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गोरखपुर अपहरण-हत्याकांड: बलराम के पिता ने 58 लाख में बेची थी जमीन, लालच में करीबी ने ही बनाया था प्लान

गोरखपुर। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में 14 साल के बच्‍चे की बेरहमी ने हत्‍या किसी और ने नहीं बल्कि उसके घर के करीबी ने ही की थी। जमीन बेचने पर बच्चे के उसके पिता को मिले रुपए को पाने की चाहत में बलराम का अपहरण किया गया था। इसके बाद एक करोड़ रुपए की फिरौती मांगी गई। बलराम के पिता के दोस्‍त के बेटे ने मिलकर उसके अपहरण और फिरौती का प्‍लान बनाया और उसे 7 अन्‍य दोस्‍तों के साथ मिलकर अंजाम दे दिया। पुलिस ने इस मामले पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर घटना का खुलासा सोमवार को 28 घंटे में ही कर दिया। पुलिस ने चार और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। एक अन्‍य की तलाश है।

26 जुलाई को हुआ था बलराम का अपहरण

26 जुलाई को हुआ था बलराम का अपहरण

एसपी नार्थ अरविंद पांडेय ने बताया कि रविवार की दोपहर 12 से एक बजे के बीच 14 साल के बलराम के अपहरण की वारदात को अंजाम दिया गया। इस घटना में शामिल पिपराइच के लालगंज के रहने वाले 10-10 हजार रुपए के ईनामी नितिन चौहान उर्फ मुन्ना और पिपराइच के बंगला छत्रधारी के रहने वाले अजय चौहान को गिरफ्तार किया है। इनके दो अन्‍य साथियों पिपराइच के मीरगंज के रहने वाले अभिषेक और पंडित टोला के रहने वाले शिवा कुमार को भी गिरफ्तार किया गया है। इसके पहले पुलिस ने इस मामले में सिम खरीदने वाले दयाराम, फर्जी सिम बेचने वाले रिंकू गुप्‍ता और नितेश पासवान, अजय गुप्‍ता और निखिल भारती को 28 घंटे के अंदर गिरफ्तार कर लिया था।

बलराम के पिता ने 58 लाख रुपए में बेची थी जमीन

बलराम के पिता ने 58 लाख रुपए में बेची थी जमीन


एसपी नार्थ ने बताया कि गिरफ्तार किए गए अजय चौहान के पिता का मृतक बलराम के पिता महाजन गुप्‍ता से नजदीकी संबंध रहा है। यही वजह है कि महाजन के परिवार के बारे में उसे अच्‍छी जानकारी रही है। इसके अलावा आरोपी निखिल भारती महाजन गुप्‍ता के गांव का ही रहने वाला है। चार बहनों के बीच इकलौत बेटा होने की वजह से महाजन ने बलराम को खूब लाड़-प्‍यार से बड़ा किया। ये बात अजय चौहान को पता रही है कि महाजन ने हाल ही में एक जमीन 58 लाख रुपए में बेची है। यही वजह है कि उनसे फिरौती में एक करोड़ रुपए की मांग की गई।

अपहरण के बाद बलराम की गला घोंटकर की हत्या

अपहरण के बाद बलराम की गला घोंटकर की हत्या

इसी वजह से आरोपियों ने बलराम के अपहरण का मास्‍टर प्‍लान तैयार किया और उसे लेकर गोरखपुर के खोराबार इलाके के विनोद वन में ले गए। वहां पर उन्‍होंने उसे कोल्‍डड्रिंक में नींद की गोली डालकर उसे पिला दिया गया, लेकिन उल्‍टी हो जाने की वजह से बलराम बेहोश नहीं हुआ। इसके बाद उसे दयानंद के कब्‍जे वाले पुराने मकान में रखा गया। उसके बाद अजय गुप्‍ता की दुकान में रखा गया। अपहृत बलराम के चिल्‍लाने की वजह से उसके बाद उसे बेहोशी का इंजेक्‍शन आरोपी अजय चौहान ने दे दिया। इसके बाद उसकी गला घोंट कर हत्‍या कर दी गई और शव को बोरे में भरकर जंगल तिनकोनिया नंबर दो के पास केवटलिया नाले में डाल दिया गया। हत्‍या की घटना को अंजाम देने में कुल 8 आरोपियों की संलिप्‍तता पाई गई है। इनमें से पूर्व में दयानन्‍द और अजय गुप्‍ता की मुख्‍य भूमिका रही है। दो आरोपियों नितेश पासवपन और रिंकू गुप्‍ता की भूमिका फर्जी नाम और पते पर सिम आरोपियों को उपलब्‍ध कराने में मिली है।

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