Influenza A H3N2: इंंफ्लुएंजा के प्रसार को इस तरीके से रोकेगा गोरखपुर एम्स
Influenza A H3N2 के पूर्वांचल में प्रसार की निगरानी के लिए गोरखपुर एम्स ने खास तैयारी की है। इसके तहत इसके लक्षण वाले मरीजों का पूरा डाटा तैयार किया जाएगा।

Gorakhpur News: इंफ्लूएंजा एच3एन2 के मामले देश के कुछ हिस्सों में मिलने के बाद केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी एम्स को नई जिम्मेदारी सौंपी हैं। इसी क्रम में गोरखपुर एम्स ने इंफ्लूएंजा के प्रसार को रोकने के लिए खास तैयारी की है। इंफ्लूएंजा के लक्षण वाले मरीजों की निगरानी शुरु कर दी गयी है। इसमें पूरे पूर्वांचल के मरीजों पर नजर रखी जा रही है। संदिग्ध मरीजों की जांच की जाएगी एंव लोगों को बचाव के उपाय बताए जाएंगे।
गोरखपुर एम्स की निदेशक डॉक्टर सुरेखा किशोर ने बताया कि इंफ्लूएंजा के लक्षण वाले मरीजों की विशेष निगरानी की जा रही है। इसके साथ ही सर्तकता व जागरुकता का काम भी किया जा रहा है। ओपीडी में आने वाले मरीजों का ब्योरा भी जुटाया जाएगा। जरुरत पड़ने में संदिग्ध मरीजोंं के सैंपल की जांच भी कराई जाएगी। सैम्पल जांच के लिए एम्स आरएमआरसी से मदद लेगा।

सतर्कता और जागरुकता अभियान डॉक्टर सुरेखा किशोर ने बताया कि एन्फ्लुएंजा के नए स्ट्रेन एच 3एन2 को ध्यान में रखते हुए क्षेत्र के इंफ्लुएंजा के प्रसार पर नजर रखने और जरुरत पड़ने पर निरोधात्मक कार्यवाही करने का कार्य किया जाएगा। बीमारी का प्रसार पूर्वी यूपी में हुआ तो एम्स के डॉक्टरों की टीम सतर्कता और जागरुकता अभियान संचालित करेंगी। इसके लिए समुदाय के चिकित्सकों को ट्रेनिंग दी जाएगी। पैरामेडिक स्टॉफ को प्रशिक्षित किया जाएगा।
निगरानी के लिए मरीजों का ब्योरा जुटाया जाएगा डॉक्टर सुरेखा किशोर ने बताया कि ओपीडी में तमाम प्रकार की बीमारियों के मरीज आते हैं। ये मरीज दूर-दूर के क्षेत्रों से आते हैं। इनमें इंफ्लुएंजा के मरीज भी शामिल हैं। यहां से निगरानी के लिए मरीजों का ब्योरा जुटाया जाएगा। इसके साथ ही मरीजों के इलाज की उचित व्यवस्था की जाएगी।

एच-3एन-2 वायरस क्या है
एच-3एन-2 एक वायरल संक्रमण है। इंफ्लूएंजा स्वाइन फ्लू वायरस या एच-1एन-1 के दो एंटीजेनिक रूप हैं। एच एंटीजन और एन एंटीजन। एच-1 की तरह ही एच-3 भी एक वैरिएंट है और एन-1, एन-2 की तरह ही एक वैरिएंट है। इसमें सांस लेने में तकलीफ होती है। नाक से पानी आना, तेज बुखार, लगातार खांसी (पहले गीली फिर सूखी), छाती में रक्त संचय, मतली, उल्टी इसके लक्षण हैं।
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