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AIIMS Gorakhpur: भारत की अब तक की सबसे बड़ी रेबीज़ स्टडी से मिले वैश्विक स्तर पर सराहे गए नतीजे

AIIMS Gorakhpur Latest News Hindi Uttar Pradesh: गोरखपुर के प्रोफेसर हीरा लाल भल्ला ने बहु-केंद्रित (मल्टीसेंटर) शोध दल RAB-04 स्टडी ग्रुप के सदस्य के रूप में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। उनका अध्ययन The Lancet जैसी प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय चिकित्सा पत्रिका में प्रकाशित हुआ है और साथ ही इस पर The Lancet ने विशेष वैश्विक टिप्पणी (commentary) भी प्रकाशित की है, जिसमें इस शोध को "rabies PEP (post-exposure prophylaxis) के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण प्रगति" बताया गया है।

स्टडी की प्रमुख बातें
• अध्ययन का प्रकार: फेज 4, ओपन-लेबल, रैंडमाइज्ड, एक्टिव-कंट्रोल्ड
• स्थान: भारत के 15 टर्शियरी केयर हॉस्पिटल
• कुल प्रतिभागी: 3994 मरीज (कैटेगरी 3 बाइट - उच्च जोखिम)
• स्टडी ड्रग्स: RmAb (Rabisheeld®) बनाम ERIG (Equine Rabies Immunoglobulin)
o ERIG: किफ़ायती और व्यापक उपयोग, लेकिन घोड़ों से प्राप्त, कुछ मरीजों में एलर्जिक रिएक्शन का खतरा।
o Monoclonal Antibodies (RmAb - Rabisheeld®): आधुनिक बायोटेक्नोलॉजी से तैयार - रक्त-जनित रोगों का खतरा नहींI बड़े पैमाने पर उत्पादन संभव, आपूर्ति में कोई कमी नहीं
• RmAb (Rabisheeld®) बनाम ERIG: दोनों समूहों में 1 वर्ष की फॉलो-अप अवधि में एक भी रेबीज़ का मामला नहीं।
• सुरक्षा: कोई गंभीर दवा-संबंधी प्रतिकूल प्रभाव नहीं।
• इम्युनोजेनिसिटी: Day 14 पर 98% (RmAb) बनाम 96% (ERIG) और Day 365 पर दोनों में 98% सीरो-रिस्पॉन्स।
• वैज्ञानिक महत्व - RmAb एंटीजनिक साइट III को लक्षित करता है, जो वायरस के फैलाव में अहम है।
• भविष्य की दिशा - शुरुआती डायग्नोस्टिक टूल्स और जीनोमिक निगरानी से और बेहतर परिणाम मिल सकते हैं।

aiims

कमेन्ट्री में मुख्य बिंदु (The Lancet, 9 अगस्त 2025)
• भारत में किए गए एक बड़े चरण-4 अध्ययन में पाया गया कि सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया द्वारा विकसित मानव रेबीज़ मोनोक्लोनल एंटीबॉडी (RmAb), जब रेबीज़ वैक्सीन के साथ दी गई, तो यह गंभीर (श्रेणी-3) रेबीज़ एक्सपोज़र के बाद दिए जाने वाले पारंपरिक इक्वाइन रेबीज़ इम्युनोग्लोब्युलिन जितनी ही सुरक्षित और प्रभावी है।लगभग 4,000 प्रतिभागियों को शामिल करने वाले इस अध्ययन में दवा से संबंधित कोई गंभीर प्रतिकूल घटना नहीं हुई और दोनों समूहों में एक साल तक एंटीबॉडी प्रतिक्रिया दर समान और ऊँची रही।
• RmAb रेबीज़ वायरस के ग्लाइकोप्रोटीन के एक संरक्षित हिस्से को लक्ष्य बनाकर भारत और पड़ोसी देशों में आम रूप से पाए जाने वाले स्ट्रेनों को प्रभावी ढंग से निष्क्रिय करता है। इसका उपयोग उन क्षेत्रों में रेबीज़ रोकथाम की उपलब्धता बढ़ा सकता है, जहाँ पारंपरिक इम्युनोग्लोब्युलिन सीमित मात्रा में उपलब्ध है, और यह WHO की मोनोक्लोनल एंटीबॉडी-आधारित PEP की सिफारिश का समर्थन करता है।
• WHO की सिफारिशों के अनुरूप - केवल घाव के स्थान पर ही rabies immune products का उपयोग कर संसाधन बचाना और प्रभावशीलता बनाए रखना। यह तरीका रेबीज़ नियंत्रण के लिए एक आशाजनक और संसाधन-कुशल विकल्प प्रदान करता है।

रेबीज़: जानें और बचें
रेबीज़ एक जानलेवा बीमारी है, लेकिन समय पर इलाज से 100% बचाव संभव है।
नई खोज Rabisheeld®:
• खून से नहीं बनता - इसलिए अधिक सुरक्षित
• आसानी से बड़े पैमाने पर उत्पादन संभव
• लंबे समय तक प्रभावी सुरक्षा प्रदान करता है

AIIMS गोरखपुर के कार्यकारी निदेशक का वक्तव्य
"यह उपलब्धि हमारे संकाय की प्रतिबद्धता, विशेषज्ञता और टीम भावना का उत्कृष्ट उदाहरण है। प्रो. भल्ला का योगदान न केवल AIIMS गोरखपुर बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय है। यह शोध वैश्विक रेबीज़ रोकथाम रणनीति को मजबूत करेगा।"

डॉ. हीरा लाल भल्ला का वक्तव्य
"इस अध्ययन का हिस्सा बनना मेरे लिए गर्व की बात है। यह कार्य केवल एक वैज्ञानिक उपलब्धि नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य के प्रति हमारी सामूहिक प्रतिबद्धता का प्रमाण है। आशा है कि यह शोध रेबीज़ उन्मूलन की वैश्विक मुहिम में महत्वपूर्ण योगदान देगा।"
अगर जानवर काटे या खरोंचे तो तुरंत करें:
⿡ साबुन और बहते पानी से 15 मिनट तक धोएं
⿢ तुरंत नज़दीकी अस्पताल जाएं - वैक्सीन और Rabisheeld®/इम्युनोग्लोब्युलिन लें
⿣ देर न करें - हर घंटा मायने रखता है

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