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नेता के खिलाफ मानहानिकारक वीडियो को मिले लाखों व्यूज, गूगल भरेगा जुर्माना

कैनबरा, 06 जून। मामला ऑस्ट्रेलिया के न्यू साउथ वेल्स प्रांत के पूर्व उप मुख्यमंत्री जॉन बारिलारो के खिलाफ 2020 में यूट्यूब पर डाले गए दो वीडियो से जुड़ा है. लगभग 8,00,000 बार देखे गए ये वीडियो यूट्यूबर जॉर्डन शैंक्स ने डाले थे जिसमें उन्होंने बारिलारो को बिना किसी सबूत के 'भ्रष्ट' बताया था और उन पर कई आरोप लगाए थे.

अब अदालत ने दोनों वीडियो को "नस्लीय, मानहानिकारक और अत्याचारपूर्ण" बताया है और कहा है कि गूगल द्वारा उन्हें यूट्यूब से हटाने से मना करने की वजह से बारिलारो को राजनीति ही छोड़नी पड़ी. अदालत ने गूगल की मालिकाना कंपनी एल्फाबेट को बारिलारो को 5,15,000 अमेरिकी डॉलर हर्जाना देने के देने लिए कहा है.

(पढ़ें: ऑस्ट्रेलिया में फेसबुक कॉमेंट के लिए भी हो सकता है मीडिया कंपनियों पर मुकदमा)

मानहानिकारक, नफरती भाषण

अदालत को बताया गया कि शैंक्स ने वीडियो में बारिलारो की इतालवी जड़ों पर हमला करते हुए भी उनके बारे में अपशब्द कहे. जज स्टीव रेयरेस ने इसे "नफरती भाषण" बताया. रेयरेस के मुताबिक वीडियो पोस्ट किए जाने के एक साल बाद बारिलारो ने मानसिक आघात की वजह से राजनीति ही छोड़ दी और इसके लिए "गूगल अपनी जिम्मेदारी से भाग नहीं सकती."

ऑस्ट्रेलिया में ऑनलाइन प्लेटफार्मों की भी उतनी ही कानूनी जिम्मेदारी है जितनी प्रकाशकों की है

शैंक्स के यूट्यूब पर 6,25,000 सब्सक्राइबर हैं और फेसबुक पर 3,46,000 फॉलोवर हैं. पिछले साल तक वो भी इस मामले में लड़ रहे थे लेकिन फिर उन्होंने बारिलारो के साथ एक समझौता कर लिया. उन्होंने दोनों वीडियो को एडिट किया और बारिलारो को 1,00,000 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर हर्जाना भी दिया.

(देखें: क्या इंटरनेट से कुछ मिटा सकते हैं)

अदालत के फैसले के बाद फेसबुक पर एक पोस्ट में शैंक्स में बारिलारो का मजाक उड़ाते हुए लिखा, "तुमने अंत में गूगल से पैसे निकलवा ही लिए...बिना अदालत में सच की परीक्षा हुए." शैंक्स ने बिना सबूत के यह भी लिखा कि बारिलारो ने "हमारे खिलाफ आरोप वापस ले लिए ताकि हम अदालत में गवाही न दे सकें और उसके खिलाफ सबूत पेश न कर सकें."

तकनीकी कंपनियों की जिम्मेदारी

बारिलारो ने अदालत के बाहर पत्रकारों को बताया कि वो "दोषमुक्त" महसूस कर रहे हैं. उन्होंने कहा, "यह कभी भी पैसों के बारे में नहीं था. यह माफी के बारे में और वीडियो को हटाने के बारे में था...गूगल को कदम उठाने के लिए मजबूर करने के लिए अदालत की जरूरत पड़ी."

(पढ़ें: इंटरनेट पर भुलाए जाने के अधिकार के लिए लंबी कानूनी लड़ाई)

इस फैसले से इस सवाल पर फिर से बहस शुरू हो गई है कि तकनीकी कंपनियों के मंचों का इस्तेमाल करने वालों द्वारा की जाने वाली मानहानि के लिए कंपनियां कितनी जिम्मेदार हैं. ऑस्ट्रेलिया उन चंद पश्चिमी देशों में से है जहां ऑनलाइन प्लेटफार्मों की भी उतनी ही कानूनी जिम्मेदारी है जितनी प्रकाशकों की है.

सीके/एए (एपी,रॉयटर्स)

Source: DW

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