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गुजरात: 3 सबसे बड़े उत्सवों से विदेशियों ने मुंह मोड़ा, 94 करोड़ खर्चे फिर भी 5 साल में हजार भी नहीं आए

Gujarat News, गांधीनगर। सरकार ने गुजरात में विदेशी पर्यटकों के लिए तीन बड़े और प्रमुख उत्सव का आयोजन किया, लेकिन इनमें विदेश से आने वाले पर्यटक मानो दिलचस्पी ही नहीं ले रहे। बाहरियों की संख्या कम हो गई है। ऐसे में सरकार की विदेश से डॉलर में रुपया कमाने की उम्मीद खरी उतरती नहीं दिख रहीं।

foreign visitors to gujarat

मोदी के सपने को पूरा नहीं कर पा रहे अधिकारी
बताते चलें कि गुजरात सरकार राज्य में रणोत्सव, पतंगोत्सव और नवरात्री उत्सव को मनाने के लिये बजट में फंड का प्रावधान भी कर रही है। रणोत्सव कच्छ जिले के सबसे बड़े घोरड़ो के रण में मनाया जाता है। पतंगोत्सव अहमदाबाद समेत सात जगह मनाया जाता है और नवरात्री पुरे गुजरात में मनाई जाती है। तत्कालिन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने ये तीनों उत्सव को राज्य सरकार मनायेंगी ऐसा तय किया था। उनका उद्देश ये था कि, गुजरात की टूरिजम इंडस्ट्रीज को बढावा मिले औऱ दुनिया के देशों से पर्यटक गुजरात की यात्रा करें।
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तीनों उत्सव के लिये 94.18 करोड खर्च हो गए, मगर
पिछले पांच साल में सरकार ने इन तीनों उत्सव के लिये 94.18 करोड रुपये का खर्च किया है। उत्सव पर खर्च तो किया लेकिन फॉरेन टूरिस्ट बहुत कम मात्रा में आये। यह बहुत ही चौंकाने वाला है कि बीते पांच साल में रणौत्सव में 38, पतंगोत्सव में 430 और नवरात्री में केवल 65 विदेशी पर्यटक आये हैं। यानी हजार भी नहीं, बल्कि 533 विदेशी ही।

विदेशी पर्यटकों के लिए 6 करोड़ रुपये खर्चे
गुजरात के पर्यटन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, सरकार ने इन तीन उत्सवों में विदेशी पर्यटकों के लिए छह करोड़ रुपये खर्च किए हैं। इन तीन उत्सवों को मनाने के लिए गुजराती परिवारों में काफी सारा उत्साह है। इन उत्सवों में विदेशी पर्यटकों को खींचने का प्रयास सफल नहीं हो पाया है। कुछ एनआरआई परिवार नवरात्री में अपने वतन आ रहे हैं। यह एक नियमित प्रक्रिया है, लेकिन कच्छ में रणोत्सव देखने के लिए विदेश पर्यटक नहीं आए हैं।

सरकारी समारोह में भाग लेने के लिए, राज्य का NRG विभाग उन सभी देशों को आमंत्रित करता है, जहाँ गुजराती परिवार रहते हैं। सरकार उनके लिए एकोमोडेशन के साथ तमाम सुविधायें उपलब्ध कराती है, लेकिन सरकार का लक्ष्य हासिल नहीं हुआ। अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव में हर साल 100 से 150 विदेशी आते हैं, जो सरकार के लिये कुछ उपलब्धि हो सकती है।

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