1984 तक रहा कांग्रेस का गुजरात में दबदबा, फिर भाजपा के उदय के बाद ऐसे कम होता गया रुतबा

Gujarat News in Hindi, गांधीनगर। आगामी लोकसभा चुनाव (General election 2019) में गुजरात की धरती पर कौन भारी रहेगा, इसका पता तो 23 मई के बाद ही चल पाएगा। मगर, अब तक यहां कांग्रेस-भाजपा का दबदबा कब-कब रहा, यह जान लीजिए। वर्ष 1984 के लोकसभा चुनावों के समय जब भाजपा का उदय हो ही रहा था, कांग्रेस यहां काबिज रही। हालांकि, पांच साल पहले जब 2014 के लोकसभा चुनाव हुए तो सभी सीटों से कांग्रेस का सूपड़ा साफ हो गया।

शाह का दावा- इस बार भी हम सभी 26 सीटें जीतेंगे

शाह का दावा- इस बार भी हम सभी 26 सीटें जीतेंगे

16वीं लोकसभा के चुनावों से पहले भाजपा से नरेंद्र मोदी को प्राइम मिनिस्टर का कैंडिडेट घोषित किए जाने के बाद राज्य के मतदाताओं ने मोदी को चुना। तब सभी 26 सीटों पर भाजपा को ही जीत मिली। हालांंकि, अब कई राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि पांच साल बाद अब 2019 में राज्य में मोदी का करिश्मा कम हुआ है। ऐसे में भाजपा ने कांग्रेस के कई मजबूत नेताओं और विधायकों को अपनी ओर खींचा। इस सबके बीच भाजपा के अध्यक्ष अमित शाह का दावा है कि इस बार भी वे (BJP) सभी 26 सीटें जीतेंगे। वह खुद गांधीनगर उत्तर सीट से चुनाव लड़ने जा रहे हैं।

शुरुआत से ऐसे दिलचस्प रहे गुजरात में लोकसभा चुनाव

शुरुआत से ऐसे दिलचस्प रहे गुजरात में लोकसभा चुनाव

गुजरात में लोकसभा चुनाव 1962 से होते आ रहे हैं। राज्य में पहले चुनाव में 22 सीटों में से कांग्रेस को 16, निर्दलीय को 4, पीएसपी को 1 और एनजेपी को एक सीट मिली थीं। 1967 में, 24 लोकसभा सीटों में से, स्वतंत्र पार्टी को 12, कांग्रेस को 11 और एक सीट निर्दलीय को मिली।

1977 में पहली बार 26 लोकसभा सीटों पर चुनाव हुआ

1977 में पहली बार 26 लोकसभा सीटों पर चुनाव हुआ

1971 में कांग्रेस को 11, एनसीओ को 11 और निर्दलीय पार्टी को दो सीटें मिलीं। 1977 में पहली बार 26 लोकसभा सीटों पर चुनाव हुआ। जिनमें से कांग्रेस को 10 और जनता पार्टी-बीएलडी को 16 सीटें मिलीं। 1980 में कांग्रेस को 25 और जनता पार्टी को केवल एक सीट मिली थी।

1984 में कांग्रेस को 24, पहली बार उतरी भाजपा को एक सीट मिली

1984 में कांग्रेस को 24, पहली बार उतरी भाजपा को एक सीट मिली

1984 में कांग्रेस को 24, भाजपा को एक और जनता पार्टी को एक सीट मिली थी। भाजपा के एकमात्र डॉ. एके पटेल महेसाना से चुनाव जीते थे। 1989 में जनता दल को 11, बीजेपी को 12 और कांग्रेस को 3 सीटें मिलीं। 1991 में बीजेपी को 20, कांग्रेस को पांच और जनतादल (गुजरात) को एक सीट मिली थी।

2014 में गुजरात से कांग्रेस का सूपड़ा साफ हो गया

2014 में गुजरात से कांग्रेस का सूपड़ा साफ हो गया

1996 में भाजपा ने 16 और कांग्रेस ने 10, 1998 में भाजपा ने 19 और कांग्रेस ने 7 सीटें जीती थीं। 1999 में भाजपा ने 20 और कांग्रेस ने छह सीटों पर जीत दर्ज की। 2004 में, जब यूपीए देश में सत्ता में आई तब कांग्रेस को गुजरात में 12 और भाजपा को 14 सीटें मिलीं। कांग्रेस ने 2009 में 11 सीटें जीतीं और भाजपा को 15 सीटें मिलीं। आखिरकार, 2014 के लोकसभा में नरेंद्र मोदी भाजपा के प्रधानमंत्री के उम्मीदवार थे और सभी 26 सीटें भाजपा को ही मिलीं। लोगों ने इसे मोदी की प्रचंड सुनामी करार दिया।

1984 के बाद शुरू हुआ कांग्रेस का गिरना

1984 के बाद शुरू हुआ कांग्रेस का गिरना

बता दें कि, मोदी ने गुजरात में 13 साल तक सत्ता संभाली। लोकसभा के इतिहास में, कांग्रेस को पहली बार 2014 के लोकसभा चुनाव में शून्य सीट मिली। गुजरात में कांग्रेस का गिरना 1984 के बाद शुरू हुआ, लेकिन कांग्रेस ने पिछले चुनाव की तरह कभी कोई खराब प्रदर्शन नहीं किया।

पढ़ें: गुजरात से चुने जाने हैं 26 सांसद, लोकसभा चुनाव के लिए यहां 4 शहरों की 5 सीटों पर 80 दावेदार; जानिए कौन सी हैं सबसे चर्चित सीट

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