नयी मलेरिया वैक्सीन को मान्यता देने वाला पहला देश बना घाना

गुरुवार को घाना ने बच्चों के लिए तैयार की गई मलेरिया की वैक्सीन को मान्यता दे दी. ऐसा करने वाला वह दुनिया का पहला देश बन गया है. इस वैक्सीन की सालाना 20 करोड़ खुराक भारत में बनेंगी.

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घाना की सरकार ने गुरुवार को ऑक्सफर्ड यूनिवर्सिटी द्वारा तैयार मलेरिया वैक्सीन को मंजूरी दे दी. अधिकारियों को उम्मीद है कि यह वैक्सीन हर साल हजारों जानें बचा सकेगी. हालांकि वैक्सीन के अंतिम परीक्षण के नतीजे अभी प्रकाशित नहीं हुए हैं और विश्व स्वास्थ्य संगठन के अधिकारी इस वैक्सीन की समीक्षा कर रहे हैं.

ब्रिटेन की ऑक्सफर्ड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों द्वारा विकसित की गई इस वैक्सीन के शुरुआती नतीजे काफी उत्साहजनक आए थे. प्राथमिक परीक्षणों के बाद वैज्ञानिकों ने कहा था किडब्ल्यूएचओ द्वारा अब तक मंजूर की गई एकमात्र मलेरिया वैक्सीनसे ज्यादा प्रभावशाली साबित हुई है. नयी वैक्सीन का अंतिम दौर का परीक्षण अभी बुरकीना फासो, केन्या, तंजानिया और माली में जारी है. इसके नतीजे साल के आखिर तक आने की संभावना है.

पहली वैक्सीन से तुलना

पिछले साल शुरुआती परीक्षणों के नतीजे जारी किए गए थे, जिनका निष्कर्ष रहा कि बुरकीना फासो में जिन बच्चों को यह वैक्सीन दी गई, वहां इसकाअसर 80 प्रतिशत तक ज्यादा रहा. विश्व स्वास्थ्य संगठन फिलहाल एक मलेरिया वैक्सीन मोस्क्वीरिक्स के लिए पायलट प्रोग्राम शुरू कर चुका है, जो दुनिया की पहली मलेरिया वैक्सीन है. इसे तीन अफ्रीकी देशों घाना, केन्या और मलावी में शुरू किया गया है. लेकिन ग्लैक्सोस्मिथक्लाइन द्वारा तैयार की गई यह वैक्सीन 30 प्रतिशत तक ही प्रभावी है.

मुनाफे के मच्छरों से घिरी मलेरिया की वैक्सीन

डब्ल्यूएचओ प्रवक्ता तारिक यासारेविच के मुताबिक पायलट प्रोग्राम के दौरान यह वैक्सीन तीन देशों में करीब 14 लाख बच्चों को दी गई है और "जानें बचा रही है." यासारेविच ने कहा कि संगठन का मलेरिया वैक्सीन पैनल नयी वैक्सीन के बारे में उपलब्ध जानकारियों की समीक्षा कर रहा है लेकिन उसे और ज्यादा डाटा की जरूरत है, ताकि वैक्सीन के प्रभाव का आकलन किया जा सके.

उन्होंने कहा, "हम एक सुरक्षित, प्रभावशाली और डब्ल्यूएचओ द्वारा मान्यता प्राप्त दूसरी वैक्सीन का स्वागत करेंगे ताकि यह पहली वैक्सीन की मदद कर सके."

अभी यह स्पष्ट नहीं है कि नयी वैक्सीन कब तक घाना में उपलब्ध हो पाएगी. देश के खाद्य और दवा प्राधिकरण ने 5 से 36 महीने तक के बच्चों के लिए इसके प्रयोग की अनुमति दी है. एक बयान में प्राधिकरण ने कहा कि यह आयुवर्ग मलेरिया से जान जाने के सबसे ज्यादा खतरे में होता है.

वैक्सीन का स्वागत

घाना के टीकाकरण कार्यक्रम के प्रमुख क्वामे अंपोंसा-आखियानो ने कहा कि जब ऑक्सफर्ड द्वारा तैयार यह वैक्सीन इस्तेमाल होने लगेगी, तब घाना के अधिकारी इसके फायदे-नुकसान का आकलन कर अंतिम फैसला करेंगे कि कौन सी वैक्सीन ज्यादा प्रभावशाली है.

ऑक्सफर्ड का कहना है कि यह नयी वैक्सीन बहुत कम खर्च पर तैयार की जा सकती है. भारत के सीरम इंस्टीट्यूट ने कहा कि मांग के आधार पर वह सालाना 10 करोड़ तक खुराकें तैयार कर सकता है. घाना द्वारा नयी वैक्सीन को मंजूरी दिए जाने का अफ्रीका में स्वागत हुआ है.

बुरकीना फासो में इस वैक्सीन के परीक्षण की अगुआई कर रहे शोधकर्ता हालीडो टिंटो ने कहा, "जितना ज्यादा हम इंतजार करेंगे, उतने ही ज्यादा हजारों बच्चों को खो देंगे."

वीके/एए (एपी, रॉयटर्स)

Source: DW

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