Gorakhpur News: DDU University और पोखरा विश्वविद्यालय ने किया एमओयू पर हस्ताक्षर
Gorakhpur News: दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय ने पोखरा विश्वविद्यालय, नेपाल के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर कर अंतरराष्ट्रीय सहयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है।
दोनों देशों के बीच शैक्षणिक अंतर को कम करने के उद्देश्य से ऐतिहासिक समझौते को आज गोरखपुर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर पूनम टंडन की पोखरा विश्वविद्यालय की यात्रा के दौरान औपचारिक रूप दिया गया।
एमओयू हस्ताक्षर समारोह के दौरान पोखरा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. प्रेम नारायण आर्यल ने गोरखपुर विश्वविद्यालय के साथ अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देने में गहरी रुचि व्यक्त की। पोखरा विश्वविद्यालय के इंटरनेशनल सेल के निदेशक प्रोफेसर उमेश यादव ने गोरखपुर विश्वविद्यालय के प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया तथा पोखरा विश्वविद्यालय का परिचय दिया। पोखरा विश्वविद्यालय में 58 संबद्ध महाविद्यालय हैं तथा प्रबंधन, इंजीनियरिंग और स्वास्थ्य विज्ञान सहित 65 कार्यक्रमों में 35,000 से अधिक छात्र अध्ययन कर रहे हैं।

ट्विन, डूअल तथा जॉइंट डिग्री कार्यक्रमों की पेशकश
कुलपति प्रो.पूनम टंडन ने अपने संबोधन में दोनों विश्वविद्यालयों के साझा भौगोलिक अभिविन्यास और अकादमिक अनुसंधान के हितों पर प्रकाश डाला। उन्होंने इनोवेशन तथा इन्क्यूबेशन के प्रति संस्थान की प्रतिबद्धता पर जोर देते हुए, ट्विन, डूअल तथा जॉइंट डिग्री कार्यक्रमों की पेशकश की।
दोनों विश्वविद्यालयों ने विश्वविद्यालय पाठ्यक्रम के अनुसार छात्र इंटर्नशिप के साथ-साथ छात्र और फैकल्टी एक्सचेंज कार्यक्रमों के माध्यम से शैक्षणिक अंतर को कम करने का संकल्प लिया।
गोरखपुर विश्वविद्यालय के अंतर्राष्ट्रीय सेल के निदेशक डॉ. रामवंत गुप्ता ने भारत सरकार की नई शिक्षा नीति के अनुरूप विश्वविद्यालय के शैक्षणिक और अनुसंधान मूल्यों का परिचय दिया।
समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर के दौरान पोखरा विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों के डीन और गोरखपुर विश्वविद्यालय के रैंकिंग सेल के निदेशक प्रोफेसर मनीष कुमार श्रीवास्तव और जैव प्रौद्योगिकी विभाग के प्रमुख और अनुसंधान और विकास निदेशक प्रोफेसर राजर्षि कुमार गौड़ ने सहभागिता की।
कुलपति प्रो टंडन ने कहा कि यह सहयोग गोरखपुर विश्वविद्यालय और पोखरा विश्वविद्यालय के बीच वैश्विक संबंधों को बढ़ावा देने, ज्ञान साझा करने और अकादमिक उत्कृष्टता को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा।












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