरों का भी संकलन किया। साथ ही, एसआईटी ने कमरा नंबर 512 में घटना की सीन री-क्रिएशन भी किया। इसकी मदद से एसआईटी ने यह जानने की कोशिश की थी किन परिस्थितियों में मनीष गुप्ता की मौत हुई।

एसआईटी ने सीन री-क्रिएट कर इस बात को बारीकी से समझने की कोशिश की है। बताया जा रहा है कि इसके बाद होटल के कमरे और उस कमरे के बाहर की गैलरी जहां मनीष गुप्ता और उनके दोस्त रुके थे, वहां की भी एसआईटी बारीकी से जांच पड़ताल करेंगी। इतना ही नहीं, एसआईटी ने होटल के मालिक और कर्मचारियों से गहनता के साथ पूछताछ की। ऐसा बताया जा रहा है कि एसआईटी की टीम मानसी हॉस्पिटल भी जा सकती है। जहां सबसे पहले मनीष गुप्ता गंभीर अवस्था में पुलिस लेकर पहुंची थी। इसके अलावा एसआईटी की टीम बीआरडी मेडिकल कॉलेज भी जाएगी और पोस्टमार्टम के दौरान मौजूद रहे पैनल से पूछताछ भी कर सकती है।

जानिए क्या कहा एसआईटी चीफ आनंद कुमारी तिवारी ने
मनीष गुप्ता हत्याकांड में गठित हुई एसआईटी के प्रभारी व एडिशनल पुलिस कमिश्नर आनंद कुमार तिवारी ने यहां मीडिया से बातचीत की। उन्होंने बताया कि घटना स्थल का करीब 5 से 6 घंटे तक फॉरेंसिक जांच व निरीक्षण किया गया। जिस कमरे में मनीष ठहरे थे, उस कमरे के अंदर से लेकर बाहर, लिफ्ट और सीढ़ियों पर जहां कहीं भी जरूरी लगा, नेचर आफ केस के मुताबिक जांच किया गया। यह जांच अभी आगे भी जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि हमारी कोशिश एक निष्पक्ष और पार दर्शिता के साथ बेहतर जांच हो सके।

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