गोरखपुर न्यूज: जानिए चिकित्सा की इस पद्धति के बारे में जहां बिना दवा के होता है रोगों का इलाज
हम बात कर रहे हैं गोरखपुर के मेडिकल कॉलेज रोड स्थित आरोग्य मंदिर की।आरोग्य मंदिर एक ऐसा मंदिर है जहां मरीजों की सेवा प्राकृतिक चिकित्सा उपलब्ध कराते हुए की जाती है।पूरे पूर्वांचल का यह अपने आप में अनोखा चिकित्सालय है जहा
गोरखपुर,23अगस्त: आप सभी लोगों ने चिकित्सा की तमाम पद्धतियों के बारे में सुना होगा।उस पद्धति से उपचार भी किया होगा।लेकिन आज हम आप को जिस पद्धति के बारे में बताने जा रहे हैं उसमें बिना किसी दवा के मरीजों का इलाज किया जाता है।इस पद्धति का शरीर पर कोई नकारात्मक प्रभाव भी नहीं पड़ता है।वर्तमान समय में यह इतना लोकप्रिय हो रहा है कि देश ही नहीं विदेश के लोग भी इस पद्धति से उपचार को प्राथमिकता दे रहे हैं।आइए जानते हैं कहां है यह चिकित्सालय और कैसे कर रहा मरीजों का उपचार।
हम बात कर रहे हैं गोरखपुर के मेडिकल कॉलेज रोड स्थित आरोग्य मंदिर की।आरोग्य मंदिर एक ऐसा मंदिर है जहां मरीजों की सेवा प्राकृतिक चिकित्सा उपलब्ध कराते हुए की जाती है।पूरे पूर्वांचल का यह अपने आप में अनोखा चिकित्सालय है जहां प्राकृतिक पद्धति का प्रयोग कर मरीजों को सही किया जाता है।

जानिए चिकित्सालय के बारे में
यह विश्वस्तरीय प्राकृतिक चिकित्सा का वह केंद्र है, जहां बिना औषधि बीमारियों को मात देने की कोशिश की जाती है। 79 वर्षों से यह केंद्र लोगों की सेवा करता हुआ विश्व मंच पर अपना परचम फहरा रहा है। इतना ही नहीं विदेशों में प्राकृतिक चिकित्सा केंद्रों की स्थापना में यह केंद्र सहयोग कर रहा है। यहां किसी भी प्रकार की बीमारी को धूप, मिट्टी, पानी, हवा, आहार-विहार व परहेज से दूर किया जाता है। अब तक यहां से एक लाख से ज्यादा रोगी बिना दवा के रोग से निजात पा चुके हैं और 2700 से अधिक लोग प्राकृतिक चिकित्सा का प्रशिक्षण लेकर स्वयं व समाज के लोगों को निरोग होने का मंत्र दे रहे हैं। प्राकृतिक वातावरण से सुसज्जित आरोग्य मंदिर का कुल परिसर छह एकड़ में फैला हुआ है। अभी तक इस केंद्र से प्राकृतिक चिकित्सा से संबंधित 26 पुस्तकों का प्रकाशन हो चुका है। 1947 से यहां से मासिक पत्रिका आरोग्य का प्रकाशन किया जा रहा है। इसके पाठक देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी हैं। वर्तमान में हर माह इस पत्रिका की 10 हजार प्रतियां प्रकाशित होती हैं।
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आरोग्य मंदिर के संस्थापक विट्ठल दास मोदी है।उन्होंने 1940 में किराये के मकान में इसकी शुरआत की थी। 1962 में आरोग्य मंदिर का अपना भवन बना और तभी से यह प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र आम बाजार, मेडिकल कॉलेज रोड स्थित अपने भवन में संचालित हो रहा है।स्व. विट्ठल दास मोदी के पुत्र और वर्तमान में आरोग्य मंदिर के निदेशक डॉ. विमल मोदी पिता से मिली विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं। वह न केवल प्राकृतिक चिकित्सालय का संरक्षण कर रहे हैं बल्कि उसकी ख्याति को आगे बढ़ाने का कार्य भी कर रहे हैं।
ऐसे होता है आरोग्य मंदिर में इलाज
मरीजों का इलाज यहां प्राकृतिक रुप से ही किया जाता है।जिसमेंआहार नियंत्रण, मालिश, भाप स्नान, धूप स्नान, जल चिकित्सा, उपवास, मिट्टी पट्टी, गीली पट्टी, कसरत, योगासन, सुबह-शाम टहलना आदि शामिल हैं।
इन बीमारियों का होता है इलाज
आरोग्य मंदिर में दमा, कब्जियत, मधुमेह, कोलाइटिस, अल्सर, अम्ल पित्त, ब्लडप्रेशर, अर्थराइटिस, एक्जिमा, मोटापा व एलर्जी आदि बीमारियों का इलाज होता है।
मिट्टी लेप का है एशियन रिकॉर्ड
एशिया बुक ऑफ रिकार्ड की देखरेख में 18 नवंबर 2019 में आरोग्य मंदिर में 508 लोगों को सर्वांग मिट्टी लेप लगाकर कर नया रिकार्ड बनाया गया। नया एशिया रिकॉर्ड बनाया। इसके पूर्व यह रिकॉर्ड दिल्ली के नाम था।
विदेशी भी आते हैं उपचार के लिए
प्राकृतिक चिकित्सालय की लोकप्रियता देश ही विदेशों तक भी है।नेपाल,बाग्लांदेश सहित कई अन्य देशों के लोग यहां उपचार करा चुके हैँ।देश के कोने-कोने से भी मरीज यहां आते हैं।












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