Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

Gita Press : क्या था गीता प्रेस और महात्मा गांधी का रिश्ता? क्यों नहीं छपते 'कल्याण' में विज्ञापन?

Gita Press, Kalyan and Mahatma Gandhi: गोरखपुर का 'गीता प्रेस' महज एक प्रेस नहीं बल्कि भारत के गौरवशाली इतिहास का गवाह भी रहा है। साल 1923 में स्थापित हुआ ये प्रेस आज शताब्दी वर्ष समापन समारोह मना रहा है। इस समारोह में शामिल होने के लिए पीएम मोदी भी 7 जुलाई को गोरखपुर आने वाले हैं।

 Gita Press

इन सौ सालों में इस प्रेस ने हिंदू धर्म के प्रचार -प्रसार में अनुपम योगदान दिया है लेकिन प्रगतिशील युग और बदलते वक्त में भी इसने अपने मूल्यों और सिद्धांतों से बिल्कुल भी समझौता नहीं किया। ना तो इसकी किताबें महंगी हुई और ना ही इसकी सबसे ज्यादा लोकप्रिय किताब 'कल्याण' में एक भी विज्ञापन छपा। जानते हैं क्यों?

प्रेस की स्थापना साल 1923 में हुई थी

इसके पीछे कारण हैं हमारे 'राष्ट्रपिता महात्मा गांधी', दरअसल इस प्रेस की स्थापना साल 1923 में जयदयाल गोयनका और हनुमान प्रसाद पोद्दार नामक दो व्यपारियों ने मिलकर की थी।

पोद्दार से बापू ने किया था निवेदन

हनुमान प्रसाद पोद्दार के महात्मा गांधी से काफी घनिष्ठ संबंध थे। उन्होंने ही इस प्रेस से 'कल्याण' का पहला संस्करण प्रकाशित किया था। उनकी इच्छा थी पहले अंक में ही महात्मा गांधी का लेख छपे और इसलिए उन्होंने इस बारे में बापू से आग्रह किया, जिस पर गांधी जी ने उनसे 'हां' तो कर दी लेकिन उन्होंने निवेदन किया कि 'कल्याण या गीताप्रेस से प्रकाशित होने वाली किसी भी किताब पर कोई विज्ञापन ना छापा जाए।'

पोद्दार ने निभाया ईमानदारी से अपना वादा

हनुमान प्रसाद पोद्दार ने बड़ी ही विनम्रता से उनके इस निवेदन को स्वीकार कर लिया और इसके बाद 'कल्याण' का पहला अंक महात्मा गांधी की लेख के साथ ही प्रकाशित हुआ और इसके बाद इस पत्रिका से देश के गणमान्य लोग जैसे लाल बहादुर शास्त्री, मदन मोहन मालवीय भी जुड़ गए।

इसलिए 'कल्याण' में नहीं छपते विज्ञापन

तब से लेकर आज तक 'कल्याण' में एक भी विज्ञापन नहीं छपा, आज भी गीता प्रेस ने अपना वादा नहीं तोड़ा। इसी वजह से इस प्रेस का भरोसा लोगों में पूरी तरह से बना हुआ है, जो कि इसकी असली कमाई है।

लाखों की संख्या में बिकती है 'कल्याण'

मालूम हो कि 'रामचरित मानस', 'भागवत गीाता' जैसी लोकप्रिय धार्मिक किताबों को छापने वाले इस प्रेस की मासिक पत्रिका 'कल्याण' के आज भी लाखों की संख्या में पाठक हैं और बीबीसी की खबर के मुताबिक इसकी आज भी दो लाख से अधिक प्रतियां बिकती है। गौरतलब है कि गीता प्रेस को साल 2021 का 'गांधी शांति पुरस्कार' से नवाजा गया है।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+