Navratri 2022: काली मंदिर की मान्यता है बेहद खास,माता का मुखड़ा धरती चीर कर निकला था ऊपर
गोरखपुर जिले के गोलघर स्थित मां काली का मंदिर सैंकड़ों वर्षो से भक्तों के आस्था का प्रमुख केंद्र है। लोगों के लिए मां काली का मंदिर एक विशेष महत्व रखता है। इस मंदिर की खास बात यह है कि माता का मुखड़ा धरती चीर कर स्वंय ऊ
गोरखपुर,27 सितंबर: गोरखपुर जिले के गोलघर स्थित मां काली का मंदिर सैंकड़ों वर्षो से भक्तों के आस्था का प्रमुख केंद्र है। लोगों के लिए मां काली का मंदिर एक विशेष महत्व रखता है। इस मंदिर की खास बात यह है कि माता का मुखड़ा धरती चीर कर स्वंय ऊपर आया था।मां की ख्याति दूर-दूर तक है।मां भक्तों की सभी मुरादें पूरी करती हैं। यह काली मंदिर शहर के मुख्य बाजार गोलघर में स्थित है।रेलवे स्टेशन से बेहद नजदीक यह मंदिर दूर-दूर से आने वाले भक्तों की आस्था का केंद्र है। नवरात्र की करें तो मंदिर के आसपास मेले जैसा माहौल रहता है। पूजन सामग्री और प्रसाद की दर्जनों दुकानें यहां सजती हैं। भक्त दूर-दूर से आकर माता के दर्शन कर विधि-विधान से पूजा अर्चना करते हैं। सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।

काली मंदिर का इतिहास
वर्षों पूर्व गोलघर का यह पूरा क्षेत्र जंगल था, उसी जंगल में एक स्थान पर माता का मुखड़ा धरती चीर कर ऊपर निकला। जब धरती से मां का मुखड़ा निकलने की बात आस पास के लोगों में फैली तो यहां भीड़ जुटनी शुरू हो गई और प्रतिमा का पूजन-अर्चन शुरू हो गया।

स्वंयभू मां काली
श्रद्धालुओं की आस्था देखकर जंगीलाल जायसवाल ने विक्रम संवत 2025 में वहां मंदिर का निर्माण कराया। तभी से प्रतिदिन मंदिर में पूजा होने लगी। पहले वहां जमीन से निकली प्रतिमा थी। बाद में वहां काली मां की एक बड़ी प्रतिमा लगवाई गई। प्रतिमा के ठीक सामने नीचे स्वयंभू काली मां का मुखड़ा आज भी वैसा ही है, जैसा जमीन से निकला था।

भक्तों की हर मनोकामना पूरी करती हैं मां काली
काली मंदिर के पुजारी श्रवण सैनी का कहना है कि ऐसी मान्यता है कि गोलघर की काली माता बहुत सिद्ध हैं। ऐसा कहा जाता है कि सुबह, दोपहर और शाम में काली मां की प्रतिमा के स्वरूप में बदलाव होता है।
यही कारण है कि उनसे सच्चे मन से मांगी गई हर मनोकामना पूरी होती है। उन्होंने बताया कि मंदिर में भीड़ तो हमेशा रहती है, लेकिन नवरात्र में यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रहती है।












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