गुजरात में हद ही हो गई! सरहद पर मर मिटने वाले BSF के जवानों को भी नकली घी भेज दिया

Gujarat News, गांधीनगर। नकली माल सप्लाई ​किए जाने की घटनाओं के बारे में आप आए रोज खबरें पढ़ते होंगे। खाद्य पदार्थों में मिलावट कर बेचने से किसी की जान जोखिम में कैसे डाली है, गुजरात में इसका बड़ा उदहारण देखने का मिला है। एक ऐसा मामला, जब देश की सुरक्षा में तैनात जवानों की ही सेहत से खिलवाड़ कर दिया गया। जवानों के लिए जहां से घी खरीदा गया था, उन ट्रेडर्स ने उसमें मिलावट कर रखी थी। यानी, नकली घी जवानों के कैंप में भिजवा दिया गया।

बीएसएफ के जवानों को भेज दिया गया 170 किलो नकली घी

बीएसएफ के जवानों को भेज दिया गया 170 किलो नकली घी

यह मामला सामने आते ही सवाल उठ रहे हैं कि क्या सरहद के प्रहरियों को नकली माल से दूर नहीं रखा जा सकता? क्या दोषियों को ऐसा दंड मिलेगा​ जिससे अन्य फ्रॉड-ट्रेडर्स भी सबक ले सकें? संवाददाता के अनुसार, गांधीनगर शहर के पास सीमा सुरक्षा बल के कैंप में जवानों को 170 किलोग्राम नकली घी के पाउच सप्लाई किए गए। इस बारे में अमूल डेयरी को कंप्लेंट की गई तो पता चला कि ट्रेडर्स ने गडबड़ी की थी। कैंप के असिस्टेंट कमांडेन्ट ने चिलोडा पुलिस थाने में नकली घी पहुंचाने के लिये अहमदाबाद में कालूपुर के शेरावाली ट्रेडर्स के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई।

सरकार कड़े नियमों का पालन कराने में विफल

सरकार कड़े नियमों का पालन कराने में विफल

चिलोडा थाने की पुलिस का कहना है कि इस मामले में पड़ताल की जा रही है। ये पता किया जाएगा कि यहां नकली घी का कारोबार कैसे चल रहा है और कौन इसे चला रहा है। बहरहाल, ये जान लेना भी आवश्यक है कि गुजरात सरकार ने फूड एंड ड्रग्स विभाग को नकली चीजों औऱ मिलावट के केसो में कड़े नियंत्रण लगाने का अनुरोध किया था, लेकिन स्टाफ की कमी की वजह से राज्यभर में विभाग जांच नहीं कर पा रही। यह शर्मनाक है कि, देश के जवान जो लोगों की रक्षा का काम करते हैं उनको भी नकली घी पहुंचा दिया गया।

घी खरीद के लिए 63750 रुपये का भुगतान किया था

घी खरीद के लिए 63750 रुपये का भुगतान किया था

बीएसएफ कैंप में आसिस्टंट कमांडन्ट महेंद्रसिंह मालाराम मलिया के नेतृत्व में राशन का स्टोर लगा हुआ है। जवानों के राशन के लिये एक कमेटी का गठन किया गया था, जो जवानों के लिये चीजवस्तुएं और सामान लाती है। इस कमैटी ने हाल ही में कालूपुर के मां शेरावाली ट्रडर्स में से अमूल ब्रांड का 170 किलोग्राम घी खरीद के लिए 63750 रुपये का भुगतान किया था। खरीद के बाद जब जवानों में घी की बिक्री शुरू की तो पता चला कि, घी अमूल ब्रांड का नहीं नकली है।

ऐसे लगाया पता

ऐसे लगाया पता

कैंप के वरिष्ठों को सूचित करने के बाद घी के नमूने जांच के लिये गांधीनगर अमूल डेयरी में भेजा गया जहां पता चला कि, अमूल ब्रांड जैसा दिखने वाला यह घी नकली है। इस घी को अमूल के पैकेट में बेचा जा रहा था। कैंप के स्टोर में 49 पाउच घी था और शेष 19 पाउच शिविरों में बेचे गये थे। वह वापस लाकर कालूपुर के व्यापारी के सामने शिकायत दर्ज कराई।

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