जलसंकट: गुजरात में प्याज की बुवाई 80% गिरी, अब इसके बढ़ते दामों की वजह से छलकेंगे आंसू
Gujarat News In Hindi , गांधीनगर। जल संकट के चलते गुजरात में कई फसल-सब्जियों की खेती बुरी तरह प्रभावित हुई है। यहां प्याज की बुवाई में ही 80% की गिरावट देखी गई है। राज्य के कृषि विभाग की बुवाई रिपोर्ट के अनुसार, इस साल प्याज की बुवाई महज 1811 हेक्टेयर में हुई है, जबकि पिछले साल यह 9214 हेक्टेयर में हुई थी। बुवाई कम होने की वजह से अब सूबे में प्याज के दाम आसमान छूते नजर आएंगे। इसकी वजह पाकिस्तान से व्याप्त तनाव भी रहेगा, क्योंकि वहां का प्याज बड़े पैमाने पर गुजरात समेत कई राज्यों में पहुंचता था। इस बार पुलवामा आतंकी हमले के बाद भारत-पाक के बीच सब्जियों का व्यापार बहुत ही कम हो गया। गुजराती सब्जी व्यापारियों ने तो सीधे तौर पर ऐलान कर दिया था कि वे पाकिस्तान को सब्जियां नहीं बेचेंगे। खासतौर पर, यहां का टमाटर पड़ोसी मुल्क जाता था।

जलसंकट की वजह से आई बुवाई में गिरावट
प्याज की बेहद कम खेती होने के पीछे मुख्य वजह गुजरात में पानी की कमी का होना है। पानी नहीं होने के चलते किसानों ने प्याज की बुवाई कम कर दी है, जिसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ने वाला है। वहीं, घाटा होने कि वजह से प्याज के दाम भी इस बार काबू से बाहर हो सकते हैं।

2018 में हुआ था 1.57 लाख मैट्रिक टन प्याज का उत्पादन
रिपोर्ट के मुताबिक, गुजरात में पिछले साल 1.57 लाख मैट्रिक टन प्याज का उत्पादन हुआ था, जो घटकर 2019 में 31,000 मैट्रिक टन ही रह जाने का अनुमान है। बता दें कि, भारत में महाराष्ट्र, कर्नाटक, मध्यप्रदेश और राजस्थान के बाद गुजरात पांचवा सबसे बड़ा प्याज उत्पादक राज्य है। जिसकी बाजार में 6.5 प्रतिशत की हिस्सेदारी रही है। मगर, भीषण गर्मी एवं पानी कम मिलने की वजह से प्याज की बुवाई इस साल बहुत ही कम रह गई है।

बुवाई की लागत वसूल न हो पाना भी एक वजह
वहीं, स्थानीय स्तर पर मिली खबरों को देखा जाए तो महुवा और अमरेली में बड़ी संख्या में किसानों ने इस सीजन में प्याज का विकल्प इसलिए नहीं चुना, क्योंकि पिछले साल उनकी बुवाई की लागत भी वसूल नहीं हो पाई थी। बहुत से किसानों को प्याज के दाम एक रुपये से दो रुपये मिले थे।

ऐसे बढ़ेंगे दाम
महुवा एपीएमसी के अध्यक्ष का कहना है कि वर्तमान में महुवा थोक बाजार में जुलाई से अगस्त तक प्याज 2.5 रुपये से 6 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से बिक रहा है, जो बढ़कर 20 रुपये प्रति किलोग्राम हो सकता है।
कई विशेषज्ञों का कहना है कि यह अहमदाबाद जैसे शहरों में उपभोक्ताओं के लिए अच्छा नहीं है।"

महाराष्ट्र और कर्नाटक ने दी चुनौती
स्थानीय किसानों का कहना है कि पिछले साल मिले खराब दामों ने किसानों को प्याज की फसल लेने से डरा दिया है। किसान राष्ट्रीय स्तर पर गतिशीलता को बदलने की ओर भी इशारा करते हैं। गुजरात के प्याज की मांग दिल्ली, राजस्थान और पंजाब जैसे उत्तरी राज्यों में होती थी। लेकिन पिछले कुछ वर्षों से, महाराष्ट्र और कर्नाटक कम कीमत और उच्च गुणवत्ता के साथ प्रतिस्पर्धा दे रहे हैं। गुजरात के किसानों ने प्याज की जगह अब मूंगफली का विकल्प चुना है।












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