गुजरात के सूखा प्रभावित 16 लाख से ज्यादा किसानों ने मांगी आर्थिक मदद, सरकार ने इतनों को दी

Gujarat News, गांधीनगर। गुजरात के सूखाग्रस्त जिलों के 16.82 लाख किसानों ने सरकार से आर्थिक सहायता की मांग की है। इसके लिए इन किसानों ने किसान सहायता नीति के तहत आवेदन किए हैं। वहीं, सरकार ने राज्य में सूखाग्रस्त 16 जिलों की 96 तहसीलों में किसानों को मदद जारी रखी हुई है। ऐसे में अगर, सभी किसानों को यह मदद दी जाती है तो 2359 करोड़ चाहिए होंगे।

6,60,412 किसानों को सब्सिडी की रकम भेज दी गई

6,60,412 किसानों को सब्सिडी की रकम भेज दी गई

अधिकारिक आंकड़ो के अनुसार, सरकार सूबे में सूखा के मारे किसानों को उबारने के लिए हजारों करोड़ खर्च कर चुकी है। 16,82,725 किसानों द्वारा किए गए आवेदनों में से सरकार ने 6,60,412 किसानों को 644 करोड़ रुपए बतौर सब्सिडी उनके बैंक खातों में हस्तांतरित की है।

गुजरात में 27 लाख हेक्टेयर से ज्यादा भूमि सूखाग्रस्त

गुजरात में 27 लाख हेक्टेयर से ज्यादा भूमि सूखाग्रस्त

गुजरात में करीब 27.86 लाख हेक्टेयर जमीन ऐसी है, जो सूखाग्रस्त जिलों के अंतर्गत आती है। किसानों को इस जमीन के औसत में देखें तो सरकार प्रति किसान 5300 से 6300 रुपये प्रति हेक्टेयर मुआवजा दे रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य के बनासकांठा जिले का अधिकतम 4.92 लाख हेक्टेयर जमीन सूखाग्रस्त है। किसान सहायता के लिए जिले से 2.87 लाख से अधिक आवेदन आए हैं। अब तक 1.60 लाख किसानों को सहायता दी जा चुकी है। दूसरे स्थान पर राजकोट है, जहां 1.77 लाख किसानों ने आवेदन किया है। जिसमें से 1.20 लाख किसानों को सहायता दी गई है।

अगले सप्ताह तक सभी किसानों को मदद पहुंचाने का अनुमान

अगले सप्ताह तक सभी किसानों को मदद पहुंचाने का अनुमान

राज्यभर में किए जा रहे किसान सहायता भुगतान के तहत सरकार का मानना है कि वह अगले सप्ताह तक 2359 करोड़ रुपये का भुगतान कर देगी। जो​ कि आवेदनों की जद में आ रहे 16.82 लाख किसानों तक पहुंचेंगे। ये रुपए किसानों को सीधे उनके बैंक खाते में जमा कराए जा रहे हैं।

केंद्र और राज्य सरकार दोनों दे रही आर्थिक सहायता

केंद्र और राज्य सरकार दोनों दे रही आर्थिक सहायता

किसान सहायता देने के लिए केंद्र और राज्य सरकार को कुल 2038 करोड का अनुदान आवंटित किया गया है। जिसमें से अब तक 9.93 लाख हेक्टेयर क्षेत्र के 6,60,412 किसानों को सहायता राशि दी गई है। वहीं, गुजरात में पिछले तीन सीजन कृषि के लिए प्रतिकूल साबित हुए हैं। पिछले साल सरकार ने नर्मदा का पानी पीने के लिये आरक्षित कर दिया था, इस वजह से ज्यादातर किसान अपने खेत में बहुत कम फसल ले सके हैं।

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