गाज़ियाबाद की डासना जेल में मिले 140 कैदी एचआईवी पॉजिटिव, 1700 की क्षमता वाले जेल में 5500 बंदी
भारत एचआईवी/एड्स उन्मूलन की दिशा में लगातार कठिन प्रयास कर रहा है। एड्स नामक इस भयानक बीमारी ने देश की एक बड़ी आबादी को अपने प्रभाव में जकड़ रखा है। एचआईवी से संबंधित मामलों को पूर्ण रूप से ख़त्म किये जाने के प्रयास किये जा रहे हैं। इसी बीच ताज़ा जानकारी के अनुसार यूपी के गाजियाबाद की डासना जेल में 140 बंदियों में एचआईवी की पुष्टि हुई है. इसके अलावा 17 मरीज टीबी के भी मिले हैं। बता दें कि डासना जेल की क्षमता लगभग 1700 बंदियों की है लेकिन जेल में 5500 कैदी बंद है।

140 कैदी पाए गए एचआईवी पॉजिटिव
डासना जेल अधीक्षक आलोक कुमार सिंह ने कहा कि जब भी कोई कैदी जेल आता है तो उसका एचआईवी टेस्ट कराया जाता है। इस बार भी हमने सामान्य प्रक्रिया के चलते यह टेस्ट कराए जिनमे करीब 140 कैदी HIV पॉजिटिव पाए गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यह एक सामान्य प्रक्रिया है, प्रतिदिन मरीजों का चेकअप होता रहता है और आए दिन जांच में एचआईवी पॉजिटिव निकलते रहते है। सभी का इलाज राज्य एड्स कंट्रोल सोसाइटी कर रही है और सभी मरीजों का ओपीडी कार्ड भी बना हुआ है। उनका कहना है कि एचआईवी छूआ छूत की बीमारी नहीं है, यह फैलता नही है, इसलिए सामान्य इनको भी सामान्य बंदियों के साथ रखा जाता है, यही शासन का भी निर्देश है। फिलहाल घबराने की कोई बात नही, यह रूटीन कार्य है, जांच प्रतिदिन होती है। वही टीबी के 17 मरीजों की भी पुष्टि हुई है। इन मरीजों को अलग से आइसोलेशन में रखा गया है।

नशे के इंजेक्शन से फैलता है कैदियों में एचआईवी
एचआईवी एक नाजुक वायरस है जो शरीर के बाहर जीवित नहीं रहता है। यही कारण है कि आप शौचालय सीटों या व्यंजन या बर्तन साझाा करने से एचआईवी से संक्रमित नहीं हो सकते हैं। ठंड या फ्लू की भांति एचआईवी हवा के माध्यम से नहीं फैलता है। एचआईवी शरीर के तरल पदार्थ जैसे लार, पसीना या पेशाव से भी नहीं फैलता है। एचआईवी से पीड़ित किसी व्यक्ति के साथ असुरक्षित यौन संबंध बनाने से एचआईवी फैलता है। इंजेक्शन के लिए अवैध दवाओं को तैयार करने के लिए उपयोग की जाने वाली सुइयों, सिरिंज, कुल्ला पानी या अन्य उपकरण साझा करने से भी संक्रमण फ़ैल सकता है। गर्भावस्थ, जन्म या स्तनपान के दौरान किसी एचआईवी संक्रमित मां से जन्म लेने वाले बच्चे को एचआईवी स्थानांतरित हो सकता है।
गाजियाबाद की डासना जेल में 140 बंदियों के एचआईवी पॉजिटिव आने के पीछे भी जेल अधीक्षक आलोक कुमार सिंह ने यही वजह बताई है कि कैदी इंजेक्शन से नशा करने के आदी होते हैं और वह दुसरे का इस्तेमाल किया हुआ इंजेक्शन दोबारा नशा करने के लिए इस्तेमाल कर लेते हैं, इसलिए उनमें एचआईवी फैलता है।

एचआईवी का मरीज भी जी सकता है आम ज़िंदगी
यद्यपि एड्स एक लाइलाज बीमारी है, फिर भी एड्स प्रभावित व्यक्ति एक सामान्य जीवन जी सकता है। एचआईवी संक्रमित होना जीवन का अंत नहीं हैं क्योंकि एचआईवी संक्रमित व्यक्ति भी सही चिकित्सीय मदद एवं सहयोग से लम्बे समय तक स्वस्थ जीवन जी सकता है। एंटी-रेट्रोवायरल थेरेपी (एआरटी अगर समय से शुरू कर दी जाए तो इस बीमारी के प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इसके फलस्वरूप शरीर की प्रतिरोधक क्षमता फिर से बढ़ जाती है, बीमारी का बढ़ना बंद हो जाता है एवं अन्य अवसरवादी संक्रमणों के फैलने की आशंका भी घट जाती है। इस तरह एंटी-रेट्रोवायरल थेरेपी एड्स के प्रभाव को कम करने में मदद करता है।












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