गुजरात में नदी किनारे बनेगा 200 करोड़ का पंचामृत भवन, पेड़ों की रक्षा के लिए बदली जगह

Gujarat News, गांधीनगर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समय के प्रोजेक्ट्स को पूरा करने के लिए रूपाणी सरकार तेजी से प्रयास कर रही है। इसी कोशिश के तहत गांधीनगर में स्थगित किए गए पंचामृत भवन के निर्माण को फिर से शुरू किया जाएगा। पेड़ों की रक्षा करने के लिये इसके स्थल को भी बदल गया है। इस भवन के निर्माण में 200 करोड़ रुपए का खर्च आने का अनुमान है।

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2010 में मोदी ने की थी घोषणा
बता दें कि, पंचामृत भवन नरेंद्र मोदी का प्रोजेक्ट है। उन्होंने 2010 में इस प्रोजेक्ट की घोषणा की थी। पंचामृत भवन का अर्थ- जन, जल, उर्जा, संरक्षण और ज्ञान जैसे विषय पर आधारित है।जहां महात्मा मंदिर सचिवालय को प्रेरित करता है, वैसे ही पुरुषार्थ सचिवालय में होता है और परिणाम पंचामृत भवन में मिलेगा।

इसलिए अटक गया था प्रोजेक्ट
गुजरात की तत्कालीन मुख्यमंत्री आनंदीबहन पटेल ने पंचामृत भवन बनाने पर जब काम शुरू करने की बात कही तो गांधीनगर की पर्यावरणीय संस्थानों ने विरोध शुरू कर दिया। इसके पीछे की वजह ये थी कि यदि भवन बनता तो हजारों पेडों को हटाना पड़ता, जो इन पर्यावरणीय संस्थानों को मंजूर नहीं था। इस विरोध को देखकर आनंदीबहन पटेल की सरकार ने प्रोजेक्ट स्थगित कर दिया था। अब पीएमओ की सूचना से मुख्यमंत्री विजय रूपानी इस परियोजना को पूरा करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने प्रशासनिक तंत्र को पंचामृत भवन के लिए एक अलग जगह की तलाश करने का आदेश दिया है, जहाँ कम मात्रा में पेड़ों की कटाई हो सकती है और भवन का निर्माण भी समय पर पूरा हो सकता है।

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104 एकड़ भूमि का अधिग्रहण
यह पंचामृत भवन विधानससभा के पीछे साबरमती नदी के तट पर बनाने का सरकार का प्लान है। नरेन्द्र मोदी ने जब इसकी घोषणा कि थी तब इसकी लागत 55 करोड़ तय की गइ थी, फिर आनंदीबहन पटेल के भवन बनाने की घोषणा कि तब लागत 103 करोड़ हो गई थी। आनंदी बेन सरकार ने पंचामृत भवन के लिए साबरमती के तट पर 104 एकड़ भूमि का अधिग्रहण भी किया था।

20,000 से ज्यादा पेड़ कटने वाले थे
पर्यावरण संगठनों का कहना है कि अगर निर्धारित जगह पर पंचामृत भवन बनता है तो 20,000 से ज्यादा पेड़ कटने वाले थे। हालांकि, अब सरकार के पास इस इमारत को बनाने के दो तरीके हैं। एक को मूल स्थान को थोड़ा स्थानांतरित करना होगा या बड़े पेड़ों को प्रत्यारोपण करना होगा। सरकार इन दोनों विकल्पों पर विचार कर रही है। पंचामृत भवन के लिए सरकारी और निजी विशेषज्ञों द्वारा विभिन्न डिजाइन तैयार किए गए हैं। अब नई जगह के चयन की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। परियोजना के लिए प्रस्तुतियाँ तैयार कर ली गई हैं।

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