Janmashtami 2022 Pujan Vidhi: इन शुभ मुहूर्तों में इस विधि से करें भगवान श्री कृष्ण की पूजा

भगवान श्रीकृष्ण का जन्म पूरे देश में उत्सव की तरह मनाया जाता है।भाद्र पक्ष चल रहा है।इसी भाद्रपद के महीने में भगवान श्री कृष्ण का जन्म हुआ था। भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार म

गोरखपुर,17 अगस्त।
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी : भगवान श्रीकृष्ण का जन्म पूरे देश में उत्सव की तरह मनाया जाता है।भाद्र पक्ष चल रहा है।इसी भाद्रपद के महीने में भगवान श्री कृष्ण का जन्म हुआ था। भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार मनाया जाता है। कुछ लोगों अभी तक जन्माष्टमी मनाने की तिथि को लेकर संदेह है। इस लेख में तिथि से संबंधित संदेह के साथ ही आप सब किस मुहूर्त एंव योग में किस विधि से पूजा करें,यह इसका भी उल्लेख है।

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    जन्माष्टमी पर शुभ मुहूर्त और योग
    ज्योतिषाचार्य मनीष मोहन बताते हैं कि जन्माष्टमी का पर्व अष्टमी तिथि 19 अगस्त को है।इसी दिन प्रात:काल स्नान ध्यान करके इसी दिन व्रत रहना सर्वोत्तम होगा।ऋषिकेश पंचाग जिसे उत्तर भारत में माना जाता है उसके अनुसार भी 19 को व्रत रखना फलदायी है।महासिद्ध रात्रि काल 18 अगस्त की मध्यरात्रि में है जो पूजा के लिए सर्वोत्तम समय है।धनिया व घी का भोग जरुर लगावे।वैष्णव में कुछ सम्प्रदाय सूर्योदय के समय रोहिणी नक्षत्र को प्रधानता देते हैं। रोहिणी नक्षत्र 20 अगस्त को भोर में 4:58 बजे से प्रारंभ हो रहा है। इसलिए वे कृष्ण जन्माष्टमी 20 अगस्त को मनाएंगे।

    अभिजीत मुहूर्त- 18 अगस्त को 12 बजकर 05 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 56 मिनट तक
    वृद्धि योग- 17 अगस्त को शाम 08 बजकर 56 मिनट से लेकर 18 अगस्त को शाम 08 बजकर 41 मिनट तक.
    धुव्र योग- 18 अगस्त को शाम 08 बजकर 41 मिनट से लेकर 19 अगस्त को शाम 08 बजकर 59 मिनट तक

    जन्माष्टमी की पूजन विधि

    ज्योतिषाचार्य पंडित कपिलाचार्य बताते हैं कि इस दिन भगवान श्री कृष्ण की विधि विधान से पूजा अर्चना करनी चाहिए। श्रीकृष्ण का श्रृंगार करें और उन्हें अष्टगंध चन्दन, अक्षत और रोली का तिलक लगाएं. इसके बाद माखन मिश्री का भोग लगाएं और अन्य सामग्री अर्पित करें।विसर्जन के लिए हाथ में फूल और चावल लेकर चौकी पर छोड़ें और सच्चे मन से ईश्वर की आराधना करें। ध्यान रखें की इस पूजा में काले या सफेद रंग की चीजों का प्रयोग न करें।

    राशि के अनुसार इन मंत्रों का करें जाप
    ज्योतिष गुरु कुमार अमित बताते हैं कि जन्माष्टमी के दिन पूजा-अर्चना का अपना विशेष महत्व होता है। भिन्न-भिन्न राशि के लोग अलग-अलग मंत्रों का जाप कर जीवन में सुख और समृद्धि पा सकते हैं।बारह राशि के जातकों के लिए य
    मेष : ॐ कमलनाथाय नमः
    वृष : श्रीकृष्ण अष्टाक का पाठ या ॐ परमात्मने नमः
    मिथुन : ॐ गोविंदाय नमः या ॐ हरि नमः
    कर्क : राधाष्टक का पाठ या
    सिंह : ॐ कोटि सूर्य समप्रभाय नमः या ॐ श्रीधर नमः
    कन्या : ॐ देवकीनंदाय नमः
    तुला : ॐ लीलाधराय नमः
    वृश्चिक : ॐ वराह नमः
    धनु : ॐ जगतगुरुवे नमः या
    मकर : ॐ अजिता नमः
    कुम्भ : ॐ दयानिधाय नमः
    मीन : ॐ वत्सलाय नमः या ॐ नमो भगवते वासुदेवाय

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